एक शोध : जाती सी दिखी जाति !

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मॉरीशस में जाति समाजशास्त्रीय अकेडमिक्स के लिए पूरी दुनिया में गहरी रुचि की चीज मानी जाती रही है

चंद्रभूषण । मौर्य न्यूज18 ।

आय़े दिन कुछ ना कुछ शोध होते रहते हैं। सामाजिक स्तर पर भी एक अनूठा शोध सामने आता रहता है। एक शोध में पाया गया कि दुनिया में हर धर्म के लोगों में जाति सूचक शब्द विलुप्त हो रहे हैं। इसमें काफी कमी आयी है। शोध करने वाले समाजशास्त्री ने मॉरिशस में रहकर इस संदर्भ में जो भी समझा, जो भी पाया उसे इस रिपोर्ट के जरिए समझने की कोशिश करते हैं।

  आपको बता दें कि मॉरीशस में जाति समाजशास्त्रीय अकेडमिक्स के लिए पूरी दुनिया में गहरी रुचि की चीज मानी जाती रही है। लेकिन अकेडमिक्स से नजदीकी रिश्ता न रखने वाले मेरे कुछेक मित्रों ने भी वहां जाने से पहले मुझसे इसपर जानकारी हासिल करने को कहा था। किसी देश में चार दिन रहना आपको उसके बारे में कोई पक्की बात कहने का अधिकारी नहीं बनाता, फिर भी अपने कुछ तजुर्बे यहां गिना सकता हूं।

मॉरिशस में जातिनाम जुड़ा कोई नाम नहीं मिला

मॉरीशस में किसी भी नाम के साथ मैंने जातिनाम जुड़ा नहीं पाया। न ही कोई इस बारे में अलग से जानकारी देने को उत्सुक दिखा, जैसा भारत में कई जातिनाम-रहित नामी-गिरामी लोग भी करते दिखते हैं। लेकिन इस देश में पहले ही दिन मुझसे खुलकर बतियाने वाले अपने ही होटल के एक मल्टी-कुजीन हिंदुस्तानी रेस्त्रां के असिस्टेंट मैनेजर अमरीश प्रयाग ने यूं ही चलते-चलते अपनी बिहारी राजपूत पृष्ठभूमि का जिक्र जरूर किया था। दुसाध बिरादरी के (और सिर्फ उसी के) लोग मॉरीशस में राजपूत कहलाते हैं, यह ज्ञान मुझे थोड़ा बाद में मिल पाया। मामले का दूसरा पहलू यह निकला कि अमरीश प्रयाग ने पड़ोसी द्वीप सेशेल्स की अफ्रीकी-ईसाई लड़की जैनेट से शादी की है और उनका दो बच्चों वाला एक सुंदर, सुखी, शांत परिवार भी है।   

मॉरिशस को विलुप्त के बजाय स्थगित जातियों वाला देश कहा जाता है !

अकेडमिक दायरे में मॉरीशस को विलुप्त के बजाय प्रच्छन्न या स्थगित जातियों वाला देश कहा जाता रहा है। विडम्बना यह कि संसदीय लोकतंत्र ने वहां कमजोर पड़ती जाति चेतना को अचानक मजबूत बना दिया है। जातियों का अनुपात कमोबेश यूपी-बिहार जैसा ही है, लेकिन मॉरीशस का सत्ताशीर्ष संभालने वाले दोनों परिवार क्रमश: यादव और कुशवाहा पृष्ठभूमि से आते हैं, जिन्हें (साथ में कुर्मी को भी) यहां वैश्य कहा जाता है। हिंदुओं में इन वैश्यों का हिस्सा ही मॉरीशस में सबसे ताकतवर है। मंत्रिमंडल में दक्षिण भारतीयों, महाराष्ट्रियनों और बाकी जातियों का अघोषित कोटा बंधा है।   

एक सवाल हिन्दुस्तानियों को लेकर

भोजपुरिया बैठकों में ब्राह्मणों को महराज, क्षत्रियों को बाबूजी और आदिवासियों को जंगली कहने का चलन अभी तक जारी बताया गया, हालांकि इनमें से एक भी शब्द आम दायरे में बोले जाते मैंने अपने कानों से नहीं सुना। रैदास, दुसाध, नोनिया और आदिवासी बिरादरी की स्थिति कमोबेश भारत की शिड्यूल्ड कास्ट जैसी है। आर्य समाज को तोड़कर आर्य रविवेद प्रचारिणी सभा इन जातियों ने 1935 में बनाई थी। एक बड़ा सवाल हिंदुस्तानियों के यूरोपियन, अफ्रीकी और चीनी जातीयताओं से रिश्ते का है, लेकिन इससे पहले खुद हिंदुस्तानियों के अंतरधार्मिक रिश्ते पर बात करनी होगी। मॉरीशस की आबादी में हिंदुस्तानियों का हिस्सा लगभग दो तिहाई है, जिनमें 48 फीसदी हिंदू और 17 फीसदी मुसलमान हैं।

अफ्रीकी लड़कियों से शादी का चलन बढ़ा है

शादियां इन्हीं के बीच सबसे कम (नहीं के बराबर) होती हैं। इसके उलट हिंदू-मुसलमान दोनों की अफ्रीकी ईसाइयों में शादी आम हो चली है। हमारे ड्राइवर रफीक ने बताया कि उसके एक बहनोई अफ्रीकी-ईसाई हैं।  एक गोरे फ्रांसीसी और सांवली अफ्रीकी लड़की की ईसाई रीति से हुई नाच-गाने वाली शानदार शादी मैंने अपने होटल में ही देखी। यानी एक बात साफ है कि मॉरीशस में गोरों के दास के रूप में खेती-बाड़ी शुरू करने वाला अफ्रीकी-ईसाई समुदाय (कुल आबादी का एक चौथाई) विवाह के मामले में यहां का सबसे उदार हिस्सा है। बीच-बीच में उभरने वाले तनावों के बावजूद ऐसी ही वैवाहिक उदारता अब हिंदुस्तानियों में भी पैर पसारने लगी है। जाहिर है, जाति के सर्वाइवल के लिए यही चीज सबसे ज्यादा खतरनाक है।

मौर्य न्यूज18 की खास रिपोर्ट