शारदा सिन्हा जैसी बिटिया के भी सुर

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कोकिला वंदना भारद्वाज को सुनकर मुग्ध हो जाएंगे आप

https://www.facebook.com/anshumansinha83/videos/10156741964385862/?t=0

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नयन, पटना, मौर्य न्यूज18।

संगीत कोई एक दिन में आपके गले उतर जाएगी ऐसा नहीं है। एक इवादत है एक साधना है और जब इसमें वक्त दिया जाता है तो संगीत साक्षात गॉड की तरह कंठ में उतर आते हैं। एक नाम जो बिहार से लिए जाते हैं मां शारदा सिन्हा का। मां शारदा सिन्हा पद्मविभूषण जैसे नागरिक सम्मान से सम्मानित हैं लेकिन इस देश में वो स्वर कोकिला के नाम से मसहूर हैं। और कह सकते हैं सरस्वती उनमें आकर बसती हैं। उनकी ही बिटिया है वंदना भारद्वाज आप वीडियों में उनके स्वर को सुनें । गर्व होगा कि अपने देश की बिटिया संगीत को कैसे जी रही है।

मां शारदा सिन्हा ने जिस तरह ने संवारा है वंदना जी को उसके लिए देश उन्हें एकबार फिर से सम्मान करता है। वंदना के स्वर से देश मुग्ध हो जरूरी है ऐसी स्वर कोकिला बिटिया की अधिक से अधिक संगीत समारोह हो और देश के जनजन तक ये स्वर पहुंचे। इसकी कामना है।

आपको बता दें कि बिहार में छठ की गीतों को मां शारदा सिन्हा के गाए गीत से ही इसकी पवित्रा का एहसास होता है। इनकी हर वो गीत अजर-अमर हो चले हैं। अब बिहार में एक और संगीत कोकिला का जन्म हुआ है इसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

इस विषय पर मां शारदा सिन्हा के पुत्र अनशुमन सिन्हा लिखते है…उनके लिखे को भी प्रस्तुत कर रहा हूं…।

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कालिदास ने जब आषाढ़ के प्रथम दिन आकाश पर मेघ उमड़ते देखे तो उनकी कल्पना ने उड़ान भरकर उनसे यक्ष और मेघ के माध्यम से विरह-व्यथा का वर्णन करने के लिए ‘मेघदूत’ की रचना करवा डाली। उनका विरही यक्ष अपनी प्रियतमा के लिए छटपटाने लगा और फिर उसने सोचा कि शाप के कारण तत्काल अल्कापुरी लौटना तो उसके लिए सम्भव नहीं है। इसलिए क्यों न संदेश भेज दिया जाए। कहीं ऐसा न हो कि बादलों को देखकर उनकी प्रिया उसके विरह में प्राण दे दे। और कालिदास की यह कल्पना उनकी अनन्य कृति बन गयी।

सुरैया तबस्सुम जी द्वारा लिखा गया एक गीत है “बदरा ले जा नीर हमारे” जिसको सं1976 में रूना लैला जी ने अपनी आवाज़ से सवारा था। 
सुरैया तबस्सुम जी के इस गीत में माहकवि कालिदास जी की मेघदूत की प्रेरणा साफ झकलकती है। 
एक शाम हमारे आवास पर जब सुर की देवियां मौजूद थी , माहौल संगीतमय और साहित्यिक था , और घर की बैठकी में आनंद रस बटोरने मैं खुद वहां मौजूद था , ऐसे में एक मीठी सी आवाज़ में थोड़ी मासूमियत घोल कर Vandana Bharadwaj ने माँ शारदा सिन्हा और Kavita Seth जी के समक्ष इसी गीत को गाया । आपकी शाम की चाय के लिए थोड़ी मिठास भेज रहा हूँ , आप भी अपनी शाम को इस मासूम मिठास से भर लें यही कामना है । MAA (Sharda Sinha ) तुझे सलाम !!! And sincerely Thanking Vibha Sinha ji .. who caused this sweet event ..

मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट।