मुंगेर गोलीकांड : तुमको ना भूल पाएंगे…। Maurya News18

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दुर्गा मां का विसर्जन, युवक की मौत और गोलीकांड…बिहार में कितना बहार है…।

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।

बिहार का मुंगेर याद है ना। 26 तारीख की रात भी याद ही होगी। मां दुर्गा का विसर्जन और उसमें मौजूद मां के भक्त। गोली खा गए…। ढ़ेर हो गए। मौत हो गई। कई घायल हो गए। पुलिस की बर्बरता। लाठियों से पिटाई। आंखों में आंसू। बहता खून। चीत्कारने की आवाज। बेटा खो कर चीत्कारती मां। फफक कर रोती मां-बहनें । गम में डूबा बिहार। यही अपना बिहार है। कितना बहार है। कोरोना से बचिए। रैली में जुटिए। वोट देने आइए…। क्योंकि बिहार में बहार है…एक ही नेता है जो 15 वर्षों से बहार लाने की औकात रखता है….। आपको बताया भी जा रहा है कि आगे भी वही बहार लाने की औकात रखता है। लेकिन आप विसर्जन करने चले हैं तो नरसंहार के लिए तैयार रहिए।

मुंगेर की पुलिस कप्तान लिपि सिंह…जिसे मुंगेर कांड का दोषी माना जा रहा है। जनता एसपी की कार्रवाई से गुस्से में है। लोगों को इंतजार है कार्रवाई का ।
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आंसू बहाइए…चीत्कार लगाइए…खून बहाइए…लहुलूहान होइए….मौत के शिकार होइए…जिदगी बर्बाद कर लीजिए..जीने का कोई हक नहीं…लाठियां बरसेंगी लाठियां…क्योंकि हम है तो बिहार है….बिहार में एक ही है जिससे बहार है।

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सुना होगा आपने गाये जाते हैं..जिंदगी मौत ना बन जाए संभालों यारो….रो रहा है तेरा वतन…संभालों यारो….। लेकिन यहां हो क्या रहा है…।

मुंगेर की घटना चाहे जिस वजह से भी हुई । क्या कोई कहेगा कि सही है। क्या कोई इस घटना को स्वीकार करेगा। क्या कोई भी धर्म वाला इंसान इसे बर्दास्त करेगा। चलो, एक बात तो सुनने को मिलती रहती थी…कि फलाने धर्म वाले ने कुछ कर दिया तो बवाल हो गया…बहाना भी मिल जाता था और बेहतर कारण भी..फिर तो मार-काट हो या खून की नदियां बह जाए…खेमे वाजी शुरू हो जाती थी….। लेकिन ये खादी और खाकी बर्दी वालों…ये क्या किया तुमने….हम भूल गए हर वो बात…मगर तेरा व्यवहार नहीं भूले।

जनता-जनार्दन ही भगवान होते हैं। वोट मांगने के टाइम हाथ जोड़ते हो…पांव पकड़ते हो…मंच से झूठे-सच्चे वायदों की हुंकार भरते हो…अब तेरी बोलती कहा गई…मौत पर भी तुझे शर्म नहीं आई। जांच करोगे…वर्दी वालों जांच करोगे। खाकी वाले…खादी वाले तेरी ही तो बहार है…ये बिहार है…तेरे गद्दी पर होना ना होना ये विसर्जन भी तय कर सकता है….तुम भूलाने की कोशिश में हो…घटना को भूल जानाने की कोशिश में हो…तेरे मंच से एक चूं नहीं निकल रही…तेरा ट्वीट क्या हुआ…तेरा सोशल मीडिया क्या हुआ…रक्त रंजित जनता के बीच जाकर फिर भी वोट मांग रहे हो..शर्म नहीं आती…कई सवाल हैं…जो शायद आपके..हमारे…या खुद यूं कहें कि उन खाकी औऱ खादी वर्दी वालों के अंदर भी चल रही होगी लेकिन आवाज कौन बुलंद करेगा। न्याय कौन दिलाएगा…क्या ऐसी घटना को पचा पाना मुमकीन है।

मुंगेर एसपी लिपी सिंह । जिसके सस्पेंड करने की मांग उठ रही है।

सवाल कई हैं…क्योंकि ये बिहार है..यहां कई वर्षो से बहार है….आगे भी बहार लाने की आरजू मिन्नत की जा रही है..करिए बढ़िया है…बेशर्मी का आंचल ओढ़कर करते रहिए..बिहार में यूं ही खून की नदियां बहाते रहिए…बहार लाते रहिए…मतदान जरूर करिए…। जनता चाहे तो एक-एक वोट से मुंगेर की खून का हिसाब ले सकती है। लेकिन इस ताकत का बंटवारा भी वो जानते हैं…आगे पीछे जो भी हैं…सब एक हैं…सिर्फ कहीं फूट है…मतभेद है तो वो जनता में ही है…कोई इस जाति की होने की वजह से…तो कोई उस जाति की होने की वजह से…जात खाए जा रही है…खाकी अपनी चमकाए जा रही है। चमकाइए…चमकाइए…। आइए…बिहार में यूं ही बहार लाइए। लेकिन घटना जिस तरह से घटी है….चलते-चलते यही कहूंगा…तुमको ना भूल पाएंगे।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन।