तेरी जुब़ान बंद क्यों है विरोधियों : सुशील मोदी ! Maurya News18

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पवित्र ननकाना साहिब गुरूद्वारे पर हमले के बाद सीएए विरोधियों की चुप्पी देख रही जनता –  मोदी

पटना, मौर्य न्यूज18 ।

पवित्र ननकाना साहिब पर हमले के बाद तेरी जुब़ान बंद क्यों है। कहां गया तेरा सीएए को लेकर विरोध कुछ बोलते क्यों नहीं। जनता सब देख रही है तेरी करतूत । बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी रविवार को विरोधियों पर जमकर बरसे।

श्री मोदी रविवार को नागरिकता संशोधन कानून 2019 (सीएए) को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए भाजपा द्वारा शुरू किए गए देशव्यापी जनसम्पर्क अभियान का पटना के दीघा विधान सभा क्षेत्र से आगाज करते हुए ये बातें कहीं।

 उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में हुई ननकाना साहिब (पाकिस्तान) की घटना के बाद यह साबित हो गया है कि नागरिकता संशोधन कानून सही समय पर लिया गया एक उचित निर्णय है। सीएए का विरोध करने वाले राजद, कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियां सिखों के पवित्र गुरूद्ववारे पर हमले के बाद चुप्पी क्यों साध लिए हैं? सीसीए का विरोध करने वालों को ननकाना साहिब से बड़ा और क्या प्रमाण चाहिए? 

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान स्थित सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल ननकाना साहिब गुरुद्ववारे का नाम तब्दील कर ‘गुलामे मुस्ताफा’ करने के लिए पथराव व हमले किए गए। जगजीत कौर नाम की एक लड़की का अपहरण कर जबरन धर्मांतरण कराया गया और एक मुस्लिम से उसकी शादी कराई गई। पिछले 70 वर्षों से पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को इसी तरह की प्रताड़ना का शिकार होते रहना पड़ा है।

मोदी बोले – अब कितना प्रमाण चाहिए ममता और केजरीवाल को

आखिर नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले राजद, कांग्रेस व अन्य विपक्षी नेताओं ममता बनर्जी, अरविन्द केजरीवाल को वहां के अल्पसंख्यकों पर धार्मिक अत्याचार, प्रताड़ना के और कितने प्रमाण चाहिए? 

श्री मोदी ने कहा कि सीएए पाकिस्तान, बंग्लादेश व अफगानिस्तान से 31 दिसम्बर, 2014 तक भारत में आए शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए है न कि किसी की नागरिकता लेने के लिए है। वोट की राजनीति के तहत कांग्रेस, राजद व अन्य विपक्षियों ने विशेष कर मुसलमानों के बीच दुष्प्रचार किया ताकि देश का माहौल खराब हो। मगर यह भ्रमजाल काफी हद तक छंट चुका चुका है। भाजपा इस अभियान के तहत देश के 3 करोड़ घरों में सम्पर्क कर गलतफहमी दूर करेगी। 

नेहरू-लियाकत समझौता पर भारत ने हमेशा अमल किया

उपमुख्यमंत्री जी ने आगे कहा कि भारत विभाजन के बाद धार्मिक अल्पसंख्यकों को दोनों देशों में सुरक्षा देने के लिए 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ। भारत तो उस समझौते का पालन करता रहा, मगर इस्लामिक राज्य घोषित पाकिस्तान,बंग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) और आफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों को धार्मिक प्रताड़ना, अत्याचार का शिकार हो कर बड़ी संख्या में भारत में शरण लेने के लिए विवश होना पड़ा।

1951 में पूर्वी पाकिस्तान में 22 प्रतिशत हिन्दू थे जो 2011 में घट कर मात्र 8.5 फीसदी रह गए। इसी प्रकार पाकिस्तान की हिन्दू आबादी इसी अवधि में 13.5 से घट कर 1.5 प्रतिशत रह गयी। हाल में हुई ननकाना साहेब की घटना से धार्मिक प्रताड़ना की भयावहता को समझा जा सकता है।

पटना से मौर्य न्यूज18 की रिपोर्ट