बिहार : डीजिटल चुनावी तैयारी..किसमें कितना है दम..! MauryaNews18

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बिहार : वर्चुअल चुनावी तैयारी की अग्नि परीक्षा….

गेस्ट रिपोर्ट

आनंद माधव, पटना, बिहार ।  

2 जून, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार, एचआर श्रीनिवासन ने राज्य के सभी जिलों के ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर उन्हें चुनाव की तैयारी में लग जाने का निर्देश देते हुए कहा कि, वोटर लिस्ट, वोटर आईडी, ईवीएम की स्थिति को लेकर अद्यतन रिपोर्ट निर्वाचन आयुक्त शीघ्र उपलब्ध कराएं।

इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों में खलबली मच गई। इसके पहले यह संभावनायें व्यक्त की जा रही थी कि, कोविड 19 के महाप्रकोप को देखते हुये शायद चुनाव की तिथि आगे टले, शायद बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हो या फिर नीतीश कुमार को ही कामचलाऊ मुख्यमंत्री बनाये रखे। बिहार के मुख्य चुनाव आयोग के इस बैठक के साथ ही इन सभी अटकलबाज़ियों पर पूर्ण विराम लग गया। राज्य में चुनाव की दुदुंभी बज गयी।

एक चुनौती : राजनीति दल जनता के पास पहुंचे तो कैसे पहुंचे

अब समस्या यह है कि इस कोरोना संकट की घड़ी में राजनीतिक दल जनता के पास पहुँचे तो पहुँचे कैसे? दो महीनें से अधिक लॉकडाउन रहा। इसमें सब घरों में बंद रहे, ख़ास कर विपक्षी दलों के तो हाथ पाँव ही बँधे थे।

हलांकि की हर पार्टी डीजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से अपनें कार्यकर्ताओं से जुड़ कर अपनी बात रख रहे थे। लेकिन व्यापक रूप से डीजिटली जनता को संबोधित करना और उनसे सम्पर्क स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।

संचार, प्रचार, दुष्प्रचार, भ्रामक समाचार और जनता के बीच बढ़ता अविश्वास  

वाटस-अप विश्वविधालय के माध्यम से प्रचार प्रसार करने का सुमार सभी राजनीतिक दलों में है, लेकिन इस पर इतनें भ्रामक समाचार प्रचारित किये गये, इतनें दुष्प्रचार आये कि बहुत से लोगों का इसपर से लोगों का विश्वास उठनें लगा है। काफ़ी अधिक संख्या में लोग अब वाटस-अप मेसेजेस को डाउनलोड नहीं करते या फिर बिना देखे डीलिट कर देते। फिर भी संचार का अभी भी यह सबसे सशक्त साधन है। यही कारण है कि राजनीतिक दल अधिक से अधिक वाटस-अप ग्रूप बनानें मे लगे हुये हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म में फ़ेसबुक और ट्विटर का आज बोल बाला है। विरोध या समर्थन का यह एक सशक्त माध्यम भी। धड़ल्ले से राजनीतिक दल इसका प्रयोग भी कर रहे।

बिहार की सोंच क्या है….

बिहार में यह भी तो सच है कि पेट में रोटी हो ना हो मोबाईल हाथ में जरुर हो। पिछले 28 मई को कांग्रेस ने #स्पीकअपइंडिया हैशटैग से छोटे व्यापारियों, प्रवासी श्रमिकों, किसानों की माँगो को लेकर एक कैंपेंन चलाया था, जिसे अपार सफलता मिली। तीन करोड़ से ज़्यादा लोग अपनों फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यू ट्यूब के माध्यम से इस कैंपेंन से जुड़े। इससे कांग्रेस उत्साहित है और आगे भी ऐसे कैंपेंन चलानें की योजना बना रही।

आनंद माधव, बिहार कांग्रेस लीडर ।

चुनाव पर अमित शाह की पहली डीजिटल मीटिंग

अमित शाह पहली डीजिटल मीटिंग बिहार चुनाव को लेकर सात जून को कर रहे हैं। भाजपा सूत्रों से यह पता चल रहा है कि इसके माध्यम से बिहार के सभी 243 विधान सभा क्षेत्र से लगभग दो लाख लोग शामिल होगें। हर स्तर पर इसकी तैयारी हो रही है, कई जगह पंडाल भी लग रहे हैं जहाँ बड़े बड़े सक्रीन लगेंगे । कहा जा रहा है कि समाजिक दूरी बनाते हुए तथा मास्क लगा कर प्रत्येक पंडाल में पचास लोगों के बैठ कर सुननें की व्यवस्था है।

