आवाज़ दो हम एक हैं ! Maurya New18

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स्वतंत्रता दिवस पर अपना देश

डॉ ध्रुव गुप्त की कलम से

भौगोलिक सीमाओं से घिरे ज़मीन के टुकड़ों से सिर्फ देश निर्मित होते हैं। देश कोई भी हो, स्थायी नहीं होता। समय के साथ उसकी सीमाएं,उसका स्वरुप बनता और बिगड़ता रहता है। अपने ही देश का इतिहास देखिए तो इसका आकार और इसकी सीमाएं लगातार परिवर्तित होती रही हैं। असंख्य रियासतों में बंटे इस देश का वर्तमान स्वरुप अंग्रेजों की साम्राज्यवादी नीतियों और आज़ादी के बाद असंख्य देशी रियासतों के भारत में विलय की अथक कोशिशों का नतीजा है।

समय की कसौटी पर…!

राष्ट्र देश से अलग ही चीज है। राष्ट्र बनता है देश की भौगोलिक सीमाओं में मौजूद विभिन्न धर्मों, जातियों, सभ्यताओं, संस्कृतियों और आस्थाओं के लोगों के बीच प्रेम, भाईचारे, समझदारी, परस्पर सम्मान, भरोसे और हजारों विविधताओं के बीच से उठती एकता की संगीतमय अंतर्ध्वनि से। देश देह है और राष्ट्र उसकी आत्मा ! समय की कसौटी पर देश नहीं, राष्ट्र ही स्थायी होते हैं।

हम राष्ट्र कब बनेंगे… !

दुनिया के नक़्शे पर आज हम देश तो हैं, राष्ट्र आज तक नहीं बन पाए। राष्ट्र न बनने की कीमत यह देश अभी पिछली सदी में ही तीन टुकड़ों में बंटकर अदा कर चुका है। कश्मीर में हम आज इसी की कीमत चुका रहे हैं। देश के दूसरे हिस्सों में भी देश के सवर्ण हिन्दू, मुस्लिम और दलित राष्ट्रों में विभाजन की प्रक्रिया तेज हुई है। आज़ादी के सात दशक बाद भी अगर हम एक राष्ट्र नहीं बन सके तो धर्मों और जातियों में बंटे इस देश को आने वाले दिनों में एक और भारी क़ीमत अदा करनी पड़ सकती है ! हमारे राष्ट्र की एकात्मकता बचेगी, तभी देश बचेगा। 

सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई !

आपने लिखा है…

डॉ ध्रुव गुप्त

आप बिहार से हैं। आप आईपीएस हैं। आप बतौर पुलिस अधिकारी देश की सेवा की है। अब आप देश के लिए लिखते हैं। राष्ट्र के नागरिकों तक अपनी लेखनी से बातों को सरलता पूर्वक पहुंचाने की जिम्मेदारी आपने ली है। आपकी रचना को देश की जानी-मानी पत्र-पत्रिका प्रकाशित करती है। आपका साहित्य जगत में अलग पहचान है। आपकी लेखनी तथ्यपूर्ण और दिशा देने वाली होती है।

मौर्य न्यूज18 की गेस्ट रिपोर्ट

आवाज़ दो हम एक हैं !भौगोलिक सीमाओं से घिरे ज़मीन के टुकड़ों से सिर्फ देश निर्मित होते हैं। देश कोई भी हो, स्थायी नहीं…

Posted by Dhruv Gupt on Tuesday, August 13, 2019