“हम” की पार्टी में “तुम” ! तौबा ये मतबाली चाल…! love story-2

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महोदय का नया प्यार हो रहा तैयार !

मांझी के सहारे कहीं लालू से प्यार ना हो जाए।

भाजपा कह रही- ढूंढों-ढूंढों रे साजना… !


नयन की नज़र से- पॉलिटिकल लव स्टोरी- पार्ट-2

तुम रूठी रहो, मैं मनाता रहूं, मगर तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी…। जदयू औऱ भाजपा के बीच की लव स्टोरी में सीन कुछ ऐसा ही है। मौसम का मिजाज जैसे-जैसे बदल रहा है। हर रोज कुछ नया हो रहा है। महोदय को मौका मिला नहीं कि फिर गले लग लिए । ये जानते हुए भी कि प्यार का कमिटमैंट किसी और से जग जाहिर है। फिर कोई सामने भोली सी सूरत देखकर आई लव यू कहना, गले लगना। ये कौन सा लक्षण है। सवाल तो उठेगा ही ।

इस सीन से साफ है खटपट जबर्दस्त है। कह सकते हैं अब तेरे बिन जी लेंगे हम …की तैयारी है। वैसे महोदय, कहने को भले कह रहे हों- ऑल इज वेल लेकिन महोदय के लक्षणों पर गौर करें तो तस्वीर साफ नज़र आएगी कि आगे ये क्या करेंगे। वैसे भी कहावत है नेचर और सिंगनेचर बदलते नहीं। यहां महोदय का भी वही हाल है। इसलिए थोड़ा इसपर भी विस्तार से नज़र डालते हैं।  

अब जरा गौर करिए…

महोदय का लक्षण नम्बर वन…और सीन नम्बर वन..

याद करिए 2014 लोकसभा चुनाव। चुनाव से पहले, महोदय ने भोज बुलाकर पत्तल छीन ली थी। ऐसी खूब चर्चा हुई। मोदी से हाथ मिलाओ तस्वीर पर तमता गए थे महोदय। पत्तल छीने की वजह भी तस्वीर ही बनी थी। फिर क्या हुआ। भाजपा से प्यार में तलखी इतनी बढ़ी कि फाइनली ब्रेक्रअप ही हो गया। और गुस्से में 2014 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ लिये। और उधर मोदी की सरकार बनी और महोदय की बिहार में मिट्टी पलिद हो गई। फिर महोदय, कमिटमैंट बाबू बने फिरने के कारण आन-बान शान में गद्दी छोड़ दी और जीतनराम मांझी के घर जाकर गले लगे और गद्दी थमा दी। इसतरह मुख्यमंत्री बन गये मांझी। फिर महोदय ने दलित संग प्रेम का डंका भी पीटा। चर्चा भी खूब हुई इसे कहते है दलित प्रेम। फिर ये प्रेम कितना परवान चढ़ा दुनिया देख चुकी है और जीतनराम मांझी भी। उस समय महोदय की ये खिसियानी चाल आगे चलकर महंगी पड़ गई।

नतीजतन, महोदय ने मांझी संग ही तिकरम शुरू कर दी। औऱ उन्हें गद्दी से घसीट कर बाहर कर दिया । फिर खुद गद्दी पर बैठे औऱ ढूढ़ लिया दूसरा प्यार। अबकी शिकार बनाया लालू यादव को। महोदय जो पानी पी-पी कर कोसते थे लालू को। ना-ना करते-करते प्यार उन्हीं से कर बैठे। कहते भी हैं..प्यार की शुरूआत नफ़रत से ही होती है। औऱ कभी ऐसा भी होता है जब आप किसी से बहुत ज्यादा नफ़रत करने लगो तो उससे प्यार भी होने का चांस रहता है। यहां भी महोदय के साथ वैसा ही हुआ। लालू से नफ़रत करते-करते प्यार कर बैठे। फिर क्या था, लालू भी गले लगा बैठे। रातो-रात खबर फैल गई। हाय- तौबा ये क्या हो गया। किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था कि महोदय ये सब करेंगे। लेकिन सच सामने था। प्यार अब ना मांझी था, ना मोदी …प्यार तो अंधा होकर लालूमय हो चला था। औऱ भाजपा दुश्मन नम्बर वन। औऱ मांझी तो फूटी-कौड़ी नहीं सुहाने वाले हेटमैन। इस तरह महोदय, 2015 विधानसभा चुनाव में बाजी मारकर सत्ता पर फिर से काबिज हो गए।

लालू प्रसाद, जीतनराम मांझी और नीतीश कुमार एकसाथ तस्वीर में राजद, हम औऱ जदयू ।

अब जरा महोदय का लक्षण नम्बर-टू देखिए…औऱ सीन नम्बर-2 भी।

एकदम मिलता-जुलता है 2014 से। कैसे ये जानिए….!

जरा, सीन और सीचुएशन समझिए –

2019 में फिर लोकसभा चुनाव होने थे। महोदय को पता था कि लोकसभा में मोदी प्यार ही चलेगा। देश के सवाल पर लालू प्यार किसी काम ना आएगा। जनता देश के नाम पर मोदी-मोदी करेगी। कही 2014 की तरह दो सीट पर ना सिमट जाएं या जीरो सीट पर ना आ जाएं। फिर पासा पलटा। रातो-रात लालूमय प्यार को लात मारकर अपने मोदी प्यार में फिर पागल हो गए। पहले प्यार की पहली कसम याद दिलाकर सत्ता कायम रखी औऱ प्यार को मोदीमय कर दिया। महोदय ने जनता से कहा ये सब आपके लिए ही कर रहा हूं। और पहला प्यार ही सच्चा है। बीच में जो प्यार कर बैठा वो गलती से हो गई। नादानी समझकर माफ कर दीजिएगा। महोदय की ये चाल सूबे की सत्ता में भी बनाए रखी    और 16 लोकसभा सीट झटकने में भी सफल हो गए।

नीतीश कुमार, जीतनराम मांझी, सुशील कुमार मोदी। जदयू, हम और भाजपा। तस्वीर में।

अब वक्त आगे फिर विधानसभा का है। 2020 में । यहां फिर मोदी चलेंगे ये जरूरी नहीं। इससे मुहब्बत में फिर नफरत घोलने की जरूरत थी। मौका मिला। और फिर शुरू हो गए। महोदय के नखरे। यानी चाल फिर वही अब फिर प्यार चाहिए जो सत्ता कायम रख दे। महोदय एकबार फिर इस प्यार भरे नाटक में उस्तादी दिखानी शुरू कर दी है। एकबार फिर मांझी को गले लगा लिया है। इसबार भी मांझी ही हैं। 2014 की तरह। जबकि मांझी के बारे में दुनिया को पता है कि मांझी, महोदय की शराबबंदी के घोर विरोधी हैं। कई बार खुलेमंच से औऱ यहां तक की घोषणापत्र में भी कह चुके हैं कि मेरी सरकार आयी तो मैं शराबबंदी को खत्म कर दूंगा। फिर महोदय, ऐसे लोगों के गले क्यों मिलने चले गये। क्या वजह है। जाहिर है, बिहार में शराबबंदी, बालूबंदी से बिहार की बड़ी आबादी महोदय से नफ़रत करती है। उन्हें देखना पसंद नहीं करती है। ऐसा महोदय खुद कई बार कह चुके हैं कि मेरी शराबबंद वाली घोषणा से बहुत लोग खफा है पर मुझे इसकी परवाह नहीं। मैंने जो कमिटमेंट कर लिया सो कर लिया। अब मैं खुद की भी नहीं सुनने वाला। ऐसे में मांझी ही एक ऐसे शख्स हैं जो डंके की चोट पर शराबबंदी औऱ बालूबंदी के घोर विरोधी रहे हैं। औऱ शराब को फिर से चालू करवाने की घोषणा तक कर दी है। ऐसे शख्स से अब महोदय गले मिल रहे हैं। हाय री कलयुग। तू सच में आ गई। खुद तो आयी, भ्रष्ट्रयुग को भी लेती आयी।  

 खैर, अब महोदय के इस नये लव स्टोरी में। इस सीन नयापन, इस प्रकार का है। मांझी से फिर आंखों-आंखों में प्यार हो गया है। हो सकता है मांझी की शराबबंदी तुड़वाने वाली बात भी इस प्यार में महोदय कुर्बान कर दें। और मांझी के सहारे लालू का प्यार भी पा लें।

आगे की सीन भी पिछली ही बार की तरह होने को है। विधानसभा चुनाव 2020 का मंडप सजने वाला है। दुल्हा तो महोदय ही होंगे उन्हें पता है। पर दुल्हन बदलेगी। मंडप सजने में नौ-दस महीने हैं। तबतक नई प्रेमिका दुल्हन बनने को तैयार भी हो जाएगी।

महोदय की चाल,  भाजपा से नखरे औऱ मांझी के नाव के सहारे फिर लालू-राबड़ी से प्यार यही सब तो कह रहा । महोदय का अगला प्यार यूं हो रहा तैयार। कहो ना प्यार है।

आप देख रहे नयन की नज़र से राजनीतिक लव स्टोरी पार्ट-2।