राजस्थान में “जोहार” के नाम पर क्या चल रहा खेल ! Maurya News18

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धर्म परिवर्तन और वोट बैंक के सौदागर हैं हावी

योगी प्रकाशनाथ बोले- आदिवासी-वनवासी व दलित समुदाय के लोगों को बरगलाया जा रहा

इस्लामिक गुरू कादरी बोले – देश की धार्मिक औऱ सांस्कृतिक विरासत के साथ खिलवाड़ करना ठीक नहीं

नई दिल्ली, मौर्य न्यूज18 ।

जोहार का शाब्दिक विरोध नहीं होना चाहिए बल्कि सांस्कृतिक व धार्मिक विरोध हो तो बात समझ में आती है : योगी प्रकाशनाथ

जोहार शब्द का शब्दिक विरोध ना होकर, सांस्कृतिक और धार्मिक विरोध होना चाहिए। लोगों को पता होना चाहिए जोहार शब्द का सर्व प्रथम इस्तेमाल सनातन हिन्दू धर्म ग्रंथ रामचरित मानस में आदिवासी-वनवासी के लिए हुआ है। प्रमाणिक है कि आदिवासी व वनवासी जो पूर्णत: सनातनी हिन्दू थे, हैं और रहेंगे। लेकिन दक्षिणी राजस्थान सहित देश के कुछ हिस्सों में धर्म औऱ राजनीति के चंद ठेकेदार आदिवासी व वनवासियों को सनातनी हिन्दू धर्म का नहीं होना बता रहे हैं। आदिवासियों-वनवासियों को इस तरह की बातें कहकर, उन्हें समझा-बुझाकर बरगला रहे हैं। इसलिए जो लोग आदिवासी व वनवासियों को सनातनी हिन्दू ना होने की बात करते हैं वैसे असामाजिक तत्वों का विरोध होना चाहिए । इतिहास साक्षी रहा है कि सनातनिक हिन्दू धर्मावलंबियों को जाति के नाम पर बांटकर मुगल और अग्रेज शासकों ने भी राज किया था। रूद्रवाहिनी प्रतिबद्ध है समस्त सनातन हिन्दू धर्म को जाति बंधन से मुक्त कर सनानत धर्म को मजबूत करने के लिए। ताकि फिर कोई फिरकापस्ती ताकत इस राष्ट्र की अखंडता को तोड़ ना सके। रूद्रवाहिनी का संकल्प अखंड भारत, सशक्त भारत, एकत्र भारत।

संत योगी प्रकाशनाथ कहते हैं कि

राजस्थान में इन दिनों इन सब मुद्दों को लेकर काफी संवेदनशील स्थिति बनी हुई है। भावनाएं आहत हो रही है। इसलिए यहां एक बार फिर स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है कि मैं उन लोगों का विरोध कर रहा हूं जो ये कहते हैं कि आदिवासी-वनवासी व दलित समुदाय के लोग हिन्दू नहीं हैं। स्थिति ये है कि अब तो ऐसे लोग एसटी, एससी, ओबीसी को भी हिन्दू नहीं होने की बात करने लगे हैं। जो बिल्कुल गलत है। इतिहास साक्षी है इन बातों का कि ये सब के सब सनातनी हिन्दू हैं औऱ रहेंगे। योगी कहते हैं कि मैं परमात्मा से यही प्रार्थना करता हूं कि सभी लोग आपसी सौहार्द बनाए रखें और भाईचारे के साथ रहें।

आखिर ये बातें योगी प्रकाशनाथ को क्यों कहनी पड़ रही है इसे समझना होगा।

आदिवासी व दलित के नाम पर खेल फाइल फोटो ।

दरअसल, इन दिनों हो क्या रहा है….

तोड़ो, बांटो, प्रलोभन दो, वोट बैंक बनाओ, धर्म बदलवाओ, दौलत लुटाओ, अपना बनाओ ये सब खेल। जोहार, दलित, गरीब-गुरबा, आदिवासी के नाम पर होने लगे। ये होने लगे कि तू “जोहार” बोलने वाला, जो आदिवासी मूल का, जो दलित है, उसे बरगलाओ, उसे प्रलोभन दो और धर्म बदलवा दो, वोट बैंक के लिए उसे उल्टी-सीधी पाठ पढ़ा दो। ऐसा करने वाले को आप क्या कहेंगे। ऐसा करने वाले आखिर क्या कर रहें हैं। आखिर इसका परिणाम क्या होगा। देश के कई हिस्सों से जो सूचना है वो सही नहीं है।

कह सकते हैं…  

देश में वोट बैंक की राजनीति ।फाइल फोटो ।

अशिक्षा जो ना कराए। इन दिनों जोहार शब्द के नाम पर देश के कई हिस्सों में खतरनाक खेल चल रहा है। धर्म के ठेकेदार और राजनीति करने वाले इसमें काफी महीन तरीके से खेल रहे हैं। राजस्थान के दक्षिण इलाके से लेकर छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित विभिन्न आदिवासी इलाकों में ये सब देखा जा सकता है। कह सकते हैं इन इलाकों में दबे पांव से जो चल रहा है वो काफी खतरनाक मोड़ ले सकता है। राष्ट्र के अंदर एकता और अखंडता को सर्वोपरी मानने वाले इस खेल को लेकर काफी चिंतित हैं। लेकिन राजनीति औऱ धर्मिक खेल खेलने वाले वोट बैंक के सौदागर इस तरह की गंदगी फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। मौर्य न्यूज18 ने इस संबंध में विभिन्न धर्म के लोगों व प्रबुद्ध जनों से बातचीत की और जानने की कोशिश की कि आखिर जोहार शब्द औऱ आदिवासी के नाम पर क्या कुछ चल रहा है, जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

सबसे पहले जानते हैं आखिर जोहार शब्द के मायने क्या हैं..फिर समझेंगे इस नाम पर पूरे खेल को…।

जानकारी के अनुसार सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथ रामचरित मानस में एक शब्द आया है “जोहार” । जोहार का मतलब “जय” यानि “सबकी जय” से है। विद्वान मानते हैं कि जोहार काफी साकारात्मक शब्द है। इसकी उत्पत्ति रामचरित्र मानस में तुलसीदास ने हिन्दू सनातन धर्म के लोगों के लिए किया । तब से जोहार शब्द का इस्तेमाल भारतवर्ष में सनातन धर्म के लोग करते रहे हैं। इसका प्रचलन आदिवासी समुदाय के लोगों के बीच होता रहा है। जो पूर्णत सनातनी हिन्दू हैं और बड़े गौरव के साथ जोहार शब्द का इस्तेमाल करते हैं ।

इसे यूं समझिए.. जैसे अपने देश में सनातन धर्म के लोग …किसी से मिलने जुलने पर एक-दूसरे को – राम-राम कहते हैं या फिर । नमस्कार । प्रणाम । यानि स्वागत में, आदर में, भावनाओं को व्यक्त करने में… आदिवासी समुदाय के लोग जोहार-जोहार कहते हैं। बहुत पवित्र तरीके से इसका इस्तेमाल होता है आदिवासियों के बीच, वनवासियों के बीच। इतिहास भी बताता है कि भारतवर्ष के हर भूखंड में रहने वाले सनातन धर्म से जुड़े लोग जैसे-जैसे विकसित होते गए…अपने हिसाब से शब्दों का इस्तेमाल करते गए। लेकिन आदिवासी व वनवासी हिन्दू जोहार शब्द को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान भी जुड़ी हुई है। ऐसा आदिवासी व वनवासी समुदाय के लोग भी मानते हैं।

रूद्रवाहिनी संघ के अध्यक्ष योगी प्रकाशनाथ ।

इस संबंध में राजस्थान में रह रहे सनातन धर्म के रूद्रवाहिनी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी प्रकाशनाथ कहते हैं- हमारा देश लोकतांत्रिक देश है और धर्मनिरपेक्ष जैसे सिद्दांतों व विचारों को अपनाता रहा है। अतिथि देवो भव औऱ विश्व का कल्याण हो, विश्व की जय हो की भावनाओं के साथ आगे बढ़ता रहा है। यहां हर धर्म, पंथ और मजहब के लोगों का उतना ही सम्मान है जितना मूल रूप से हिन्दू या सनातनी धर्मावलंबियों की।

ऐसे में यदि कोई अपने देश में जोहार कहने वाले आदिवासी, दलित समुदाय के लोगों को सनातन धर्म से अलग बताकर उसका माइंड वास करे। उसे अलग थलग करे तो इसे आप क्या कहेंगे। ऐसा करने वाले को आप क्या कहेंगे। इस मिशन में बड़ी तादाद में बदलाव आप राजस्थान के दक्षिण इलाकों में देख सकते हैं। जो कतई सही नहीं है।

एक तरफ हम बात करते हैं देश की एकता और अखंडता की औऱ दूसरी तरफ यहां लोग अपने धर्म के प्रचार-प्रसार के बाहने, राजनीति करने वाले वोट बैंक तैयार करने वास्ते गंदा खेल खेल रहे हैं।

योगी प्रकाशनाथ कहते हैं कि रूद्रवाहिनी संघ इन सब चीजों को गंभीरता से ले रहा है। गरीब-गुरबों को रूपये का प्रलोभन देकर, अशिक्षत लोगों को गलत-सलत जानकारी देकर ऐसा किया जा रहा है। देश के प्रशासकों को, यहां के शासकों को इस मिशन में लगे सौदागरों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। कहते हैं, कोई भी हो, देश के संविधान औऱ कानून के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। रूद्रवाहिनी ये मानता है कि देश की खातिर ऐसी घिनौनी ताकतों के खिलाफ आवाज बुलंद होनी चाहिए । इसमें हर सच्चे धर्मावलंबियों को आगे आना चाहिए। एक दूसरे से मिलजुल कर रहना चाहिए।

योगी कहते हैं कि दक्षिणी राजस्थान के कुशलगढ़ इलाके में 40 हजार से अधिक ऐसे आदिवासियों को सनातन धर्म से अलग बता कर उनका धर्मिक रूपांतरण तक कर दिया गया है।

वामपंथ के नाम पर राजनीति करने वाले, इस्लाम और मिशनरी से जुड़े लोग धार्मिक प्रचार-प्रसार के नाम पर ये सब खेल कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इन धर्मों से जुड़े सभी लोग ऐसा कर रहे वल्कि कुछ मुट्ठीभर सौदागर हैं जो ये सब करके मोटी कमाई कर रहे हैं। इसे समझना बहुत जरूरी है।

योगी प्रकाशनाथ की माने तो ये सब काफी महीन तरीके से चल रहा है। ताकि धर्म परिवर्तन भी आसानी से करा लिया जाए और वोट बैंक भी तैयार हो जाए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म से जुड़े होने के कारण हमारा धर्म है कि अपने लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करूं। और मैं संवैधानिक तरीके से अपने काम में लगा हूं। मुझे पूरा भरोसा है कि देश की मिट्टी अपने संतानों को राह भटकने से रोकेगी। उन्हें सदबुद्दि देगी। और जो ऐसे काम में लगे हैं उन पापियों का नाश करेगी।

मौर्य न्यूज18 के साथ इस्लामिक गुरू हाजी सैयद शाह तनवीर अशरफ कादरी । मौर्य न्यूज18 ।

वहीं बिहार-झारखंड के इस्लामिक धर्म गुरू काको के हाजी सैयद शाह तनवीर अशरफ कादरी कहते हैं कि देश में हर धर्म के लोग एकता और सम्मान के साथ रहते हैं। ऐसे में यदि कोई दलित या आदिवासियों- वनवासियों को बरगला कर धर्म परिवर्तन कराते हैं या वोट की राजनीति के लिए ये सब खेल चल रहा है तो सही नहीं है। वो चाहे दक्षिणी राजस्थान का इलाका हो या फिर बिहार-झारखंड, छत्तीसगढ़ हो, देश के किसी भी इलाके में धर्म परिवर्तन का कानून है, गैरकानूनी काम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं अपने देश के आदिवासी-वनवासी औऱ दलित समुदाय के लोगों से भी अपील करना चाहूंगा कि वो अपने पौराणिक सनातन हिन्दू धर्म के साथ जुड़े रहें, ऐसे सौदागरों के झांसे में ना आएं जो अपको आपके मूल धर्म से अलग करना चाहते हैं। धार्मिक औऱ सांस्कृतिक विरासत बनी रहनी चाहिए। इस्लामिक गुरू ने कहा कि सनातन धर्म के लोग हमेशा से हर धर्म का सम्मान करते रहे हैं। इस तरह के किसी भी मिशन को कभी सही नहीं ठहराया जा सकता है। राजनीति करने वाले वोट बैंक के लिए करें या धर्म के ठेकेदार धर्म फैलाने के लिए करें। दोनों ही चीज से देश को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर देश की एकता औऱ अखंडता पर आंच नहीं आनी चाहिए।  

नई दिल्ली से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट।