चुनावी रिजल्ट के बाद सवर्ण की गुप्त प्लानिंग क्या है? Talkshow Part-2

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खास-बातचीत में समाजसेवी जेएन त्रिवेदी ने एनडीए से सवर्ण की नाराजगी पर खुलकर की बात

समाज सेवी त्रिवेदी के पास बिहार-यूपी के सवर्णों का लगता है जमावड़ा, होती रहती है मिटिंग, गुप्त प्लानिंग

कहा- चुनाव के दौरान भी एनडीए से थी नाराजगी लेकिन विकल्प ना होने से दब गया गुस्सा

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।

पटना । चुनावी रिजल्ट के बाद बिहार-यूपी के सवर्ण खासकर बिहार के सवर्ण एनडीए के खिलाफ क्या गुप्त प्लानिंग कर रहे इस बाद का खुलासा किया है । कभी बसपा सुप्रीमो मायावती तो कभी जदयू सुप्रीमो सीएम नीतीश कुमार के करीबी रहे समाजसेवी जेएन त्रिवेदी ने।

जेएन त्रिवेदी कहते है कि ये सच्चाई है कि चुनाव के दौरान बिहार के सवर्णों की गुप्त मीटिंग हुई थी कि लोकसभा चुनाव में एनडीए के खिलाफ कैसा रूख अपना जाए। सवर्णों की आवाज कैसे बुलंद की जाए। सवर्णों की उपेक्षा के लिए कैसे सबक सिखाया जाए। लेकिन लाख नाराजगी के बाद भी देश के लिए मोदी सरकार को चुनने के लिए वोट देने का फैसला लिया गया औऱ लड़ाई जारी रखने की प्लानिंग हुई।

तय हुआ कि चुनावी रिजल्ट के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। और नोटा के मुद्दे पर भी बहस हुई और इसके इस्तेमाल करने ना करने का स्वविवेक पर छोड़ दिया गया।

श्री त्रिवेदी कहते हैं कि एनडीए हो या महागठबंधन सवर्ण के सम्मान को और उसके हित को दोनों ने दरकिनार किया है। एक और जहां महागबंधन सवर्णों के लिए आग की तरह है वही दूसरी ओर एनडीए वो खाई वाली पानी है, नदी है जहां डूबने वाली स्थिति है। ऐसे में एनडीए को ही चुना गया कि यहां कूदने पर तैर कर भी जान बचाई जा सकती है लेकिन महागबंधन जैसे आग में कूदने से भस्म ही हो जाना है।

सवर्णों की इस कमजोरी का फायदा फिलहाल एनडीए को मिलता जरूर दिख रहा है लेकिन चुनावी नतीजे आगने के बाद सवर्ण अपनी आवाज फिर से बुलंद करेंगे। और ये आवाज अब दबने वाली नहीं है। आर-पार की लड़ाई होगी। इसमें सभी दलों के सवर्ण लीडर को शामिल किया जा सकता है। लेकिन एनडीए सवर्णों के हित में कोई कदम उठाती है तो स्वागत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आरक्षण की समीक्षा किए जाने की मांग भी सवर्ण समुदाय करती रही है। गरीब सवर्ण के लिए बड़े पैमाने पर योजना बनाने औऱ रोजगार देने की मांग करती रही है। लेकिन हर बात में पॉलिटिक्स होती है और फिर वही ठगी जाने वाली स्थिति बनती है। ऐसे में अब बहुत ठोस रणनीति के साथ आवाज बुलंद करने की तैयारी की जा रही है।

कभी बसपा की मायावती के करीबी रहे और कभी जदयू के नीतीश कुमार के करीबी रहे श्री त्रिवेदी मोदी सरकार की भी तारीफ करते हैं और नीतीश-मोदी के साथ आने को बिहार के विकास के लिए फायदेमंद मानते हैं। कहते हैं पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में बहुत ही लोकप्रिय औऱ गरीब हित में , देश हित में काम किया है। इसपर किसी को कोई शक नहीं है। इसलिए इस सरकार से ही ज्यादा उम्मीद है कि कुछ करेगी।

कहते हैं विपक्ष में अभी पीएम मोदी से लड़ने की या उनसे मुकाबला करनने की पर्याप्त क्षमता नहीं है। महागबंधन बना लेने के बाद भी दम-खम नहीं दिखती। और कोई कर्मठ उम्मीदवार पीएम के लायक है भी नहीं। ऐसे में देश के लिए पीएम मोदी ही ठीक है।

लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि सवर्ण समाज चुपचाप अपनी उपेक्षा सहता रहे। और गरीबी की मार झेलता रहे। इसलिए तैयारी जबर्दस्त होगी औऱ आंदोलन भी लगातार होंगे।

संवैधानिक तरीके से देश व्यापी विरोध होगा। ये भी तय है चाहे सरकार जिसकी बने।

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मौर्य न्यज18 के लिए नयन की खास रिपोर्ट।