बिहारी सुशासन : मेरे हाल पर हुई है तेरी खास मेहरबानी…! MauryaNews18

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नयन की नज़र से- बिहारी सुशासन

नयन कुमार, मौर्य न्यूज18 ।

स्थान – पटना। मुद्दा- जलजमाव ।

कहते हैं, चलो अच्छा हुआ तुम भूल गए…तेरा भूल ही था प्यार मेरा..। मुझे पता है पिछले 15 साल की याद दिलाउंगा तो तुम ऐसा ही करोगे। हफ्ते-दो-हफ्ते में सब भूल जाओंगे। और यही इंसान होने का सच्चा प्रमाण भी है। क्योंकि आप सब को पता है।

मैं मुख्यमंत्री हूं। बिहार से हूं। इंजीनियर रहा हूं। मुझे साइंस भी आती है औऱ पॉलिटिक्स भी। जो मैं कभी करता नहीं। हां ! जब आप पॉलिटक्स करते हो तो मैं सिर्फ साइंस लगाता हूं। फिर जो होता है वो पूरी दुनिया को पता है।

इसलिए मेरी आवाज सुनो। मैं कोई किस्मत वाला सीएम नहीं हूं। मैं साइंस पर आधारित एक सिस्टम हूं। और, फार्मूले पर काम करता हूं। न्यूटन की गति के सिद्धांत को फॉलो करता हूं । यानि क्रिया के विपरित प्रतिक्रिया।

सेव को उपर उछालने से वो नीचे क्यों गिरता है। इसके पीछे का साइंस क्या है दुनिया जानती है। आप नहीं जानते हो तो पढ़ो। एबीसीडी पहले सीखो फिर बात करो। अब बसंती माइक वाली कितनी भी बोलती रहेगी उससे तो काम नहीं चलेगा। और ना ही सेव नीचे गिरने का सिद्धांत ही बदलेगा। इसलिए चिल्लाने का कोई फायदा नहीं।



बात साफ है बारिश हुई। हथिया नक्षत्र ने कमाल दिखाया । बारिश की बूंद उपर से गिरेगी तो नीचे ही आएगी। और यदि वो किसी खास इलाके में ज्यादा मात्रा में गिरने लगे तो इससे न्यूटन का सिद्धांत कभी नहीं बदल जाएगा। यदि यही बारिश की बूंद की जगह हीरे-जवाहारात गिरे होते। तो फिर क्या कहते। सोंचों। जरा सोंचों। सपने देखने चाहिए। कलाम जी ने कहा था सपने हमेशा हाई लेवल का देखो। औऱ आप हो कि बारिश की बूंद की ढेर से खफा हो गए।

रही बात इन बूंदों के टिके रह जाने का तो इसके पीछे भी साइंस है। जिधर ढलान होगी उधर बूंदें टपकेगी। जहां गहारई होगी वहां टिकेगी। ऐसे में पृथ्वी के किसी भूभाग से छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता है। घर तो हमने नहीं बनाया। इलाके तो हमने नहीं चुनकर दिए। आपने खुद चुना। किस इलाके में आपको रहना है। क्या वहां पृथ्वी की सतह समतल है या नहीं । या वहां गहराई ज्यादा है। इसपर आपने कभी नहीं सोंचा । यानि आपने बिना सोंचे समझे अपनी जिद में आकर घर बसा लिए। फिर यदि ये बारिश की बूंदे गिरेंगी तो क्या आपसे पूछकर । क्या ये पृथ्वी हमने बनाई। फिर ये चाहे समतल हो या गहरा। वो तो बारिश की बूंदे ग्रहण करेगी ही।

बिहार की राजधानी पटना – जलजमाव से राजेन्द्र नगर का इलाका। मौर्य न्यूज18 ।

याद करो कुछ दिनों पहले ही मौसम की तपिश के कारण कितने बच्चों की जान चली गई। चारो बगल त्राहिमाम मचा था। सबकी निगाहें आसमान की ओर थी ….कि दे दे अल्हा मेघ दे। मेघ दे। पानी दे। औऱ फिर जब अल्हा ने मेघ दिए तो सब ठीक हो गया। उस समय भी बसंती माइक वाली मेरे पर चिल्लाती रही। लेकिन किसी ने साइंस को फॉलो नहीं किया। सब पॉलिटिक्स करते रहे। मैं बस चुप रहा। देखता रहा। क्योंकि मैं जानता था कि एक दिन साइंस ही जीतेगा। और फिर भले ही कुछ बच्चों को मौसम ने निगल लिए लेकिन मेघ ने कितने लाखों बच्चों को बचा भी लिये। इसलिए मैं कभी बोलता नहीं। सिद्धांत की ओऱ इशारा कर देता हूं। साइंस के आगे कुछ भी नहीं। लोग चांद पर जा रहें औऱ हम हैं जो बारिश की कुछ बूंदों के ठहर जाने से चिल्लाने लगते हैं। तो फिर उस चांद का क्या होगा जिसे हमारे वैज्ञानिकों ने खोजा है। वहां लोगों को बसाने की तैयारी चल रही है। और हम हैं कि बारिश की बूंदों से घबरा रहे हैं।

भरसक मुझे कोस लीजिए। मुझे अपमानित कर लीजिए। लेकिन मैं फिर कहता हूं। थोड़ा पढिए। चरवाहा स्कूल में नहीं । हमारे बनाए पाठशाला में। जहां हमारे बहाल किये हुए टीचर आपको दक्ष करेंगे। नहीं तो आप पॉलिटिक्स करते रहिए। मैं तो साइंस का पूजारी हूं। सिद्धांत पर जीने वाला इंसान हूं। मुख्यमंत्री बन गया हूं तो बने रहने का सिद्धांत भी मुझे पता है। मैं पॉलिटिक्स करता नहीं। आप पॉलिटिक्स करते रहो।

रही बात, जीने मरने की तो भगवान बुद्ध को एक बार पढ़ लो । उन्होंने साफ कहा है कि जैसा सोंचोंगे वैसा पाओगे। औऱ अन्य धर्मों के ग्रंथों में भी इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि इंसान इस धरती पर ही अपने जीवनकाल में ही अपने किए का सब भोगकर जाता है। अब आप सोंचो आपको बारिश की बूंदें क्यों परेशान कर रही है। मैं तो दिन रात निरंतर आपकी भलाई के लिए मुख्यमंत्री बना हूं। मेरा बने रहने में ही आपका सुख हैं। ऐसा जानकर आपको प्रकृति को शुक्रिया करना चाहिए और इस बारिश की बूंद का सामना मिलजुलकर करना चाहिए। बसंती माइक वाली के चिल्लाने औऱ वीरू मोटू के पानी की टंकी पर चढ़कर शोर मचाने से कोई फायदा नहीं।

मौर्य न्यूज18 के लिए नयन कुमार की स्पेशल रिपोर्ट ।