कब तक डराते रहेंगे लालूराज का डर ! फिर क्या बोले भाजपा के सम्राट! Maurya News18

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नवनिर्वाचित भाजपा एमएलसी सम्राट चौधरी से खास बातचीत में और क्या-क्या बोले, जानिए

नयन की नज़र से … बिहार पॉलिटिक्स ।

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।
भाजपा के युवा लीडर नवनिर्वाचित विधान पार्षद सम्राट चौधरी ।

पहले जान..फिर मतदान। ऐसा ही होगा। भाजपा का नजरिया स्पष्ट है।

फिर तो राष्ट्रपति शासन लगेगा। और सत्ता राज्यपाल के हाथ। यानि भाजपा के हाथ।

अब ये तो संवैधानिक प्रक्रिया है इसमें हम क्या बोलें। जो संविधान के दायरे में होगा, सो होगा। इसमें कोई विधायक या नेता क्या कर सकता है। हां, चुनाव समय पर हो एनडीए शुरू से ऐसा ही चाह रही है। लेकिन कोरोना की जो स्थिति बन रही है, उसमें आसार तो चुनाव टलने जैसे ही लगते हैं। मौर्य न्यूज18 से खास बातचीत में भाजपा के नवनिर्वाचित एमएलसी सम्राट चौधरी ने ये बातें कहीं है। और भी बहुत कुछ कहा है जानिए इस इंटरव्यू के जरिए।

इंटरव्यू से पहले एक खास बात —

बिहार की राजनीति । बिहार की नेतागिरी। बिहार में गांव में जो कहते है पॉलिटीश। लालू-नीतीश के आसपास ही घुमती है। ऐसा क्यों है। ऐसा क्यों हुआ। कौन है जिम्मेदार। क्या जनता वही करती रही जो पॉलिटिशियन कहते रहे। या नेता टाइप लोग कहते रहे। जातिवाद ही यहां की राजनीति रही। और आगे भी रहेगी। क्या विकास की सिर्फ बात होगी । या फिर जो विकास हुआ उसी में खुश रहने को जनता को मजबूर किया जाएगा। बहुत सारे सवाल हैं। जो प़ॉलिटिक्स में गुंजते रहते हैं। लेकिन पॉलिटिक्स है जो सबका जवाब देने में कोई रूची नहीं दिखाती है। अब दौर एक और आने वाला है। जब लालू, नीतीश, रामविलास, सुशील कुमार मोदी जैसे नेता रिटायर होंगे….पर इनके नाम से राजनीति होती रहेगी तो फिर अगली कड़ी में कौन होगा…नाम जो उभरे हैं वो तो हैं ही अभी और भी उभरेंगे…। इन्हीं सब प़ॉलिटिक्स को समझने के लिए हम नये दौर के युवा नेताओं को चुन-चुन कर पूछेंगे – भविष्य का बिहार कैसा होगा, भविष्य का पॉलिटिक्स कैसा होगा औऱ आपको बताने की कोशिश करेंगे कि आगे कौन-कौन सा लीडर बिहार को मिलने जा रहा है। इस कड़ी में मौर्य न्यूज18 ने शुरूआत की है भाजपा के सम्राट से यानि पूर्व में मंत्री रहे और वर्तमान में विधान पार्षद सम्राट चौधरी से।

भाजपा के सम्राट से बात चली तो बिहार के विकास से शुरू हुई। मौर्य न्यूज18 ने सवाल खड़े किए कि कब तक डराते रहेंगे लालू के राज का डर। क्या एनडीए के पास जीत का यही फार्मूला है।

सम्राट कहते हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है। हमारे 15 साल के एनडीए शासन में गिनाने को बहुत कुछ है। लेकिन जब विपक्ष राजद को सुप्रीम मानकर हमला करता है। लालू यादव का नाम लेकर सत्ता में आना चाहता है। तो उस लालू रज के पंद्रह सालों का जिक्र करना ही पड़ता है। जनता को याद दिलाना ही पड़ता है कि वो 15 साल कैसे थे। बात बहुत सीधी सी है। जनता समझती है।

तो इसका मतलब ये मान लें कि आपकी एनडीए मतलब नीतीश कुमार की सरकार कोई विकल्प ख़ड़ा नहीं होने देगी, लालू का डर दिखाकर।

कहने लगे, कौन रोक रहा है विकल्प खड़ा करने के लिए। करिए विकल्प खड़ा नीतीश कुमार के विकल्प क्या लालू के पुत्र हो सकते हैं। कांग्रेस के पास है कोई उम्मीदवार। और कोई लेफ्ट-राइट छोटी-छोटी पार्टियां क्या ऐसा कोई सीएम उम्मीदार देने में सक्षम है तो दे चुनौती फिर मुकाबला होगा। लेकिन ऐसा है नहीं। नीतीश कुमार और एनडीए की सरकार ने काम ही ऐसा किया है कि विकल्प बनना मुश्किल होगा।

तो फिर ये मान लिया जाए कि जो नीतीश कहे वही सही। भाजपा भी तो साथ रही लेकिन भाजपा की ओऱ से कोई नीतीश जैसा चेहरा उभरा नहीं। कहां अटकी रही पॉलिटिक्स।

ऐसा नहीं है। हमारे भाजपा में एक बाद क्लियर है, जिसको साथ देते हैं भरपूर देते हैं। अगर भाजपा ने नीतीश कुमार को सीएम बना दिया तो फिर अपने अंदर कुछ तैयार करने की प्रक्रिया नहीं होती है। औऱ रही बात भाजपा में नेता कि तो हमारे पास बेहतर अनुभव औऱ शासन चलाने वाले सुशील कुमार मोदी जो उपमुख्यमंत्री के तौर रह सत्ता में नीतीश कुमार का साथ देते रहे, नये दौर में भी केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय जैसे दिग्गज नेता केन्द्र औऱ राज्य में साथ देते रहे। कितना गिनाउं। कम पड़ जाएंगे। लेकिन भाजपा कभी अपने को सीएम के रूप में नहीं पेश की क्योंकि नीतीश कुमार को जब भाजपा ने मान लिया तो फिर दूसरी कल्पना हम आज भी नहीं करते। ये हमारे गंठबंधन की एकता का भी प्रतीक है।

ठीक है, पर सूबे में ना फैक्ट्री लगी, ना पलायन रूका, ना रोजगार के सृजन हुए…ना ही हत्या, अपहरण, बलत्कार जैसी घटनाएं रूकीं। अस्पतालों में बच्चे मरते रहे। शिक्षा की दुरदशा तो जग जाहिर है। फिर किस बात की तारीफ की जाए।

देखिए…आप जो भी कह रहे हैं। उस बारे में आप खुद ही सोंचिए। हमारा आधा बिहार तीन से चार महिने तक बाढ़ से डूबा रहता है। नेपाल से जबतक समझौता नहीं होगा, जल प्रबंधन नहीं होगा तब तक ये रूकेगा भी नहीं औऱ ये अंतराष्ट्रीय समस्या है। दूसरी तरफ सुखाड़ से त्रस्त रहता है बिहार। ऐसे में जो बीच का रास्ता है वो हमारे लिए किसानी, खेतीबारी या नदियों से बालू यही कमाइ का साधन है। ऐसे में फैक्ट्री कहां लगाइ जाए। बिजली भी अब पूरे सूबे में मिलने लगी है। आने वाले समय में अब इन्हीं चीजों पर काम होगा। यहां एकबार फिर लालू राज की बात करूंगा।

जिसमें सूबे की तमाम सड़के, तमाम सरकारी भवन, स्कूल औऱ कार्यालय सब ध्वस्त था, पुल-पुलिया नहीं, बिजली-पानी नहीं, अपराध सो अलग । इन सब को सुधारना चुनौती थी। ये सब ठीक करने के बाद ही ना कोई फैक्ट्री लग सकती है। अब सब ठीक हो गया है। बिहार में आने वाले समय में एनडीए की सरकार पूरी तरह से रोजगार पर ही काम करेगी। और बड़ी-बड़ी कंपनियों को यहां निवेश के लिए प्रेरित किया जाएगा।

आप युवा लीडर हैं। आप राजद में लालू प्रसाद के साथ भी रहे, जदयू में नीतीश कुमार के साथ भी रहे…अब भाजपा में मोदी के साथ हैं। क्यों लालू-नीतीश को छोड़कर भाजपा के शरण में आए।

देखिए समय-समय की बात है। राजद में लालू प्रसाद जी के साथ था तो वहां उनके लिए बच्चा ही था। जदयू में नीतीश कुमार के साथ भी कुछ वैसे ही भाव से देखा औऱ समझा जाता रहा। अभिभावक और पार्टी लीडर के तौर पर जो कहते उतना कही करता। खुद का करने के लिए वहां कुछ भी नहीं था। पर, नीतीश कुमार ने मौका दिया, इसलिए कभी कोई शिकायत नहीं रही।

पर, भाजपा एक ऐसी पार्टी हैं जहां आप अपना कुछ विजन रखते हैं तो अपको नेता सुनेंगे भी और करने का मौका भी देंगे। संगठन में अनुशासन से काम करने की शैली है। यहां वन मैनशो वाली बात नहीं है। इसलिए मैंने भाजपा को चुना और यहां संगठन जैसा जो भी दायित्व सौंपेगा, वो काम करते रहेंगे और अपने विजन को भी रखेंगे। जनता के बीच काम करना है तो ठोस रणनीति तो बनानी ही होगी।

आपका विजन क्या है, जानना चाहूं तो….क्या कहेंगे आप ।

मेरा विजन क्लियर है। आप मेरे उस कार्यकाल की ओर चलिए जब मैंने सूबे में नगर विकास मंत्री के तौर पर काम किया। उस वक्त ही बिहार की राजधानी में मैट्रो औऱ अंतर्राज्यीय बस स्टैंड जैसी परियोजनाओं के मार्ग प्रसस्त किए, सम्रार्ट अशोक भवन सूबेभर में बनाने की योजना पर काम किया। यानि हर जिले में टाउन हॉल बनवाने पर काम । नगर में सिटी बस चलवाए। ये कुछ ऐसे काम हैं जो महज आठ महिने के  कार्य काल में किये गए। ये कार्यकाल 2 जून 2014 से 15 फरवरी 2015 तक रहा जब जीतनराम मांझी मुख्यमंत्री रहे। वहीं राजद के काल में भी 1999 में महज पांच महीने 28 दिन में बतौर माप-तौल बागवानी मंत्री काम करने का मौका मिला तो मैंने सूबेभर में कोल्ड स्टोरेज बनवाने का काम किया। कुल मिलाकर जब जितना मौका मिला, हटकर किया, हमारे कामों का रिकार्ड देख सकते हैं। इसी बात से आपको हमारे विजन का पता लगा जाएगा। मौका मिलते ही हम काम को किस तरह से अंजाम देते हैं। आप रिकार्ड देख सकते हैं।

पटना में बस सेवा उपलब्ध कराते हुए तत्कालीन नगर विकास मंत्री सम्राट चौधरी। फाइल फोटो ।

सही है आपका विजन सूबे को बहुत कुछ दे सकता है। पर एक सवाल है, बिहार में अपके पिता शकुनी चौधरी कुशवाहा लीडर, रामविलास पासवान दलित लीडर और लालू प्रसाद यादवों के लीडर के तौर पर उभरे। अब इन तीनों लीडर के पुत्र राजनीति में हैं। और सबकी पहचान लीडरशीप वाली भी है। आप सबको कैसे देखते हैं।

देखिए लालू प्रसादजी के पुत्र तेजस्वी यादव सूबे के उपमुख्यमंत्री बने लेकिन आप देख लीजिए रिकार्ड, कोई काम ऐसा नहीं किया जिससे लोगों को या सूबे की जनता को लगे कि लालू पुत्र में दम है या बहुत कुछ करने का विजन है । आपको जब मौका मिलता है उसी दौरान किए काम को आप आगे रखेंगे ना, शो तेजस्वी यादव ने बड़े मौके पर भी कुछ नहीं किया। मैंने तो अपने छोटे-छोटे कार्यकाल के बारे में जिक्र किया ही है। रिकार्ड देख लें काम का। रही बात रामविलास जी के पुत्र चिराग पासवान की तो वो बतौर सांसद ही केन्द्र की राजनीति में हैं। अभी ना तो केन्द्र में मंत्री बने हैं ना ही सूबे में कोई मंत्री ऐसे में उनके बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। वैसे, संसद मैं जिस तरह से अपने सूबे और क्षेत्र के विकास के लिए आवाज बुलंद करते हैं उसकी तारीफ तो सभी दल के लोग करते हैं। जिससे लगता है उनका विजन भी सूबे के काम आएगा।

कुल मिलाकर एक बात साफ है…हमें हमारे मिट्टी के लिए कुछ करना है। राजनीति में हम आयें हैं सिर्फ नेता और मंत्री बनने के लिए नहीं। जनता के बीच काम करना है। आगे जो भी होगा देखा बेहतर ही होगा।

जातिवाद का क्या करेंगे। बिहार में तो जातिवाद हावी है। आगे भी रहेगा ही।

जातिवाद हो या विकासवाद हो। राजनीति पूरी देश का देखेंगे तो इसी तरह की रही है। लेकिन बेहतर काम करने वाले हमेशा सभी जातियों में अपनी जगह बनाते हैं। आप जार्ज फर्नाडिज को ले लीजिए। वो तो इस बिहार के थे भी नहीं लेकिन हमेशा बिहार में राजनीति की। लोगों ने कभी उनको जात के नाम पर वोट नहीं दिया। अगर ऐसा होता तो वो मुजफ्फरपुर जैसी जगह से, नालंदा जैसी जगह से नहीं जीतते। ऐसा सब दिन से रहा है। जातिवाद हो या कुछ और भी पर काम तो करना पड़ेगा तभी जनता के बीच जगह बना सकते हैं।

चलिए शुक्रिया आपका आपने मौर्य न्यूज18 से खास बाचीत की आगे और भी बहुत कुछ जानेंगे अगली कड़ी में तब तक के लिए नमस्कार।

मौर्य न्यूज18 के साथ सीधी बातचीत में भाजपा नेता विधान पार्षद सम्राट चौधरी।
पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।