एफिल टॉवर : दुनिया की शान !

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फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक लोहे का टावर

आज इसे बनाया जाए तो 31 मिलियन डॉलर खर्च लगेंगे

मौर्य न्यूज18 वहां पहुंचकर लाई है खास रिपोर्ट

एफिल टॉवर पेरिर से मनोरंजन सहाय की रिपोर्ट

दुनिया में एक से बढ़कर एक खूबसूरत चीजें इंसान ने गढ़ी है। उसे आकार दिया है। और दुनियाभऱ के लोगों को लुभाता रहा है। उसी में से एक उंची टॉवर ये भी है। जो अपने हाई के लिए औऱ खूबसूरत निर्माण के लिए जानी जाती है। दुनियाभर के पर्यटक इसे देखने के बाद गौरवान्वित महसूस करती है। इसका निर्माण भले दशकों पहले हुआ लेकिन आकर्षण अब भी कायम है।

मौर्य न्यूज18 आपके नॉलेज को बढ़ाने के लिए साथ ही आप इस आकर्षण को शब्दों के जरिए समझें, जाने हमारी टीम ने पेरिस की यात्रा की और वहां से खास आपके लिए जो मेटेरियल जुटाया है इसे आपको जरूर पढ़ना चाहिए। औऱ जानना चाहिए आखिर ये बला है क्या। तो इसी ऩॉलेज की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए हमारे मौर्य न्यूज18 के सफरनामे की खास रिपोर्ट मनोरंजन सहाय की कलम से पेश है। उम्मीद है आपको रोचक लेगेगी और भरपूर जानकारी भी मिलेगी।

पेरिस में एफिल टॉवर से हमारे मौर्य न्यूूज18 के सफरनामा संवाददाता मनोरंजन सहाय टीम के साथ

एफिल टॉवर के बारे में जानिए

एफ़िल टॉवर फ्रांस की राजधानी पैरिस में स्थित एक लोहे का टावर है। इसका निर्माण 1987-89 में दे-मार्स में सीन नदी के तट पर पैरिस में हुआ था। यह टावर विश्व में उल्लेखनीय निर्माणों में से   एक है और फ्रांस की संस्कृति का प्रतीक है। एफ़िल टॉवर की रचना गुस्ताव एफ़िल के द्वारा   1889 में   की  गई थी और उनही  के नाम पर पर एफ़िल   टावर  का  नामकरण हुआ। जब एफ़िल टॉवर का निर्माण हुआ तब उस वक़्त वह दुनिया की सबसे ऊँची इमारत थी। आज की तारीख में टॉवर की ऊँचाई  324  मीटर है , जो की पारंपरिक  81 मंजिला ईमारत की ऊँचाई के बराबर है। बग़ैर एंटेना शिखर के यह इमारत फ़्रांस के मियो  शहर के फूल के बाद दूसरी सबसे ऊँची इमारत है। यह तीन मंज़िला टॉवर पर्यटकों के लिए वर्ष के   365 दिन खुला रहता है। यह टॉवर पर्यटकों द्वारा टिकट खरीदके देखी गई दुनिया की इमारतों में अव्वल स्थान पे है।

वैश्विक मेले के प्रवेश द्वार बनाना चाहती थी सरकार

1889 में, फ़्रांसीसी क्रांति के शताब्दी महोत्सव के अवसर पर, वैश्विक मेले का आयोजन किया गया था। इस मेले के प्रवेश द्वार के रूप में सरकार एक टावर बनाना चाहती थी। इस टावर के लिए सरकार के तीन मुख्य शर्तें थीं , टावर की ऊँचाई 300 मीटर होनी चाहिए, टावर लोहे का होना चाहिए, टावर के चारों मुख्य स्थंभ के बीच की दूरी 125 मीटर होनी चाहिए।

सरकार द्वारा घोषित की गईं तीनों शर्तें पूरी की गई । ऐसी 107 योजनाओं में से गुस्ताव एफ़िल की परियोजना मंज़ूर की गई। मौरिस कोच्लिन और एमिल नुगिएर  इस परियोजना के संरचनात्मक इंजिनियर थे और स्ठेफेंन सौवेस्टर वास्तुकार थे। 300 मजदूरों ने मिलके एफ़िल टावर को 2 वर्ष, 2 महीने और 5 दिनों में बनाया जिसका उद्घाटन 31 मार्च 1889 में हुआ और 6 मई से यह टावर पर्यटकों के लिए खुला गया।

औद्योगिक क्रांति का प्रतीक

हालाँकि एफ़िल टावर उस समय की औद्योगिक क्रांति का प्रतीक था और वैश्विक मेले के दौरान आम जनता द्वारा इसे काफी सराहा गया, फिर भी कुछ नामी हस्तियों ने इस इमारत की आलोचना की और इसे “नाक में दम” कहके बुलाया। शुरुआती दौर में एफ़िल टावर को 20 वर्ष की अवधि के लिए बनाया गया था जिसे 1909 में नष्ट करना था। लेकिन इन 20 वर्ष के दौरान टावर ने अपनी उपयोगिता वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में साबित करने के कारण आज भी एफ़िल टावर पैरिस की शान बनके खड़ा है।

इसकी लंबाई, चौराई और चौहद्दी भी जान लीजिए

एफ़िल टावर एक वर्गाकार क्षेत्र में बना हुआ है जिसके हर किनारे की लंबाई 125 मीटर है। 116 ऐंटेना समेत टावर की ऊँचाई 324 मीटर है और समुद्र तट से 335 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।उत्तर, दक्षिण और पूरब स्तम्भ में टिकट घर और प्रवेश द्वार है जहाँ से लोग टिकट ख़रीदार टावर में प्रवेश कर सकते हैं। उत्तर और पूरब स्तंभों में लिफ्ट की सुविधा है और दक्षिण स्तम्भ में सीढ़ियां हैं जो की पहेली और दूसरी मंज़िल तक पहुँचाती हैं। दक्षिण स्तम्भ में अन्य दो निजी लिफ्ट भी हैं जिनमें से एक सर्विस लिफ्ट है और दूसरी लिफ्ट दूसरी मंज़िल पर स्थित ला जुल्स वेर्नेस  नामक रेस्टोरेंट के लिए है।

पहली मंज़िल

57 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एफ़िल टावर की प्रथम मंज़िल का क्षेत्रफल 4200 वर्ग मीटर है जोकि एक साथ 3000 लोगों को समाने की क्षमता रखता है। मंज़िल की चारों ओर बाहरी तरफ एक जालीदार छज्जा है जिसमें पर्यटकों की सुविधा के लिए पैनोरमिक टेबल ओर दूरबीन रखे हुए हैं जिनसे पर्यटक पैरिस शहर के दूसरी ऐतिहासिक इमारतों का नज़ारा देख सकते हैं। गुस्ताव एफ़िल की ओर से श्रद्धांजलि के रूप में पहली मंज़िल की बाहरी तरफ 18 वीं और 19 वीं सदी के महान वैज्ञानिकों का नाम बड़े स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है जो नीचे से दिखाई देता है।  कांच की दीवार वाला 58 Tour Eiffel नामक रेस्टोरेंट भी है तथा साथ में एक कैफ़ेटेरिया भी है जिसमें ठंडे-गरम खाने पीने की चीजें मिलती हैं।

दूसरी मंज़िल

115 मी. की ऊंचाई पर स्थित एफ़िल टावर की दूसरी मंज़िल का क्षेत्रफल 1650 वर्ग मीटर है जो कि एक साथ 1600 लोगों को समाने की क्षमता रखता है। दूसरी मंज़िल से पैरिस का सबसे बेहतर नज़ारा देखने को मिलता है, जब मौसम साफ़ हो तब 70 की. मी. तक देख सकते है। इसी मंज़िल पर एक कैफ़ेटेरिया और सुवनिर खरीदने की दुकान स्थित है।

दूसरी मंज़िल के ऊपर एक उप-मंज़िल भी है जहाँ से तीसरी मंज़िल के लिए लिफ्ट ले सकते है। यहाँ, ला जुल्स वेर्नेस नामक रेस्टोरेंट स्थित है । यहाँ सिर्फ़ एक निजी लिफ्ट के द्वारा ही पहुंचा जा सकता है।

तीसरी मंज़िल

275 मी. की ऊँचाई पर एफ़िल टावर की तीसरी मंज़िल का क्षेत्रफल 350 वर्ग मीटर है जो कि एक साथ 400 लोगों को समाने की क्षमता रखता है। दूसरी से तीसरी मंज़िल तक सिर्फ़ लिफ्ट के द्वारा ही जा सकते है। इस मंज़िल को चारों ओर कांच से बंद किया है। यहाँ गुस्ताव एफ़िल की ऑफ़िस भी स्थित है जिन्हे कांच की कैबिन के रूप में बनाया गया है ताकि प्रवासी इसे बाहर से देख सके। इस ऑफ़िस में गुस्ताव एफ़िल की मोम की मूर्ति रखी है। तीसरी मंज़िल के ऊपर एक उप-मंज़िल है जहाँ पर सीढ़ियों से जा सकते है। इस उप-मंज़िल की चारों ओर जाली लगी हुई है और यहाँ पैरिस की खूबसूरती का नज़ारा लेने के लिए कई दूरबीन रखे हैं।

इस के ऊपर एक दूसरी उप मंज़िल है जहाँ जाना निषेध है। यहाँ रेडियो और टेलिविज़न की प्रसारण के ऐन्टेने है।

रात की रोशनी

एफिल टॉवर रात्रि में जब रौशनी से नहाती है तो कुछ यूं दिखती है। मौर्य न्यूज18 की तस्वीर ।

हर रात को अंधेरा होने के बाद लगभग 10 बजे से  1 बजे तक (और गर्मियों में 2 बजे तक) एफ़िल टावर को रोशन किया जाता है ताकि दूर से भी टावर दिख सके।31 दिसम्बर 1999 की रात को नई सदी के आगमन के अवसर पर एफ़िल टावर को अन्य 20000 बल्बों से रोशन किया गया था जिससे हर घंटे क़रीब 5 मिनट तक टावर झिलमिलाता है। चूंकि लोगों ने इस झिलमिलाहट को काफ़ी सराया इसलिए आज की तारीक़ में भी यह झिलमिलाहट अंधेरे होने के बाद हर घंटे हम देख सकते हैं।

पेरिस से मौर्य न्यूज18 के लिए मनोरंजन सहाय की रिपोर्ट