दीदी की नर्सरी से रीना को मिली एक नई पहचान ! Maurya News18

0
302

सफलता की कहानी- बिहार के समस्तीपुर से….।

पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक सशक्तीकरण की तरफ बढ़ाया कदम

राजीव रंजन “आज़ाद” , समस्तीपुर, मौर्य न्यूज18

बिहार के समस्तीपुर जिले का एक महत्वपूर्ण प्रखंड है पूसा। पूसा कई मायनों में चर्चित एवं प्रसिद्ध है। यहां का कृषि विश्वविद्यालय पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान रखती है। पहचान की बात करें तो जीविका से जुड़ी पुसा प्रखंड के चंदौली के रीना पटेल की अपनी आज अलग पहचान है। कल तक रीना पटेल एक सामान्य घरेलू महिला थीं, जो आर्थिक कठिनाईयों का सामना कर रही थीं। पति रोजगार के लिए परदेश पलायन कर चुके थे।

प्रकृति का नियम है कि हर अंधेरी रात के बाद सुबह निश्चित रूप से होती है। ठीक ऐसा ही हुआ रीना पटेल के साथ। उनके स्याह जीवन के बदलाव की स्वर्णिम सुबह जीविका के साथ जुड़ने से हुई। जीविका के साथ बीत रहा हर क्षण रीना में आए सकारात्मक बदलाव का कारण बना। जीविका की मदद एवं रीना के प्रयास के कारण आज रीना का जीवन पूरी तरह बदल गया है। रीना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से दीदी की नर्सरी का संचालन सफलता पूर्वक कर रही हैं।

धरती पर धट रही हरियाली के कारण पर्यावरण में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। जिसको कम करने के लिए, हरियाली के प्रति लोगों को जागरूक करने और बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने ‘मुख्यमंत्री निजी पौधशाला योजना‘ का आरंभ किया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के इस कार्यक्रम ने पूसा प्रखंड के चंदौली की रीना पटेल के जीवन को पूरी तरह बदल दिया है।

रीना पटेल को भी जानिए…

रीना पटेल जीविका से लगभग छह वर्षों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने लगभग चार वर्ष तक वीआरपी के रूप में काम किया। जहां वो किसानों को आधुनिक तरीके से खेती के तरीकों के बारे में जानकारी देती थीं। उनके कार्यों की बेहतरी को देखते हुए उनका चयन कृषि उद्यमी के रूप में किया गया। कृषि उद्यमी के रूप में चयनित होने के बाद रीना पटेल को एनआईआरडी, हैदराबाद में पैंतालिस दिनों का प्रशिक्षण  मिला। इस प्रशिक्षण में रीना पटेल को कृषि से जुड़ी जानकारियों से अवगत कराया गया। इन जानकारियों को प्राप्त कर जब रीना अपने गांव लौंटी तो अव वो पहले वाली रीना नहीं रह गयी थीं। उनके आंखों में कई सपने फिर से आकार लेने लगे थे। मुश्किलों और कठिनाईयों को अपना हमकदम मान चुकी रीना को अपनी कई समस्याओं का समाधान कृषि उद्यमी के रूप में नजर आने लगा था। अब रीना ने रणनीति बनाकर कार्य करना आरंभ किया। स्थानीय लोगों को कृषि कार्य में मदद के साथ उसने अपने आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए भी प्रयास आरंभ किया। 

“दीदी की नर्सरी” योजना के बारे में जब पता चला

इसी दौरान रीना को यह जानकारी मिली कि बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के द्वारा कुछ शर्तों के साथ जीविका दीदियों को ”दीदी की नर्सरी” योजना का लाभ दिया जा रहा है। जीविका के प्रयासों के बाद रीना पटेल को मुख्यमंत्री निजी पौधशाला के अंतर्गत दीदी की नर्सरी का संचालन का मौका मिला। जब रीना पटेल ने दीदी की नर्सरी के संचालन का कार्य आरंभ किया तो परदेश रह रहे अपने पति को भी वापस बुला लिया। अब रीना पटेल पति कुमोद कुमार पटेल के सहयोग से कार्यों को बेहतर तरीके से अंजाम दे रही हैं।

एक पल ऐसा आया…

रीना पटेल बताती हैं कि- ‘जब मेरा चयन दीदी की नर्सरी के लिए हुआ तो मेरे खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मुझे लगा कि मेरे सपने के सच होने का वक्त आ गया है। सबसे पहले मैंने परदेश में रह रहे अपने पति को बुलाया। पहले तो उन्हें भी विश्वास नहीं हुआ। उनके मन में कई सवाल थे लेकिन वो वापस गांव आ गए। फिर हमलोगों ने विभाग के सहयोग से अक्टूबर 2019 में कार्य आरंभ किया। कार्य आरंभ करने के दौरान ही विभाग द्वारा मुझे प्रशिक्षण भी दिया गया।‘  

रीना आगे कहती हैं कि-साढ़े चार कट्ठे के प्लाट को पहले मैंने नर्सरी के लिए तैयार किया। जिसका निरीक्षण विभाग के अधिकारियों द्वारा किया गया। फिर उसमें मैंने बीस हजार पौधा लगाया। जो मुख्यतः महोगनी, सागवान, अर्जून, गम्हार आदि का पौधा था। इस पूरी प्रक्रिया के साथ ही मार्च 2020 में मुझे विभाग के द्वारा उक्त नर्सरी के संचालन की प्रथम किस्त के रूप में 40 फीसदी राशि यानि 88 हजार रूपया मेरे खाते में उपलब्ध करवाया गया। राषि मिलने के बाद मेरे जान में जान आई क्यांेकि अब तक मैंने काफी पैसा नर्सरी पर खर्च कर दिया था।
रीना आगे बताती हैं कि अभी उनकी नर्सरी में 17 हजार से ज्यादा पौधा सुरक्षित है, जिसे विभाग द्वारा जुलाई के दूसरे सप्ताह से खरीदने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गयी है। विभाग द्वारा पौधों को तीन श्रेणी में विभक्त कर उसकी खरीददारी की जा रही है और बेहतर पौधा को लगभग 11 रूपया 50 पैसा की दर से खरीदा जा रहा है। रीना को विश्वास है कि उनके पौधों की अच्छी कीमत मिलेगी और उन्हें कम से कम डेढ़ लाख रूपया और मिलेगा।

रीना कहती हैं कि यही पैसा मेरी आमदनी होगी। उनके अनुसार इस पूरी प्रक्रिया जो करीब-करीब छह माह की है में उन्हें लगभग डेढ़ लाख की आमदनी हो जाएगी। वो कहती हैं कि अब मेरे सपने पूरे होने का वक्त आ गया है। रीना कहती हैं कि आज मैं जो भी हूं उसका सारा श्रेय जीविका को जाता है। अगर मैं जीविका से नहीं जुड़ी होती तो शायद मेरे सारे सपने मेरे आंखों में ही रह जाते, वो सपने कभी भी हकीकत नहीं बन पातै। पर अब ऐसा नहीं है मेरे सपनों के पूरा होने का वक्त आ गया है। यह कहते हुए रीना को देखना उनके बढ़ चुके आत्मविश्वास को प्रतिबिम्बत करता है।

REPORT , SAMASTIPUR , MAURYA NEWS18

आपने रिपोर्ट लिखी है ।

राजीव रंजन आजाद,

जीवीका, समस्तीपुर में कार्यरत। इससे पूर्व पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं।