अरे बेहुद्दा…मैं डीजीपी हूं ! Maurya News18

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वैसे, इस फोन प्रकरण के बाद चहुओर लोग यही कह रहे कि बह्म बेला में “बाबा” खिसिया के ही सही, सच बोल गए.

कॉलम : बात-बे-बात ! मिरची लगी ।

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18

नमस्कार ।

मौर्य न्यूज18 के बात-बे-बात कॉलम में आपका स्वागत है ।

इस कॉलम की पहली कड़ी में टॉपिक बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे और भोजपुर के पत्रकार के बीच चार बजे सुबह में बालू खनन तस्करों की शिकायत करने के बाद जिस तरह से डीजीपी साहब ने पत्रकार को गलियाया है…वो ऑडियो खूब वायरल हो रहा है। इसी संदर्भ में बात-बे-बात – मिरची लगी कॉलम के जरिए कुछ व्यंग्य प्रस्तुत है। जरा आप भी इसके जरिए संदेशों को समझिए औऱ इंज्वाई करिए।

संपादक, मौर्य न्यूज18 ।


अरे बेहुद्दा….तुमको पता है कि कितना बज रहा है। इ तीन चार बजे भोर में डीजीपी को फोन करने का है । अरे सुनो, बेहुद्दा कहीं का…पत्रकार बनता है। सब पत्रकारिता भूला देंगे तुम्हारा। तुम्हारा सब लिस्ट खंगालके तुमको समझाएंगे करना क्या है।

पत्रकार– सर, सर । एसपी साहब को फोन लगाए, थानेदार को फोन लगाए, डीएसपी साहब को भी फोन लगाए कोई उठाये नहीं इसलिए आपको फोन लगाए सर। बालू माफिया कोइलवर में लगा हुआ है सर ,वही कहना था ।

अरे बेहुद्दा चोर कहीं का। दलाल हो तुम लोग। सब दलाली करता है। चोरी करता है। तुम, पत्रकार, थानेदार, एसपी, विधायक, नेता सबके सब दलाल हो। हमको सब पता है। तुम खनन विभाग के सिक्रेटरी को फोन लगाव । ये सब देखना मेरा काम है। बेहुद्दा कहीं का, दलाल कहीं का। तुम हमको क्यों फोन लगाया रे। तुम्हारा सारा कुंडली खंगाल के तुम्हार सब पत्रकारिता भुला देंगे। समझा की नहीं ।

डीजीपी साहब जब से बड़का साहेब बने हैं कौनों ना कौनो बहाने फेसबुक पर प्रवचन देने आते रहते हैं । लेकिन पिछले दिनों चार बजे सुबह में आरा के एक पत्रकार का इस कदर फोन करना । साहब का मिजाज गरम कर दिया। डीजीपी साहब आप तो खुद पुलिस कर्मियों को फेसबुक लाइव पर प्रवचन देते हैं कि पत्रकार को सुनिए। उसका रिस्पेक्ट करिए। वो जो जानना चहता है वो बताइए। पत्रकार की ओर से कोई शिकायत मिली तो खैर नहीं। रौब तो साहब ऐसा जमाते हैं कि पत्रकार के नाम पर सिपाही लोग का कान खड़ा हो जाता है । पुलिस लोग को लगता है कि पत्रकार का नहीं सुनोंगे तो डंड़ा करवा देगा डीजीपी साहब से । लेकिन भगवान का लीला देखिए….। प्रभु की कृपा से डीजीपी साहब ही पत्रकार की चपेट में आ गये। औऱ ऐसा खिसियाए कि सारा निम्मन बोले वाला रिकार्ड ध्वस्त हो गया । खूब गलियाये । लगा अबकी कोई पुलिस महकमे का बॉस बोल रहा है। नहीं तो लगता था कोई बाबा टाइप बोल रहा है। आगे चलकर पॉलिटिक्स करेगा ऐसा लगता था। खैर, छोड़िए । डीजीपी साहब की बात है।

कहते भी हैं, जिसका जो स्वभाव है वो एक ना एक दिन प्रकट हो ही जाता है। वही हुआ। जब से साहब..डीजीपी साहब बने तब से बड़ा निम्मन-निम्मन बात करने लगे थे। लेकिन भोलेनाथ को देखिए…सावन में क्या गुल खिलाए…कि बाबा का नाग जाग गया। सो, पत्रकार पर ही फूंफकार बैठे । और खूब गलियाने लगे। पत्रकार गिरगिराता रहा औऱ साहब गलियाते रहे। दो कौड़ी का पत्रकार डीजीपी को चार बजे सुबह में फोन लगाता है , ठीक हुआ। बेहुद्दा कहीं के…जाके सुतना चाहिए त चार बजे भोर में पत्रकारिता कर रहा था। बुझिए त ऐसनो कहीं होता है। तब ना साहेब गलियाए।

लेकिन डीजीपी साहब इ भी बात सही है कि…निम्मन-निम्मन बात बोलना एगो बात है…औऱ उसपर हमेशा डटे रहना दूसरी बात है। हमारे पूर्वज सही ही कह गए हैं कि नेचर औऱ सिंगनेचर किसी का बदलता नहीं है । कोई भी बनावटी काम करिएगा या बनावटी निम्मन स्वभाव वाला रोल करिएगा तो रियल लाइफ में कभी ना कभी भेद खुल ही जाएगा। वही हुआ।

वैसे इस पर एक कहानी सुनाते हैं. तब बात पूरी समझम में आएगी कि निम्मन-निम्मन बात बोलने वाले डीजीपी साहब आखिर पत्रकार को गलियाने क्यों लगे। जरा गौर करिएगा। डीजीपी साहब आप भी गौर करिएगा बनावटी स्वभाव का नतीजा क्या होता है।

एक कहानी सुनिए डीजीपी साहब…आप पर सूट करता है…।

एक गांव में एक ज्योतिष था जो तोता पाले हुए था। रोड के किनारे रोज उस तोते को लेकर बैठता था औऱ लोगों का भविष्य बताता था । जब तोता भविष्य बताता तो पहले बहुत गाली बकता था। तोते का स्वभाव ऐसा हो गया था कि जब देखो किसी को भी गाली देने लगता था। दिनोंदिन हरकत औऱ भी बढ़ गई । तब एक दिन गांव वालों ने प्लान किया कि पंडितजी को तोता के गाली बकने वाले स्वभाव के बारे में शिकायत की जाए।  शिकायत हुई और पंडितजी से कहा गया कि तोता यूं ही गाली बकेगा तो ये सब नहीं चल पाएगा, कुछ करिए पंडितजी तोता को कुछ अच्छा-अच्छा सिखाइए, ऐसे नहीं चलेगा । पंडितजी, गांव वालों की बात मानकर कुछ दिन के लिए घर में ही तोते को रामायण और महाभारत का श्लोक सिखाए। तोता सीख भी गया।

अब पंडितजी फिर से तोता को लेकर मार्केट में आये। अबकी बार, तोता के पास गांव वाले आये तो तोता रामायण और महाभारत बोलने लगता था। ये जानकर सब खुश हुए कि चलो पंडितजी ने तोते को बढ़िया ज्ञान दिया है।  


इसी बीच सुबह-सुबह गांव के मुखिया पंडित के पास पहुंचे, बोले पंडितजी तोता तो सुधर गया पर ये सब हुआ कैसे। तो पंडितजी ने कहा कि बायां पैर में एक रस्सी लगा रखा है उसे जब खिंचता हूं तो तोता रामायण पढ़ता है औऱ जब दांये पैर की रस्सी खींचता हूं तो वो महाभारत पढ़ता है। इसी बताने के क्रम में पंडितजी से तोते का दोनों पैर का रस्सी खिंच गया । जैसे ही दोनों पैर की रस्सी खिंचीं तोता बोला…अरे पंडित बेहुद्दा कहीं का मेरी जान लेगा क्या रे।  

मुखिया जी दंग रह गये। मुखिया जी, बोले सही में किसी का नेचर औऱ सिंगनेचर कभी नहीं बदलता है। लाख सीखाइए जो गाली बकने वाला है वो एक दिन गाली उगलेगा ही।

डीजीपी साहब के साथ भी शायद यही हुआ। उन्होंने बहुत कोशिश की कि स्वभाव पर कंट्रोल किया जाए लेकिन तीन-चार बजे सुबह पत्रकार के फोन ने सारी पोल पट्टी खोल दी।

वैसे, समझना होगा कि जब तक डीजीपी है तभी तक कोई उनको फोन करेगा भी । नहीं, तो पद से उतरते ही कोई फोन इस बात के लिए शायद ही करेगा। ऐसे में आपकी मर्जी है। जता लीजिए रौब।

पत्रकार ने महामाप किया, शूली पर चढ़ा दीजिए …..

डीजीपी तो भारी भरकम पद है। पत्रकार ने तो महापाप किया ही जो चार बजे सुबह में फोन कर दिया। बेसक, आप उसकी कुंडली खंगालिए और उसे शूली पर चढ़ा दीजिए। लेकिन आपके उस बात की क्या सजा होनी चाहिए जो आप खुद कह रहे हैं कि थानेदार चोर है, एसपी दलाल है, विधायक नेता लोग दलाल है। आप जब इतना जानते हैं तो फिर सबको छूट क्यों दे रखी है। माना कि विधायकजी को टच करना आपके बस में नहीं लेकिन थानेदार औऱ एसपी साहब के सुपर ब़ॉस हैं आप । या ये माने के यहां भी आपकी नहीं चलती।

खैर, आपका निम्मन-निम्मन बात फेसबुक पर सुनने को मिलता रहे। बनावटी स्वभाव में ही आप अच्छे लगते है। वैसे, इस फोन प्रकरण के बाद चहुओर लोग यही कह रहे कि बह्मबेला में “बाबा” खिसिया के ही सही, सच बोल गए…इसके लिए “बाबा” आप को सेल्यूट तो बनता है।  

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।