इसी तर्ज़ पर ज़ोर शोर से प्रत्येक राजनीतिक दल लोगों को जोड़ने में लग गये हैं। जनता का मोबाईल नम्बर इकट्ठा करनें की होड़ लगी है। कांग्रेस ने अपनों शक्ति प्रोजेक्ट के माध्यम से लाखों लोगों को इससे जोड़ा है और काफ़ी दिनों से इन नम्बरों पर मेसेज और व्याइस मेसेज भेज कर लोगों के बीच अपने संदेशों को प्रचारित कर रही है।

नीतीश कुमार का मोबाइल संदेश स्वयं की आवाज ही जनता तक पहुंचा रहे

नीतीश कुमार के साथ तो पूरा सरकारी तंत्र ही है, बहुत से मोबाइल संदेश उनके स्वयं की आवाज़ में ही लोगों तक पहुँचते रहे हैं। बिहार में जदयू का मोबाईल डाटा बैंक शायद सबसे मज़बूत हो सकता है।

राजद भी पीछे नहीं…जाप के पप्पू यादव सहित अन्य छोटे दल भी मजबूती से इसका उपयोग कर रहे ….

हम राजद को भी इसमें कमतर नहीं आंक सकते। तेजस्वी यादव लगातार ट्वीट और डिजिटल प्रेस कांफरेंश के माध्यम से सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं। अपने कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करते रहे।देखा जाय तो डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ार्म पर पप्पू यादव सबसे आगे रहे।उपेन्द्र कुशवाहा, जीतन राम माँझी और मुकेश सहनी इस दौड़ में काफ़ी पीछे नजर आते है। उन्हें अभी भी बहुत मेहनत की ज़रूरत है।

ज़ूम. वेबेक्स, गुगल मीट, गुगल दुओ आदि के माध्यम से भी राजनीतिक दल लगातार बैठकों का आयोजन कर रहे।

इतिहास कुछ इस प्रकार का है …

भारत में पहला मोबाइल कॉल नरसिम्हा राव के शासन काल मे (31 जुलाई, 1995) को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने केंद्रीय दूर संचार मंत्री सुखराम को किया था। आज यह मोबाइल लोगों के जीवन का ‘लाइफ़ लाइन’ बना हुआ है।

डीजिटल क्रांति को भारत में लानें का श्रेय भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को ही जाता है। सही मायनें में भारत में कम्प्यूटर युग की शुरुआत उनके ही समय में हुई थी। जिसका फ़ायदा आज पूरे देश को मिल रहा है।हालाँकि यह बात यहाँ कहना अप्रासंगिक ही होगा कि इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी के नेता श्री अटल बिहार वाजपेयी बैलगाड़ी पर बैठ कर संसद भवन आये थे और ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरे थे।आज कम्प्यूटर और मोबाइल की प्रासंगिकता सब समझ रहे हैं।

रोचक होगा बिहार का डिजिटल पॉलिटिक्स

रोमांचकारी होगा बिहार में राजनीतिक दलो का डिजिटल युद्ध देखना।यह एक वर्चुअल ‘वार’ होगा और वाटस-अप, फ़ेसबुक , ट्विटर, इंसटाग्राम आदि होगें ‘वाररूम’।ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा का आई टी सेल बहुत मज़बूत और सक्रिय है। उसके साथ कई प्रोफ़ेशनल लोग जुड़े है। दूसरे नम्बर पर आता है कांग्रेस।असली चुनौतियाँ तो क्षेत्रीय दलों को है। समय भी कम है ऐसे में कैसे सुदृढ़ करेंगे अपने आई टी सेल को।

देखना है डीजिटल प्रचार में कौन किसको पछाड़ता है….

देखना है डीजिटली प्रचार प्रसार में कौन किसको पछाड़ता है। जिसके पास जितना अधिक मोबाइल डाटा होगा वह उतना ही ताक़तवर होगा।वही इस चुनाव की अग्नि परीक्षा में सफल होगा।इसबार वर्चुअल वर्ल्ड तय करेगा, किसकी बनेगी अगली सरकार, कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

NITISH KUMAR, CM BIHAR.

आपने स्टोरी लिखी है…. GUEST REPORT


Anand Madhab

Leader of Bihar Congress . Chairman, Manifesto Committee & Research Department, Bihar Pradesh Congress Committee

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Posted by Anand Madhab on Saturday, June 6, 2020