आपको पता है, नई शिक्षा नीति तैयार कैसी हुई ! चलिए समझते हैं..! Maurya News18

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GUEST REPORT

नई नीति, नई बात एक नजर में

नई दिल्ली, मौर्य न्यूज18

अपने भारत देश में 30 साल बाद नई शिक्षा नीति आई है। इतने सालों बाद इसकी जरूरत क्यों आन पड़ी। आखिर क्या कुछ है इसमें। किसने और कैसे तैयार की। देश के हर नागरिकों को ये समझना जरूरी है। इसलिए मौर्य न्यूज18 नई शिक्षा नीति को आपके सामने क्रमवद्द तरीकों से रखने जा रहा है। जिसकी पहली कड़ी आपके सामने है…इस कड़ी में आप समझेंगे कि आखिर नई शिक्षा नीति कैसे बनी। पढ़िए देश के वरिष्ठ पत्रकार और मौर्य न्यूज18 के अतिथि संपादक रामनाथ राजेश की खास रिपोर्ट।

इस नीति में विशेष क्या है …

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर के. कस्तूरीरंगन अपनी संस्तुतियों से क्या भारतीय शिक्षा व्यवस्था को भी वह ऊंचाई दे पाएंगे  जो इसरो के उपग्रहों ने हासिल कर दुनिया में अपने नाम का डंका बजाया  है. करीब 30 साल के बाद भारत ने नई शिक्षा नीति अपनाई है. डॉक्टर कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने इस शिक्षा नीति को देश भर  के विभिन्न वर्गों से लंबे समय तक विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया है जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है. इस शिक्षा नीति की जो सबसे बड़ी विशेषता सामने आई है वह  यह है कि यह नीति सिर्फ वर्तमान की नहीं आने वाले समय की जरूरत को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है.

एक बात तो स्पष्ट है कि इस नीति में देश की चरमराई शिक्षा के ढांचे को दुरुस्त करने की चाहत स्पष्ट रूप से दिखती है.

सरकार क्या चाहती है…

सरकार वर्ष 2035 तक यह चाहती  है कि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रहे. इस लक्ष्य को पाने के लिए सकल नामांकन अनुपात को 50 फ़ीसद तक बढ़ाना चाहती है.

 नई शिक्षा नीति में कुल आठ क्षेत्र की नीतियों पर ज्यादा जोर दिया गया है. ये हैं-

1. बुनियादी शिक्षा और प्राथमिक स्कूल शिक्षा

2. स्कूल का आधारभूत ढांचा और संसाधन

3. छात्रों का समग्र विकास

4. समावेशिता

5. आकलन

6. पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा

‌7. शिक्षक भर्ती/शिक्षक प्रशिक्षण

8. सरकारी विभागों/निकायों/संस्थानों की भूमिका

नई शिक्षा नीति निश्चित रूप से भारतीय शिक्षा के वर्तमान स्वरूप में बदलाव लाने वाली है. शर्त यह है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक शिक्षा के लिए संसाधनों का इंतजाम करें.

सरकार का शिक्षा पर खर्च

पिछले 7-8 वर्षों से देखा जा रहा है कि शिक्षा पर खर्च में भी दिनों दिन कटौती हो रही है. सरकार का अभी शिक्षा पर कुल खर्च देश के सकल घरेलू उत्पाद का 4.46 परसेंट है. इस नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए इसे बढ़ाकर सरकार 6 परसेंट करने की तैयारी कर रही है.

गेस्ट परिचय :

आपने रिपोर्ट लिखी है ।

रामनाथ राजेश

आप वरिष्ठ पत्रकार हैं और लेखक भी। आप देश के विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों में संपादकीय विभाग में उच्च पदों पर योगदान देते रहे हैं।