यादें : बेनूर आंखों का मसीहा ! Maurya News18

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लुई ब्रेल की जयंती पर साहित्यकार डॉ ध्रुव गुप्त ने जो लिखा है सबको पढ़ना चाहिए

डॉ ध्रुव गुप्त की कलम से

04 जनवरी ।

जिसने दृष्टिहीनों की दुनिया बदल दी

अपंगता हमेशा जीवन की बाधा नहीं होती, वरदान भी हो सकती है – यह दुनिया के बहुत सारे लोगों ने बार-बार साबित किया है। करीब दो सौ साल पहले फ्रांस में ऐसे ही एक व्यक्ति हुए थे लुई ब्रेल जिन्होंने अपनी संकल्पशक्ति से दुनिया के दृष्टिहीनों की दुनिया ही बदल कर रख दी।

पांच साल की उम्र में अपनी आंखें गंवा दी थी

5 साल की छोटी उम्र में एक दुर्घटना में अपनी दोनों आंखें गंवा देने वाले फ्रांस के एक मजदूर के बेटे लुई ब्रेल ने किस्मत के आगे हथियार नहीं डाले। उन्होंने अपनी कल्पनाशक्ति, लगन और मेहनत से दुनिया को वह अनमोल उपहार दिया, जिसपर मनुष्यता आज भी गर्व करती है ! वह उपहार थी दुनिया की महानतम खोजों में एक दृष्टिहीनों के लिए ब्रेल लिपि का अद्भुत आविष्कार।

अंधेरे जीवन में रौशनी भरने वाले तेरा नमन

इस आविष्कार ने दुनिया के दृष्टिहीनों को पढ़ने-लिखने के मौके देकर उनके अंधेरे जीवन में रोशनी भर दी। आजतक ‘ब्रेल लिपि’ ही बिना आंख के लोगों के लिए अपनी दुनिया और अपने लोगों से जुड़ाव एवं संवाद का एकमात्र ज़रिया बनी हुई है।

मानवता के महान उद्धारकों में एक लुई ब्रेल की जयंती (4 जनवरी) पर भावभीनी श्रधांजलि !

गेस्ट आभार

आपने रिपोर्ट लिखी है-साहित्यार डॉ ध्रुव गुप्त, आप आईपीएस हैं। बिहार से हैं । आपने पुलिस अधिकारी के तौर पर समाज औऱ देश की सेवा की और अब साहित्य और लेखनी के जरिए समाज को नई दिशा दे रहे हैं। आपका आभार।


मौर्य न्यूज18 की गेस्ट रिपोर्ट ।