बेगूसराय में जीत गए मतदाता !

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भाजपा के गिरिराज सिंह, राजद के तनवीर हसन औऱ कम्यूनिस्ट से कन्हैया।

मोदी Vs लालू के बीच हुई वोटिंग, कन्हैया ने काटे वोट

एनडीए और महागठबंधन को मिली मजबूत टक्कर

बेगूसराय से नयन की रिपोर्ट

हिन्दू – अपनी जातीय दल पर टिके रहे। और मुस्लिम– कोई यहाँ गिरा कोई वहां। सबसे मज़े की बात कहें तो बेगूसराय में #मोदी_vs_लालू ही दिखा। रेस में नाम भले ही गिरिराज सिंह , कन्हैया या तनवीर हसन का सामने था लेकिन यहाँ मोदी और लालू को ही ध्यान में रखकर लोगों ने वोट किया। इन दोनों के वोटर पोलिंग करने में ज़्यादा गंभीर दिखे।

पूरे लोकसभा की बात करें तो यहां के मतदाताओं ने वोटिंग की औऱ करीब 60 प्रतिशत तक मतदान हुए। जो 2014 से बेहतर स्कोर है।

उत्तेजित दिखे कन्हैया के वोटर, गुस्सा भी झेलना पड़ा

जबकि तीसरा नाम जो कन्हैया का सबसे तेज गति से चल रहा था …उनको कम आँकना भी ठीक नहीं । क्योंकि इनके वोटर काफ़ी उत्तेजित मिज़ाज के दिखे। बेगूसराय इलाक़े में एक कहावत है …मार कम बफार ज़्यादे। यही स्थिति कह सकते थे। एक कोई वोट कन्हैया को दिया नहीं कि लगता की बहुत बड़ी जंग जीत ली। हल्ला ऐसे करते कि पूरा गाँव -का-गाँव जैसे कन्हैया को ही वोट कर रहा हो। पर ऐसा था नहीं ।कन्हैया के नाम पर ज़्यादातर लोग ग़ुस्से में ही दिखे। यादव वोटर के बीच घुसकर भी बड़गलाने में थोड़ी कामयाबी मिली भी। पर बहुत ज़्यादा नहीं ये जाति महागठबंधन के साथ मज़बूती से दिखे और कुछ ने मोदी के नाम पर मुहर जरूर लगाया लेकिन ज़ाहिर होने नहीं दिया। मुस्लिम काफ़ी दो-राहे पर दिखे। टुकड़े गैंग उनकी पहली पसंद जरूर रही पर राजद के तनवीर हसन को भी मज़बूती से थामे रहे। नतीजा, बंट गए। और दूसरी ख़बर कांग्रेस के सिनियर लीडर दिग्विजय सिंह की ओर से कन्हैया को सपोर्ट करने की अपील की आई। यही बात कन्हैया समर्थकों का हौसला बुलंद कर गई।और अंत में हवा चली की कन्हैया बाज़ी मार लेंगे। इस हवा को सोशल मीडिया पर भी तुल दिया गया । इसे कन्हैया खेमे के लिए ख़ुशफ़हीम कह सकते हैं। क्योंकि लास्ट टाइम में महागठबंधन को छोड़कर कांग्रेसी पाला बदलकर कन्हैया की ओर गए होंगे । इसकी संभावना नहीं के बराबर दिखती है।

महागठबंधन को यादव-मुस्लिम का मिला साथ

वहीं बात महागठबंधन की करें तो यादव-मुस्लिम समीकरण ही मज़बूत आधार रहा। इन्हीं दोनों जातिए समीकरण को लेकर महागठबंधन 2014 में भी मजबूत स्थिति में रहा। लेकिन इसबार की तस्वीर इसलिए बदलती दिखी क्योंकि मुस्लिम वोटर को कन्हैया ने बांंट दिया। औऱ इसी बंटवारे के कारण महागठबंधन चिंतित हो सकता है।

एनडीए के पास जीत के आंकड़े, लेकिन डैमेज यहां भी है

एनडीए खेमा फ़ॉर्वर्ड , बनिया, कोईरी-कुर्मी और दलित वोटरों का साथ मिलने की ख़बर के बाद जीत का ताल ठोका है। यही समीकरण इतना मजबूत है कि इनलोगों ने खुलकर पूरी तरह से मतदान किया है तो इनका पीछा करना महागठबंधन के लिए मुश्किल ही होगा।

यहाँ ये भी बताना ज़रूरी है कि दलित वोटरों में पासवान और पासी को छोड़कर बाँकी अन्य उपजातियाँ महागठबंधन की ओर भी दिखी और कन्हैया की ओर भी । यानि महादलित वोट बँट गए। तीनों खेमे में गए हैं।

जबकि फार्वर्ड नौजवान कन्हैया की तरफ ज्यादा मुखातिब दिखे। जो एनडीए की सेंधमारी ही कही जाएगी। लेकिन यहां देखना होगा कि कितनी सेंधमारी हो पायी है।

ऐसी स्थिति में कौन कितना स्कोर करेगा। इसे बखूबी समझा जा सकता है।

जानकारी की बातें—

  • चेरिया बरियारपुर में नए पुनरीक्षण के आधार पर 241,
  • बछवाड़ा में 299,
  • तेघड़ा में 278
  • मटिहानी में 325
  • साहेबपुर कमाल में 245
  • बेगूसराय में 312 तथा
  • बखरी में 244 मतदान केंद्र बनाए गए ।

करीब 20 लाख वोटर, इसमें नए कितने , ये भी जानिए

बढ़ गए हैं करीब डेढ़ लाख वोटर विगत चुनाव के मुकाबले वोटरों की संख्या में एक लाख 45 हजार 392 की वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर करीब 19 लाख 42 हजार 769 मतदाता है।

पुरूष मतदाता – 10 लाख 34 हजार 260 हैं ।
महिला मतदाता – 09 लाख 08 हजार 446 हैं।

सबसे अधिक

बेगूसराय विधानसभा में – तीन लाख 20 हजार 830 वोटर
मटिहानी में – तीन लाख 19 हजार 199
बछवाड़ा में – दो लाख 86 हजार 61,
तेघड़ा में – दो लाख 77 हजार 484,
बखरी में – – दो लाख 56 हजार 887,
चेरिया वरियारपुर में – दो लाख 41 हजार 239
साहेबपुर कमाल में – दो लाख 41 हजार 69 वोटर हैं।

यहां बाता दें कि इसमें करीब 7 लाख भूमिहार वोटर हैं। और यादव- मुस्लिम मिलाकर करीब 5 लाख हैं। कोईरी-कुर्मी करीब 2 से 2.50 लाख के आसपास हैं। इसलिए ये मुकाबला दिलचस्प हो जाता है।

बेगूसराय से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट।