एक था गब्बर !

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पुण्यतिथि – सिने जगत के गब्बर – नाम अमजद खान।

गेस्ट कॉलम – डॉ ध्रुव कुमार

मौर्य न्यूज18

शोले फिल्म के लिए हमेशा याद किये जाते रहेंगे

कोई अभिनेता किसी एक फिल्म से भी अमरत्व हासिल कर सकता है, हिंदी सिनेमा में इसका सबसे बड़ा उदाहरण मरहूम अभिनेता अमजद खान हैं। वैसे तो अमजद ने कोई दो दर्जन फिल्मों में खलनायक,सहनायक,चरित्र अभिनेता की विविध भूमिकाएं की, लेकिन याद उन्हें उनकी पहली फिल्म ‘शोले’ में गब्बर सिंह की भूमिका के लिए ही किया जाता है।

हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने किसी डाकू का इतना खूंखार, भयावह और नृशंस चरित्र न उसके पहले देखा था और न उसके बाद कभी देख पाए।एक ऐसा चरित्र जिसकी एक-एक हरकत अपने समय का मिथक बनी। एक ऐसी संवाद-शैली जो देखने-सुनने वालों की सांसें रोक दे। एक ऐसी मुस्कान जो रोंगटें खड़ी कर दे। एक ऐसी सधी चाल जिसके साथ धडकनें चल पड़े । गब्बर की यह भूमिका शायद अपने दौर के स्टार खलनायक डैनी के लिए लिखी गई थी, लेकिन डैनी के इनकार के बाद संयोग से यह नए अभिनेता अमज़द के हाथ लग गई।

गब्बर की भूमिका भले ही अमज़द के लिए नहीं लिखी गई हो, लेकिन अमज़द शायद गब्बर बनने के लिए ही पैदा हुए थे। ‘शोले’ की अपार सफलता और क्लासिक फिल्म के उसके दर्ज़े की सबसे बड़ी वजह अमज़द थे। यह भूमिका अमज़द की अभिनय-यात्रा का ऐसा शिखर था जिसे वे खुद दुबारा नहीं छू पाए। वे प्राण के बाद दूसरे ऐसे खलनायक हैं जिनसे लोग डरते भी बहुत हैं और प्यार भी बहुत करते हैं। गब्बर की अपनी भूमिका में अमजद खलनायिकी का एक ऐसा कीर्तिमान बनाकर गए हैं कि पचास-पचास साल बाद भी जब कोई खलनायक सिनेमा के परदे पर बड़ी-बड़ी डींगें हांकेगा तो लोग कहेंगे कि चुप हो जा बेटे, वरना गब्बर आ जाएगा !

पुण्यतिथि (27 जुलाई) पर खेराज-ए-अक़ीदत !

गेस्ट आभार

डॉ. ध्रुव कुमार

आप बिहार से है। आइपीएस हैं। देश में पुलिस अधिकारी के तौर पर अपनी सेवा दी है। साहित्य में गहरी रूचि रखते हैं। देश के नामचीन समाचार पत्र-पत्रिकाओं में आपकी लेखनी छपती रही है। आप साहित्यगत में चर्चित लेखकों में से हैं।

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एक था गब्बर !कोई अभिनेता किसी एक फिल्म से भी अमरत्व हासिल कर सकता है, हिंदी सिनेमा में इसका सबसे बड़ा उदाहरण मरहूम…

Posted by Dhruv Gupt on Friday, July 26, 2019

पटना, मौर्य न्यूज18