इस्लामिक देशों की आपात बैठक आखिर क्यों ? Maurya News18

0
440

आधा दर्जन पुरस्कार देने के बाद आखिर क्यों इस्लामिक देशों ने भारत के खिलाफ आपात OIC बैठक बुलाई, क्या हैं इसके मायने

विशेष रिपोर्ट

भास्कर तिवारी, नई दिल्ली, मौर्य न्यूज18 ।

जिस गैर इस्लामिक प्रधानमंत्री को सबसे ज्यादा इस्लामिक देशों ने अपने देश का सबसे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार लुटा दिए । उसी प्रधानमंत्री के फैसले को लेकर अचानक OIC की बैठक बुलाना थोड़ा चिंतित करती है। क्योंकि इन्ही इस्लामिक देशों ने पीएम मोदी के दौरे दौरान इन देशों ने पीएम मोदी की कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ किए चोट का खुले दिल से स्वागत किया था । अब जब भारत अपने तीन पड़ोसी देशों के विरोध से घिर गया है तो अचानक इस्लामिक देशों ने कश्मीर के मुद्दे को लेकर OIC की आपात बैठक बुला ली ।

सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात तो यह है कि जो देश इस बैठक में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, वो खुद भारत के समर्थक रहे हैं और इतना ही नहीं धारा 370 से लेकर  आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ न सिर्फ खड़े होने की बात करते थे. बल्कि आर्थिक मदद देने की भी बात किया करते थे , तो ऐसा अचानक क्या हो गया कि ये देश भारत के खिलाफ हो गए हैं

सबसे पहले इस बात को समझना होगा कि इस बैठक का असली उद्देश्य था क्या ?

दरअसल OIC ने 21 जून 2020 को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक आपातकालीन बैठक की . इस बैठक में कश्मीर के मसले पर चर्चा की गई. ओआईसी ने एक बयान में कहा है कि इस ऑनलाइन बैठक में जम्मू और कश्मीर के मंत्री और OIC समूह के सदस्य देश अज़रबैजान, नाइजर, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे.

बता दें कि ओआईसी इस्लामिक देशों का संगठन है और इसमें सऊदी अरब का दबदबा है. जम्मू-कश्मीर का जब भारत ने विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म किया था तो ओआईसी लगभग ख़ामोश था. ओआईसी में सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों का दबदबा है. सऊदी ने भी अनुच्छेद 370 हटाने के मामले में पाकिस्तान का साथ नहीं दिया था और संयुक्त अरब अमीरात ने इसे भारत का आंतरिक मामला कहा था. हालांकि तुर्की और मलेशिया ने इस मामले में भारत की खुलकर आलोचना की थी.

जानिए कब बना OIC और कौन-कौन से देश हैं इसका हिस्सा

OIC 1969 में बना ऑर्गेनाइजेशन है. इस ऑर्गेनाइजेशन में कुल 56 देश हैं. इन 56 देशों के नाम हैं- अफगानिस्तान, अल्बानिया, अल्जीरिया, अज़रबैजान, बहरीन, बांग्लादेश, बेनिन, ब्रूनेई, दार-ए- सलाम, बुर्किना फासो, कैमरून, चाड, कोमोरोस, आईवरी कोस्ट, जिबूती, मिस्र, गैबॉन, गाम्बिया, गिनी, गिनी बिसाऊ, गुयाना, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, जार्डन, कजाखस्तान, कुवैत, किरगिज़स्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, मोजाम्बिक, नाइजर, नाइजीरिया, ओमान, पाकिस्तान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सेनेगल, सियरा लिओन, सोमालिया, सूडान, सूरीनाम, सीरिया, ताजिकिस्तान, टोगो, ट्यूनीशिया, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, युगांडा, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, यमन.

क्या है OIC का मुख्य उद्देश्य

1- OIC का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्लामी एकजुटता को प्रोत्साहन देना है. सदस्यों के बीच परामर्श की व्यवस्था करना है.

2- इसके अलावा इसका उद्देश्य न्याय पर आधारित देश अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बहाल करना है.

3- विश्व के सभी मुसलमानों की गरिमा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा करने का उद्देश्य भी इस संस्था का है

तो सवाल यह है कि जो देश आतंकवाद को लेकर भारत के साथ थे और शांति का पाठ पढ़ने के लिए उतावले थे वो अचानक भारत को घिरता देख क्या अपना सुर बदलने लगे हैं । क्योंकि मौजूदा समय में कश्मीर पर ऐसा कोई विवाद अब बचा भी नहीं है कि, इस मामले पर आपात बैठक बुलाई जाए । हालांकि इस पूरे मामले पर भारत का क्या रूख होता है ।

यह देखने वाली बात होगी लेकिन इतना तो तय है कि जो यह बैठक बुलाई गई उसके लिए भारत को रणनीतिक दबाव बनाना होगा । खासकर यूएई के ऊपर तो सबसे ज्यादा क्योंकि यही एक देश है जो इस्लामिक देशों का प्रतिनिधित्व लगातार करता आया है , और इस बैठक में भी सारे देशों का सिरमौर यूएई ही था ।

नई दिल्ली से मौर्य न्यूज18 की रिपोर्ट ।