कोरोना काल में बैंक की भूमिका क्या है ! जानिए प्रशांत चौधरी से…! Maurya News18

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नई दिल्ली से मौर्य न्यूज 18 की खास रिपोर्ट ।

दिल्ली के पंचसील पार्क स्थित सेंट्रल बैंक के सीनियर मैनेजर प्रशांत चौधरी से मौर्य न्यूज18 की ओर से बिजनेस संवाददाता बबली सिंह ने खास बातचीत की औऱ जानना चाहा है कि ग्राहक जो पैसा या जेवर बैंक में जमा करवाते है तो समझते है कि वो हमारे घर से भी अधिक सुरक्षित है बैंक में ,लेकिन जब बैंक ही में घोटाला होने लगता है और बैंक अपने हाथ खड़े कर देती है कि वो अब आपही के पैसे लौटाने में असमर्थ है तब लगता है कि हमने बहुत बड़ी गलती कर दी ऐसे बहुत सारे बैंक है जिसमें लोगो ने अपने मेहनत कि कमाई जमा करवाई और उन्हें अपना पैसा पूरा वापस नहीं मिला अब इसमें गलती किसको दे ,बैंक की या खुद की।

इन्हीं सारे प्रश्न को जानते हैं बैंक मैनेजर प्रशांत चौधरी से ।

सीनियर मैनेजर प्रशांत चौधरी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया दिल्ली

बैंक मैनेजर प्रशांत से हमने सबसे पहले जानने की कोशिश की कि इस कारोना काल में देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है , तो बैंक की क्या भूमिका रहेगी देश को इस संकट से उबरने में?

इस प्रश्न पर उन्होंने कहां कि सरकार ओर से बहुत सारी नई योजना आयी है जिससे की आर्थिक रूप से उबरने में मदद मिलेगी, सबसे पहले तो उन्होंने बताया कि एमएसएमई में रजिस्ट्रशन करवा के बैंकों से लोन मुहैया करवाई जा रहीं है. जिससे आम जनता को अपना कारोबार शुरू करने में आसानी हो ,फिर जितना उनका व्यापार बढ़ेगा उतना देश को फायदा होगा , मिस्टर प्रशांत ने ये भी कहां कि हम ज्यादा से ज्यादा नय कस्टमर बनाएंगे उन्हें नई योजनाओं के बारे में मार्गदर्शन देंगे , तभी वो इन सारी जानकारियाों से लाभान्वित होंगे ,इसमें बैंक का भी फायदा है ,और बैंक उन्हें ही मदद करती है जो इन पैसे का सही उपयोग करते है अगर बैंक ऐसा नहीं करेगी तो इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अगला प्रश्न क्या बैंक किस आधार पर लोन देती है और उसके क्या क्या नियम है?

श्री चौधरी ने कहां कि बैंक लोन देने से पहले हमें बहुत सारी जानकारी रहती है कस्टमर्स की जैसे सिविल, एक्सपीरिएंस, कृत्,जैसे बहुत सारे पोर्टल है जिससे हमें कस्टमर को चुनने में आसानी होती है और उसके बाद हम उनका आधार कार्ड ,पैन कार्ड की जो यूनिक नंबर है उसको भैरीफाई करते है ,उसके बाद हम उनका सोर्स आफ इनकम देखते है कि वो कितना कमाते है महीने में, उसके बाद ही उनकी मदद करते है ,जिससे कि हमें कोई धोखा ना दे सके।जो नया कारोबार करना चाहते है उनकी इस कोशिश में उनका पूरा साथ देते है, हम उन्हीं को लोन देते है जिनकी प्रॉपर जानकारी हमारे पास हो और हमे लगे कि वो आगे बढ़ सकता है,और ली गई धनराशि को लौटाने में सक्षम हो।

बैंक का ग्राहकों के साथ कैसा व्यवहार होता है क्या आम जनता और बड़े कारोबारी दोनों के साथ एक जैसा व्यवहार करते हैं?

हमारा ये प्रश्न इसलिए भी खास है कि कुछ लोगों का कहना है कि बैंक आम जनता और बड़े बड़े उद्योगपतियों को अलग-अलग तरीके से ट्रिट करती है,जितना बड़ा खाता उसके हिसाब से बात की जाती है।

इस पर प्रशांत ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि ऐसा नहीं होता हमारे लिए सारे ग्राहक बराबर है , हां, ये जरूर है कि जिन्हें थोड़ी बहुत जानकारी में दिक्कत आती है तो उन्हें हमारे दूसरे कर्मचारी मदद करते है ,उनकी मदद के लिए बाकायदा एच डवलू ए काउंटर है जिनको पैसा जमा करना या निकालना है।और जो बड़े कारोबारी आते है उनको और भी दूसरे काम होते है जैसे की उनके अकाउंट की देखरेख ,उनकी कंपनी के अंडर में बहुत सारे कर्मचारी होते है उनकी सैलरी अकाउंट देखना और भी बहुत सारी चीजे होती है तो उनको थोड़ा सा खास तबज्जों देना पड़ता है आखिरकार बैंक भी चाहती है कि बड़े कस्टमर उनसे जुड़े रहे ताकि उनका फायदा हो।

सरकार ने अभी कुछ दिन पहले ये घोषणा की थी कि आम जनता को बिना गारंटी लोन दिया जाएगा तो क्या बैंक बिना गारंटी लोन दे रहीं ?

बैंक मैनेजर प्रशांत ने कहा कि सरकार ने बिना गारंटी लोन की सुविधा दी है और हम भी आम जनता को ये सुविधा दे भी रहे हैं लेकिन ये सुविधा उन्हीं के लिए है जिनके पास प्रॉपर पेपर्स हो जैसे कि पहले भी बताया है कि मैंने आपका केवाईसी यानी आधार और पैन ,फिर उसकी मंशा कि वो किस चीज के लिए लोन ले रहे है ,उसके बाद उन्होंने जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट दिया है ,जैसे कि उन्होंने कोई मशीनरी खरीदा हो कोई वॉटर बॉटल का प्लांट लगाने के लिए लोन ले रहा है, वो कोटेशन हमे देते है कि वो किस दुकान से सामान खरीद रहे हैं, वो पैसे हम उस दुकानदार को देते हैं ,इस तरह से पूरी इंस्पेक्शन के बाद ही उन्हें ये सुविधा दी जाती है ,हम जब भी लोन देते है तो लोन के मार्जिन के हिसाब से 10 से 20% पैसे आपको पहले जमा करना होगा तभी ये लोन आपको मिलेगा और जिन्हें भी हम बिना गारंटी के लोन देते है उसे सरकार के पोर्टल पे डाल देते है कि हमने उन्हें विभिन्न कार्यों के लिए बिना गारंटी लोन दिया है ।यहां गारंटी का मतलब है कि आपको लोन के एवज में अपना कुछ भी मॉर्गेज नहीं रखना है क्यूंकि आपके लोन की गारंटी सरकार ले रहीं है।

हमारा अगला प्रश्न उनसे रहा कि एनपीए क्या है और ये इतना क्यों बढ़ रहा है?

इसपर मिस्टर चौधरी का कहना था कि प्रॉपर डोकंडेशन होने के बाद भी कभी कभी एनपीए हो जाता है,हम फाइनेंस करते है तो पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही करते है लेकिन उसके बावजूद भी किसी कारणवश एनपीए हो जाता है, वैसे तो कोई भी कस्टमर ऐसा नहीं चाहता कि एनपीए हो जाए किसी भी लोन को रीपेमेंट करने में अगर तीन महीने की देरी होती है तो कस्टमर का सिविल खराब हो जाता है, हां लेकिन एमएसएमई से लोन लेने वालों को सरकार ने छह महीने का समय दिया है दोबारा रीपेमेंट करने के लिए।जहां तक सवाल है एनपीए बढ़ने का तो इसके बहुत सारे कारण हो सकते है एक तो जब आपने लोन लिया तब आप इसको देने ने सक्षम थे ,लेकिन किसी कारणवश आपका काम बंद हो गया,या कोई मेडिकल इमरजेंसी आ गई ,या आपका कारोबार घाटे में हो गया ,या आपकी नौकरी छूट गई जिसकी वजह से आप दोबारा पेमेंट नहीं कर पाए ,तो इस सूरत में आपको तीन महीने तक का समय मिलता है लेकिन अगर आपने इससे ज्यादा का समय लिया तो अकाउंट एनपीए हो जाता है फिर आप जब दोबारा तीन महीने बाद पेमेंट करेंगे तो लोन के नियम के अनुसार आपको सुविधा दी जाएगी ।बैंक हमेशा चाहती है कि मेरा कस्टमर अच्छा करे अगर वो अच्छा करेंगे तो बैंक अच्छा करेगा और हमारा देश अच्छा करेगा।

क्या लोन लेने के लिए नाम और ब्रांड ही काफी है या काम पर भी ध्यान दिया जाता है?

इसपर उनका कहना था कि जो बड़े बड़े नेम फेम वाले लोग होते है उन्हें लोन इसलिए आसानी से मिल जाता है क्यूंकि उनके पास दिखाने के लिए सब कुछ होता है उनका हर काम सी ए के द्वारा होता है उनकी प्रॉपर इनकम कंपनी की ब्रांड वैल्यू सब कुछ दिखाया जाता है जिससे हमें उन्हें लोन देने में आसानी होती है । हां लेकिन कभी कभी हमे भी धोखा हो सकता है कि हम उस कंपनी के अंदर की बात नहीं जानते और बाह्य आवरण को देख संतुष्ट हो जाते है लेकिन ज्यादातर ऐसा होता नहीं है।

सरकार ने ईएमआई में राहत दी है क्या बैंक सरकार के इस फैसले के अनुसार बैंक ई एम आई में राहत दे रहीं है?

इसपर मैनेजर प्रशांत का कहना था कि सरकार ने ग्राहकों के लिए बहुत राहत दी है इस क्रोना काल में ,बहुत सारे कस्टमर के दिमाग में ये बात थी कि लॉक डाउन में वो ई एम आई कैसे पे करेंगे, पता नहीं क्या होगा कितनो की नौकरी खतरे में है, अगर ये लंबा चलेगा तो वो कैसे सब कुछ मैनेज कर पाएंगे। लेकिन सरकार के इस अहम फैसले ने सबको राहत दे दी ,इस फैसले आधार पर अगर किसी की लोन चुकाने की अवधि एक साल है तो उन्हें छह महीने और बढ़ा दिया गया है और वो अब अपनी ई एम आई चुकाने के लिए छह महीने और ले सकते है । छह महीने का हॉलिडे पीरियड बना दिया गया है ,और लोन चुकाने के टर्म में छह महीने बढ़ा दिया गया है।और इससे आपके सिविल पे भी कोई प्रभाव नहीं होगा ।

अगर कोई भी बैंक दिवालिया होती है तो कस्टमर्स के सारे पैसे डूब जाते है ?जबकि आम जनता अपनी जमा पूंजी बैंक में जमा इसलिए करवाती है क्यूंकि वो बैंक को सुरक्षित मानती है ?

इसके बारे में श्री चौधरी ने कहा कि अगर कोई भी बैंक दिवालिया होती है उस सूरत में मेरा यहीं कहना है कि ग्राहक घबराए नहीं , अफवाहों में ना आए क्यूंकि गवर्मेंट का नियम है कि अगर बैंक दिवालिया हुई तो ग्राहकों कि पांच लाख तक की राशि दी जाएगी सरकार द्वारा, हां लेकिन आपके सारे पैसे डूबेंगे नहीं और उनका ये भी कहना है कि आप हमेशा सतर्क रहे किसी भी चिट फंड में अपना निवेश ना करे और जिस तरह से आपने आज तक विश्वास रखा है आगे भी विश्वास रखे आपका पैसा सुरक्षित रहेगा और ये हर बैंक कि जिम्मेवारी है।

नई दिल्ली से बबली सिंह की रिपोर्ट।