पटना का साहिब कौन ? शत्रु या रवि!

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मौर्य न्यूज18 ने पूछा पटना से, बोलो-बोलो कौन है वो ?

बातचीत पर आधारित खास रिपोर्ट

पटना। मौर्य न्यूज18 ।

पटना में सबसे अंतिम फेज में मतदान होना है। यहां एक बीजेपी का बागी है तो दूसरा बीजेपी का जन्मजात साथी। दोनों बीजेपी के दिग्गज कहे जाने वाले नेता। अब एक कांग्रेस का दामन थाम लिया है। नाम शत्रुघ्न सिन्हा। दूसरी ओर हैं बीजेपी के दिग्गज नेता रविशंकर प्रसाद। दोनों पटना से और दोनों सांसद औऱ केन्द्रीयमंत्री रह चुके हैं। साथ काम कर चुके हैं। एकदूसरे को भाई-भाई मानने वाले आमने-समाने हैं। अब सवाल है कि दोनों में से कौन बनेगा पटना का साहिब। यही सवाल लिए हम पब्लिक के बीच पहुंचे।

आप वीडियो रिकॉर्डिंग सुनेंगे तो साफ पता चल जाएगा कि पटना की पब्लिक बीजेपी के साथ कितन गहरे तरीके से जुड़ी हुई है। जिस तरह से जवाब आ रहे हैं। उससे साफ कहा जा सकता है कि चाहे कोई भी रहे बीजेपी से जो भी होगा वही पटना का साहिब होगा।

साफ है कि शत्रुघ्न की राह आसान तो बिल्कुल नहीं इसलिए वो मैदान में होकर भी खामोश हैं। पब्लिक का व्यू सुनेंगे तो उन्हें स्थाई तौर पर खामोश करने के मूड में लोग भी हैं। लेकिन मैदान में जब कोई खिलाड़ी होता है तो उसे आसान समझने की भूल भी नहीं करनी चाहिए। इसलिए रविशंकर प्रसाद केन्द्रीय मंत्री होते हुए भी भाजपा की ओर से पूरी ताकत झोंक रखा है। कहीं कोई चूंक ना हो जाए क्योंकि पब्लिक का मूड है कहीं किसी बात पर खटक गई तो लेने के देने पड़ सकते हैं।

congress leader Satrughan Sinha & Bjp leader Ravishankar prasad @ Patna Sahib Loksabha

यहां रविशंकर प्रसाद भले ही रेस में बहुत आगे दिखते हैं लेकिन इनकी ओऱ से बडा पेंच हैं इनकी ही पार्टी के आके सिन्हा जैसे दिग्गज भाजपा नेता का टिकट कट जाना। और आके सिन्हा राज्यसभा से है उनकी अपनी पकड़ पब्लिक और संगठन दोनों में है। आरएसएस में उनकी गहरी पैठ है।

संगठन ने आरके सिन्हा का टिकट काटकर कहीं ना कही पटना के बाहुल्य जातिय समीकरण को भी खंडित करने की गलती की है। कायस्थ समाज इसको लेकर विरोध भी जता चुका है और आरके सिन्हा चुनाव में कहीं दिखते भी नहीं है। रविशंकर प्रसाद के साथ उनकी कोई जुगलबंदी अबतक नहीं दिखी है और सीन से ही गायब हैं। दूसरी ओऱ शत्रुघ्न सिन्हा इसे अपनी उपलब्धि मान रहे हैं और इसका फायदा उठाने के लिए बयानबाजी भी कर चुके हैं कि अगर आर के सिन्हा भाजपा से होते तो मैं पटना से उम्मीदवारी पर विचार करता हो सकता था मैं ना भी चुनाव लड़ता लेकिन अब वो मैदान में नहीं हैं तो उनका आशीर्वाद मुझे भी मिलेगा। कहते हैं उनकी खामोशी का फायदा मुझे जरूर मिलेगा। अगर ऐसा हुआ तो रवि बहुत मुश्किल में पड़ सकते हैं। लेकिन भाजपा के शीर्ष नेताओं का मानना है कि ऐसा कुछ भी नहीं है सब आरके सिन्हा को पता है औऱ वो पार्टी के उम्मीदवार के साथ खड़े हैं। औऱ पार्टी पूरी तरह से आश्वस्त है कि जीत तो पहले से भी ज्यादा पक्की जैसी है। वैसे रविशंकर प्रसाद उम्मीदवारी के बाद से लगातार लोगों से मिल रहे हैं काफी पसीना बहा रहे हैं लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा बहुत ही आराम से इस चुनाव को लड़ रहे हैं बिना किसी चील पॉ के ।

वैसे लोगों की राय भी जो अब सामने आ रही है वो रवि शंकर के फायदा वाली ही है। लेकिन चुनाव जैसे-जैसे करीब आएंगे मुकबला जबरद्स्त होगा इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की खास रिपोर्ट।