जदयू ने खत लिखा लालू के नाम…

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जदयू के विधान पार्षद औऱ प्रवक्ता है नीरज कुमार

पूछा है- अपने जीवन में अकूत बेनामी संपत्ति अर्जित की

बेटे को भी राजनीति में सेट कर दिया अब और क्या चाहिए

कहा जा रहा जेल से लिखे लालू के खत का जवाब है ये पत्र

नयन, पटना। मौर्य न्यूज18।

“भारत में लोकतंत्र का उत्सव चल रहा है। आप उसमें शामिल होने के योग्य नहीं। आप उस काबिल नहीं कि इस लोकतंत्र के पर्व का हिस्सा बन सकिए। आपने जो किया है उसकी सजा मिल रही है। संविधान के अनुसार, कानून अपना काम कर रहा है। आप चारा चोर निकले। कोर्ट ने आपको सजा दी है। आप भुगतिए।”

“वैसे आपने अपने राजनीति जीवन काल में अबतक अकूत बेनामी संपत्ति अर्जित की । उससे भी मन नही भरा तो आपने अपने दोनों बेटों को राजनीति में सेट कर दिया। विधायक बना दिया। उपमुख्यमंत्री बनने तक का सौभाग्य प्राप्त करवा दिया। जिसे पाने के लिए एक राजनीतिक कार्यकर्ता की पूरी उम्र खप जाती है। विधायक तक नसीब नहीं हो पाता। आपने तो एक झटके में वो सब कर दिया जो कभी किसी के लिए सपने की तरह होता है। चारवाहा विद्यालय जैसे कॉसेप्ट वाले राजनेता आप रहे हैं। आपको पता है ये सब संविधान के कारण ही हो पाया है। और आप उसी संविधान को कोस रहे हैं। आप क्या रहे हैं लालू प्रसाद जी। आपको पता है इसी संविधान के तहत आपको जेल की सलाखों में रखा गया है। आप संविधान का पालन करना सीखिए। आपको देश के सबसे बड़े न्यायालय ने जमान नहीं दी। तो आपको ये भी पच नहीं रहा। आप पहले संविधान का पालन करना सीखिए फिर जनता से आप संविधान की बात करिए। “

कहने का मतलब साफ है कि

इसी संविधान ने आपको 15 सालों तक सत्ता में बनाए रखा। फिर भी इस संविधान को आप कोस रहे। इसे बचाने की बात कर रहे। कितना बर्गलाएंगे आप। ये हम नहीं जदयू के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार कह रहे हैं। और….

कुछ ऐसे ही जोशीली बातों के साथ विधान पार्षद नीरज कुमार अपनी बातों को आगे बढ़ाते हैे और पूरी मर्यादाओं के साथ सवाल उठा रहे हैं। आपको बता दें कि जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार अपने तेवर और खुलकर बातों को रखने के लिए काफी चर्चा में रहते हैं। बिहार के मोकामा इलाके के इस लीडर ने एकबार कांग्रेस लीडर राहुल गांधी को भी खत लिखा था। वो ऐसा कई बार कर चुके हैं। विभिन्न मुद्दों पर तमाम लीडरों को घेरते रहे हैं। या वो किसी पार्टी से जुड़े हों। हाल ही में उन्होंने अपनी पार्टी के ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के चाल चल पर घोर आपत्ति जताई थी औऱ कई सवाल खड़े किये थे।

आपको बता दें कि

चुनावी दौर में अजब-गजब का किस्सा चलता रहता है। जदयू के प्रवक्ता औऱ विधान परिषद के सदस्य नीरज कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को जो खत लिखा है। खत में कई सवाल उठाए गए हैे और नसीहत भी दी गई है। क्या कुछ लिखा है नीरज ने इसे आप पढ़ सकते हैं पूरे खत को यहां पोस्ट किया गया है।

अब सवाल है कि इसका कोई जवाब लालू प्रसाद की ओर से आता है या उनके दोनों बेटे की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं। ये देखनाा होगा। कहा ये जारहा है कि जदयू प्रवक्ता ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जरिए हाल ही में जेल से लिखे गए खत का जवाब दिया है।

फिलहाल जदयू प्रवक्ता का खत पढिए , राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के खत का जवाब है।

खत जो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के नाम लिखा है आप भी पढ़िए….

श्री लालू प्रसाद जी, …

Posted by Neeraj Kumar Mlc on Wednesday, April 10, 2019

श्री लालू प्रसाद जी, 
अध्यक्ष, राजद।


बिहार प्रारंभ से ही नई गाथा लिखते रहा है। पूरे देश में चल रहे लोकतंत्र के उत्सव में जब आप शामिल होने के ही योग्य नहीं हैं, तो इस पर लिखने या अफसोस जताने से क्या लाभ? वैसे भी बिहार के लेग अब उस ’लालटेन युग’ और ’जंगल राज’ को भूलकर नए बिहार की पटकथा लिख रहे हैं।

यहां के लोग बिहार को अपने उस गौरवशाली अतीत की तरह वर्तमान गौरवशाली बनाने के लिए व्यग्र हैं, जिसकी पटकथा सुशासन के इस सरकार ने लिखी है। वैसे, आपकी व्यग्रता और छटपटाहट उस कालखंड का परिणाम हैं, जिसके लिए अदालत ने भी उस काल को ’जंगल राज’ कहा था।

आपकी व्यग्रता जेल में रहने के कारण बढ गई है परंतु आप कोई स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के कारण, अल्पसंख्यकों या सामाजिक न्याय की लड़ाई लडने के कारण जेल नहीं गए हैं बल्कि अदालत ने आपको सरकारी राशि के घोटाला करने में दोषी पाया है। ऐसे में आपको सजा तो होनी ही थी।

हालांकि, आपने अपने राजनीतिक जीवन में परिवार के लिए अकूत बेनामी संपत्ति अर्जित कर ही लिया तथा अपने पुत्रों को भी राजनीति में ’सेट’ कर ही दिया तो फिर अब क्या शेष रह गया। आपने तो राजनीतिक गुरु बन अपने रास्ते पर चलने के लिए अपने पुत्रों को भी प्रशिक्षित कर चुके हैं।

आप जिस संविधान, लोकतंत्र और आरक्षण बचाने के नाम पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, तो अब आपके ’चरवाहा विद्यालय’ वाला युग गुजर गया है।

लोकतंत्र और संविधान में ही अदालत का भी समावेश है। और आपकी करनी के कारण देश की सर्वोच्च अदालत आपको जमानत तक देने को तैयार नहीं हैं। आप को तो उसी संविधान के तहत सजा सुनाई गई है, जिसे बचाने की आप दुहाई दे रहे हैं।

मेरी सलाह है कि पहले अपने से ही संविधान बचाने और इस पर विश्वास करना सिखिए। हां, जब तक बिहार के सत्ता पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काबिज हैं तो आरक्षण समाप्त करने की किसी को कूबत नहीं है।

बिहार में किसी भी धर्म, किसी भी वर्ग, किसी भी समाज के जो भी लोग वे बिहार के विकास को लेकर सामाजिक सदभाव बनाए रखने के लिए दृढसंल्पित है, इसके लिए आपको चिंतित होने की जरूरत नहीं।

नीरज कुमार 
जद (यू) प्रवक्ता 
बिहार

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट