दुनिया देखी भूमि पूजन… और राम के चरणों में गिरे पीएम ! Maurya News18

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अयोध्या में प्रभु राम आये हैं…गुंजते रहे मधुर धुन

अयोध्या, मौर्य न्यूज18 ।

05 अगस्त 2020 को प्रभु राम के चरणों में पीएम मोदी गिर पड़े। भारत का ये प्रधानमंत्री राम लला मंदिर में प्रभु के सामने पड़ते ही दंडवंत हो गए। पूरी दुनिया इसे लाइव देख रही थी। और पीएम मोदी दंडवत लेटे रहे। ये बहुत ही भावुक दृश्य था। और इसी के साथ ही अयोध्या में राम लला की मंदिर बनने की तैयारी की नींब भी रख दी गई। यहां भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी औऱ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के महान संतों और विद्वतजनों के उपस्थिति में प्रभु राम की जन्म भूमि की पूजा की। ये ऐतिहासिक क्षण लंबे संघर्ष के बाद हासिल हुआ है। जिसे पूरी दुनिया देखती रही। लेकिन आखिर ये क्यों इतना संघर्षपूर्ण रहा। इसे एक-एक प्वाइंट के जरिए समझते हैं।

  • 1528 में राम जन्म भूमि पर मस्जिद बनाई गई थी।
  • • 1853 में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच इस जमीन को लेकर पहली बार विवाद हुआ।
  • • 1859 में अंग्रेजों ने विवाद को ध्यान में रखते हुए पूजा व नमाज के लिए मुसलमानों को अन्दर का हिस्सा और हिन्दुओं को बाहर का हिस्सा उपयोग में लाने को कहा।
  • • 1949 में अन्दर के हिस्से में भगवान राम की मूर्ति रखी गई। तनाव को बढ़ता देख सरकार ने इसके गेट में ताला लगा दिया।
  • • सन् 1986 में जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल को हिंदुओं की पूजा के लिए खोलने का आदेश दिया। मुस्लिम समुदाय ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी गठित की।
  • • सन् 1989 में विश्व हिन्दू परिषद ने विवादित स्थल से सटी जमीन पर राम मंदिर की मुहिम शुरू की।
  • • 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई। परिणामस्वरूप देशव्यापी दंगों में करीब दो हजार लोगों की जानें गईं।
  • • 16 दिसम्बर 1992 को लिब्रहान आयोग गठित किया गया।
  • • लिब्रहान आयोग को 16 मार्च 1993 को यानी तीन महीने में रिपोर्ट देने को कहा गया था, लेकिन आयोग ने रिपोर्ट देने में 17 साल लगाए।
  • • 1993 में केंद्र के इस अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिली।
  • • 1996 में राम जन्मभूमि न्यास ने केंद्र सरकार से यह जमीन मांगी लेकिन मांग ठुकरा दी गयी।

फिर यूं आगे बढ़ा सफर….

2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने निर्णय सुनाया जिसमें विवादित भूमि को रामजन्मभूमि घोषित किया गया। न्यायालय ने बहुमत से निर्णय दिया कि विवादित भूमि जिसे रामजन्मभूमि माना जाता रहा है, उसे हिंदू गुटों को दे दिया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा कि वहाँ से रामलला की प्रतिमा को नहीं हटाया जाएगा। न्यायालय ने यह भी पाया कि चूंकि सीता रसोई और राम चबूतरा आदि कुछ भागों पर निर्मोही अखाड़े का भी कब्ज़ा रहा है इसलिए यह हिस्सा निर्माही अखाड़े के पास ही रहेगा। दो न्यायधीधों ने यह निर्णय भी दिया कि इस भूमि के कुछ भागों पर मुसलमान प्रार्थना करते रहे हैं इसलिए विवादित भूमि का एक तिहाई हिस्सा मुसलमान गुटों दे दिया जाए। लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों ने इस निर्णय को मानने से अस्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

• उच्चतम न्यायालय ने 7 वर्ष बाद निर्णय लिया कि 11 अगस्त 2017 से तीन न्यायधीशों की पीठ इस विवाद की सुनवाई प्रतिदिन करेगी।

• सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि 5 फरवरी 2018 से इस मामले की अंतिम सुनवाई शुरू की जाएगी।

• 9 नवंबर, 2019 को, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले फैसले को हटा दिया और कहा कि भूमि सरकार के कर रिकॉर्ड के अनुसार है। इसने हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए भूमि को एक ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया। इसने सरकार को मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया।

492 वर्ष बाद अंतत: शुभ घड़ी आ ही गई। अयोध्या में भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की 5 सदी से चली आ रही प्रतीक्षा समाप्त होने का ऐतिहासिक पल आ गया है। 5 अगस्त 2020 बुधवार को शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकंड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन के साथ ही औपचारिक रूप से मंदिर निर्माण के कार्य का शुभारंभ हुआ । 

 

हिन्दुओं की मान्यता थी…

हिन्दुओं की मान्यता है कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था और उनके जन्मस्थान पर एक भव्य मन्दिर विराजमान था जिसे मुगल आक्रमणकारी बाबर ने तोड़कर वहाँ एक मस्जिद बना दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में इस स्थान को मुक्त करने एवं वहाँ एक नया मन्दिर बनाने के लिये एक लम्बा आन्दोलन चला। 6 दिसम्बर सन् 1992 को यह विवादित ढ़ांचा गिरा दिया गया और वहाँ श्री राम का एक अस्थायी मन्दिर निर्मित कर दिया गया।

लेकिन 05 अगस्त को मंदिर निर्माण के शुभारंभ के साथ ही करोड़ों रामभक्तों की प्रतीक्षा के साथ ही उनके सारे संशय और असमंजस भी समाप्त हो गये। उन हजारों दिवंगत आत्माओं को शांति मिल गई होगी, जो इस स्थान पर भव्य राममंदिर निर्माण के संकल्प और सपने के साकार होने की प्रतीक्षा करते-करते संसार से चले गए। अब लोगों को इंतजार रहेगा तो सिर्फ उस घड़ी का कि मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद रामलला अपने मूल स्थान पर कब विराजेंगे।

पर, यह इंतजार पहले जैसा नहीं होगा। मंदिर निर्माण की शुरुआत सिर्फ रामभक्तों की ही नहीं, उन शिलाओं और पत्थरों की भी प्रतीक्षा समाप्त कर रही है जो कई दशकों से राममंदिर में अपने ठौर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख मोहन भागवत, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास समेत तमाम हस्तियां। भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी करीब तीन घंटे तक रामनगरी में रहे।

आपको बता दें कि भूमि पूजन के बाद अयोध्या नगरी में सरयू नदी के किनारे लाखों दीप प्रज्जवलित हुए । पूरा अयोध्या दीपों से जगमगा उठा। मंदिर परिसर दीप की रौशनी से नहा गई। इस भव्य मनोरम दृश्य को पूरी दनिया ने देखा और महसूस किया कि देश के करोड़ो की आबादी जो सनतन धर्म में आस्था रखी है। उसके लिए ये कितना ऐतिहासिक औऱ गौरवान्वित करने वाला क्षण था। कह सकते हैं कि इस कोरोना संकट में पूरी दुनिया ने प्रभु राम के प्रति असीम आस्था देखी।