महाराष्ट्र पुलिस बोलती रही- मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है…, बिहार के डीजीपी ने दिया करारा जवाब ! Maurya News18

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मैं हूं गुप्तेश्वर पांडेय, कानून समझता हूं, कोई सिखाने की कोशिश ना करे।

बोले – मैं सुशांत केस में न्याय के लिए चिल्लाता रहूंगा, कोई मुझे क्या कहता है मैं इसकी परवाह नहीं करता

महाराष्ट्र डीजी हमारा फोन तक नहीं रिसीव करते थे, मैसेज तक का जवाब नहीं दिया  

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।

बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय। जोर-जोर से चिल्लाते हैं। न्याय चाहिए। इंसाफ चाहिए। नहीं दोगे तो लड़कर लूंगा। भिड़कर लूंगा। इंसाफ दिलाने के लिए चिल्लाता रहूंगा। सुशांत सिंह राजपूत केस में पांडेयजी का पंगा। देश देख चुका है । न्याय के लिए पंगा ले लिया महाराष्ट्र पुलिस से। और फिर दो राज्यों की पुलिस भिड़ गई। एक तरफ बिहार के डीजीपी तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र के डीजीपी। इस बीच पब्लिक, पुलिस औऱ सरकार। औऱ इन सबके बीच फंसा रहा कानून। महाराष्ट्र पुलिस कहती रही….मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है। और, बिहार पुलिस कहती रही…काम है ना। देश का कानून है…”यहां तेरे मेरे अंगने में “… वाला फार्मूला नहीं चलेगा। पंगा इतना बढ़ गया कि सुशांत के परिवार वाले आगे आए। सीबीआई जांच की मांग कर दी। सरकार की हिम्मत बढ़ी और सीबीआई जांच की सिफारिस कर दी। फिर भी महाराष्ट्र पुलिस अड़ी रही। मामला कोर्ट पहुंचा औऱ कोर्ट ने कह दिया..बिहार पुलिस सही है। केस सीबीआई ही देखेगी।

कोर्ट का इतना कहना…बिहार के डीजीपी का हौसला बुलंद कर गया। सीना 56 इंच वाला किए । ताल ठोक के अपनी बातें मीडिया में रख रहे हैं। कह सकते इन दिनों काफी फॉर्म में हैं।

पूरे देश में इनकी चर्चा हो रही है। सुशांत सिंह राजपूत केस के मामले में हर कोई जानना चाहता है कि आखिर कैसे पटखनी दी महाराष्ट्र पुलिस को। मौर्य न्यूज18 ने खास बातचीत की औऱ जानना चाहा कि आखिर महाराष्ट्र पुलिस कहां मात खा गई।

नमस्कार।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय जी आपका मौर्य न्यूज18 में स्वागत है।

महाराष्ट्र पुलिस कहां मात खा गई।

कहने लगे – मात खाने, खिलाने की बात नहीं है। ये है बेवजह का इश्यू बनाना। या फिर कोई है जिसे महाराष्ट्र पुलिस बचाना चाह रही है। मजबूरी क्या है। ये मैं नहीं कह सकता लेकिन जो महाराष्ट्र पुलिस का रवैया था, वो सही नहीं था। वो अहम में गलती दर गलती करती रही। उसे लगा कि पहले की तरह ही इस घटना में शोर-शराबा होगा और बातें दब जाएगी। लेकिन मैंने ऐसा होने नहीं दिया। हमने सुशांत के पिता की आंखों में जो दर्द पढ़ा। पिता को न्याय दिलाने की ठान ली। फिर बिहार में केस हुआ। बिहार पुलिस महाराष्ट्र गई। औऱ फिर जो हुआ पूरा देश देखा। मैं तो बस अपने पर डटा रहा। बिहार पुलिस के अडिग रहने ने ही महाराष्ट्र पुलिस की हवा निकाल दी।

आपने महाराष्ट्र पुलिस को खरी-खोटी भी सुना दी। ऐसा पुलिस-पुलिस के बीच होता है क्या।

बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ।
महाराष्ट्र के डीजीपी सुबोध जायसवाल ।

डीजीपी कहने लगे…होता तो नहीं है। लेकिन मैं क्या करता।  महाराष्ट्र पुलिस बिहार पुलिस की कार्रवाई को गैरकानूनी बता रही थी । लेकिन कोर्ट के निर्णय के बाद अब तो सच्चाई पर मुहर लग गई।

कहने लगे कि मैं कानून समझता हूं। कोई मुझे कानून सीखाने की कोशिश ना करे। बिना किसी कानून की जानकारी के तो यहां तक नहीं पहुंच गया। महाराष्ट्र के डीजी से हमने सुशांत सिंह केस के बारे में फोन से बात करने की कोशिश की लेकिन फोन नहीं उठाया। फिर मैसेज किया। लेकिन जवाब नहीं दिया।

हमने कहा चलो कोई बात नहीं…बड़े आदमी हैं…बड़े राज्य के डीजी है व्यस्त रहते होंगे। फिर हमने बिहार के गृह सचिव के जरिए महाराष्ट्र के गृह सचिव को संपर्क साधा लेकिन यहां भी कोई रिस्पॉंश नहीं मिला। अब इसे क्या समझा जाए। यही ना कि कुछ तो गड़बड़ है।

यहीं से शक की सुई घुमी। कि क्या कारण हो सकता है। महाराष्ट्र पुलिस और गृह सचिव तक इतने गंभीर मामले का संज्ञान नहीं ले रहे। ऐसा होता है क्या। और उपर से बिहार पुलिस के साथ गलत बर्ताव। आईपीएस अधिकारी को कोरेन्टीन कर देना, जांच को गई पुलिस कर्मी को कैदी वैन में बिठाकर गिरफ्तार कर ले जाना। पुलिस चाहे किसी भी स्टेट की हो कानून का सहयोग करना हम सबका धर्म है।

न्याय की लड़ाई छिड़ गई थी, सो, जो हुआ पूरा देश देखा।

आप सुशांत सिंह राजपूत का केस महाराष्ट्र में दर्ज करोगे नहीं। पीड़ित परिवार की कुछ सुनोगे नहीं। औऱ जिसको नामजद किया जा रहा है उसको बचाने की कोशिश में जुटे रहोगे। तो ऐसे कैसे काम चलेगा। इसलिए पटना के राजीव नगर थाने में केस दर्ज किया गया और फिर महाराष्ट्र पुलिस की सारी करतूत सामने आई। मुझे गाली देने से तो कुछ होने वाला नहीं। और मैं साफ कहता हूं कि मुझे कोई कुछ भी कहे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं न्याय के लिए बोलता रहूंगा…चिल्लाता रहूंगा।

चलते-चलते एक बात औऱ कह दूं …अभी तो सिर्फ सीबीआई जांच की मांग पूरी हुई । कोर्ट से न्याय मिला। लेकिन मैं यहीं थमने वाला नहीं । ये मुहिम तब तक जारी रहेगी जब तक की सुशांत के परिवार को न्याय ना मिल जाए । और इस घटना के पीछे का सच क्या है …ये सारा देश जान ले। तब तक लड़ता रहूंगा । कानून के जरिए। आवाज बुलंद करता रहूंगा। मुझे पूरा विश्वास है सच सामने आकर रहेगा।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।