परबत्ता न्यूज ! खगड़िया जिले की जनता वोट देकर रामविलासजी को श्रद्दांजलि देगी -बाबूलाल शौर्य ! Maurya News18

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खास मुलाकात – आदित्य कुमार शौर्य उर्फ बाबूलाल शौर्य, लोजपा प्रत्याशी, परबत्ता विधानसभा क्षेत्र, खगड़िया ।

नयन, परबत्ता, खगड़िया, मौर्य न्यूज18 ।

आदित्य कुमार शौर्य…। बाबूलाल शौर्य । बाबूलाल। सब एक ही नाम है। परबत्ता विधानसभा क्षेत्र में कमल खिला नहीं तो….झोपड़ी के हो लिए। झोपड़ी में ही कमल खिलाने की फिराक में मैदान में कूदे हैं। लोजपा के चिराग का सहारा है। छुपे रूस्तम की तरह भाजपाई भी झोपड़ी में शरण ले बाबूलाल, इस फिराक में दिन-रात लगे हैं। जिसमें बहुत हद तक बिना कहे सुने भाजपाई मूड बनाते भी दिख रहे हैं। वैसे,  जहां तक सवाल है जातिए समीकरण का तो ये इलाका सवर्ण बहुल्य है…। खासकर भूमिहार जातियों के मतो पर काफी निर्भर है…और यहां  मुख्य मुकाबले में जो उम्मीदवार हैं वो भी इसी जाति से आते हैं…। स्वयं बाबूलाल भी।

आशीर्वाद यहां से भी : बुजुर्गों की चरण में बाबूलाल शौर्य। मौर्य न्यूज18 ।

इसलिए भरोसा है कि भूमिहार जाति का वोट भी बंटकर झोपड़ी में शरण लेगा। बांकी भाजपाई वोटर भी खगड़िया जिले में एक भी सीट भाजपा को नहीं दिए जाने से पहले से ही खफा हैं…सो, भाजपा को टिकट नहीं मिला तो क्या हुआ…लोजपा से उम्मीदवार तो अपना भाजपाई बाबूलाल हैं ना, सो,…चलो चलें उसी को मदद करने वाली सोंच अंदर ही अंदर से बाबूलाल के चेहरे को कमल की तरह खिलाए हुए है। जो बाबूलाल के सामने प्रतिद्वंदी सुरवीर हैं, उनकी मुंह थोड़ी लटकी जरूर है…वो खिसियाते भी हैं..कि ऐसा कैसे होगा…नहीं होने देंगे। और पूरी ताकत झोंक रखी है उसने भी।

और बाबूलाल हैं इस भरोसे में कि जनता के बीच काफी कुछ धरातल पर काम पहले से किया हुआ है। जिसकी वजह से जनता साथ देगी। हर जातिवर्ग की जनता बाबूलाल के बारे में अलग राय रखती है।

मसलन, बाबूलाल के बारे में कहने वाले कहते हैं कि कोई भी समस्या हो….पुल-पुलिया…सड़क- नाली-गली…किसी योजना में काम नहीं हो रहा हो…कहीं किसी तरह का क्षेत्र में अड़ंगा लग रहा हो,…जनता सीधे कूदते-फांदते आदित्य कुमार शौर्य उर्फ बाबूलाल के पास पहुंचती है..कहती है…ये देखिए ऐसी-ऐसी समस्या है…इस-इस तरह की समस्या है..कुछ करिए…औऱ सुनते ही बाबूलाल धरना-प्रदर्शन…आंदोलन में कूद जाते हैं…और जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता.. तब-तक डटे रहते हैं…बाबूलाल की ऐसी वाली छवि जनता के बीच काफी फेमस है। जनता जानती परबत्ता ही नहीं पूरे खगड़िया जिले में..आंदोलनकारी…क्रांतिकारी…मतलब बाबूलाल शौर्य।

पुलिस की लाठी खानी हो…गोली खानी हो…जेल जाना हो…तो उसके लिए बाबूलाल तैयार बैठे रहते हैं…जनता के बीच इस तरह की छवि लेकर चुनावी अखाड़े में पहलीबार उतरने वाले बाबूलाल…परबत्ता की जनता को झोपड़ीमय करने में पूरी ताकत झोंक ऱखे हैं।

जनता जनार्दन से बाबूलाल के बारे में इस तरह की जानकारी मिलने के बाद मौर्य न्यूज18 परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से लोजपा प्रत्याशी आदित्य कुमार शौर्य से खास बातचीत की औऱ जानना चाहा कि क्या है चुनावी अखाड़े का हाल। और भी बहुत कुछ जिसका जवाब क्या मिला आप भी जानिए…।

मौर्य न्यूज18 के साथ खासबातचीत करते परबत्ता से लोजपा प्रत्याशी आदित्य कुमार शौर्य उर्फ बाबूलाल शौर्य ।

आदित्य कुमार शौर्य आप लोग बाबूलाल शौर्य के नाम से ज्यादा फेमस हैं। भाजपा जैसे संगठन में काम कर चुके हैं। क्या लगता है इसका फायदा आपको मिलेगा।

बिल्कुल मिलेगा। क्यों नहीं इसका फायदा मिले…आप ही बताइए। भाजपा इस जिले में किसी भी कार्यकर्ता के लिए एक भी सीट नहीं दे पाई। और जदयू उसी घिसे-पीटे उम्मीदवारों को टिकट दे दी। कई जगहों पर ऐसा भी देखा गया कि भाजपा के ही कार्यकर्ता को जदयू सीट होने पर उसे जदयू से टिकट दिया गया। बगल के बेगूसराय के साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वहां जदयू के टिकट पर भाजपा के कार्यकर्ता लड़ रहे हैं। ऐसा तो भाजपा खगड़िया जिले में भी कर सकती थी।

परबत्ता में आयोजित चुनावी जनसभा में लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान के साथ लोजपा प्रत्याशी आदित्य कुमार शौर्य उर्फ बाबूलाल शौर्य व अन्य लोजपा नेता। मौर्य न्यूज18
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जब आप एनडीए को जीताना चाहते हैं तो कुछ तो ऐसा करना था…लेकिन कुछ नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में जब लोजपा ने मुझ जैसे जुझारू युवा लीडर को अपना उम्मीदवार बनाने का फैसला किया तो इसमें गलत क्या है। ये तो खगड़िया जिला के भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए भी खुशी की बात है। लोजपा कह भी रही है कि हम आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हैं…भाजपा के साथ हैं। तो, भाजपा कार्यकर्ता बंधु ये बात समझ रहे हैं कि लोजपा ही भाजपा है। खगड़िया जिले में पूरी तरह से सभी चारों विधानसभा सीट लोजपा के खाते में जाना तय है। परबत्ता की जनता ने तो अपने विधायक का गुस्सा झोपड़ी पर वोट देकर उतारने का पूरी तरह से मन बना लिया है। इसमें अब कोई परिवर्तन नहीं होने वाला है।

आप काफी आश्वस्त दिख रहे हैं…आपके वोट की मजबूती का आधार क्या है।

देखिए। आश्वस्त मुझसे ज्यादा परबत्ता की जनता है। लोजपा से मुझे टिकट देने का जैसे ही फैसला किया गया। जनता के बीच खुशी की लहर दौर गई। सुख-दुख में। हर समस्याओं में मैं हमेशा जनता-जनार्दन के साथ रहा हूं। जनता को ये बताने की जरूरत नहीं है कि बाबूलाल कौन है। और क्या कर सकता है। हर वर्ग में आप जाकर सर्वे कर लीजिए। आपको हर वर्ग समुदाय के लोग कहेंगे कि बाबूलाल से बेहतर परबत्ता का विधायक कोई हो ही नहीं सकता। दूसरी और जो दावा ठोक रहे हैं उनके कारणनामे को भी यहां की जनता वर्षों से देख रही है। उससे उबरने का सही वक्त जनता के सामने मौजूद है। कोई गलती नहीं करने वाली है जनता । हम तो जनता के बीच प्यार से जाते हैं। उनके बीच उठते-बैठते हैं। सम्मान भी मिलता है और जनता खुद बाबूलाल बनकर पब्लिक में वोट मांगने जा रही है। क्या आप बता सकते हैं कि ऐसा किसी और उम्मीदवार के साथ हो रहा है।

क्या आपको लगता है कि लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान की रैली से भी कुछ फर्क पड़ा है।

कहते हैं…बिल्कुल। आपको ये समझना होगा कि लोजपा सुप्रीमो कुछ पढ़े-लिखे हैं। बीटेक इंजीनियर हैं और वो युवा नेताओं में सबसे ज्यादा समझदार और परिपक्व हैं। वो दो टर्म से सांसद चुने गए हैं…रामविलास पासवान जैसे दलित मसीहा के पुत्र होने के नाते उनकी छत्र-छाया में राजनीति सीखी है। एनडीए में केन्द्र सरकार के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले नेता भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष औऱ वर्तमान में ग़ृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राजनीति सीखी है…ऐसी हस्तियों के बीच रख कर जो युवा नेता राजनीति करता हो…आपको क्या लगता है कि वो कच्चा खिलाड़ी है।

वो काफी परिपक्व हैं …और अकेले दम पर इस लड़ाई को चुनौती पूर्ण बनाएं हुए हैं। आपको ये भी नहीं भूलना चाहिए कि खगड़िया जिला पुज्य रामविलास पासवान की जन्म भूमि भी है। यहां के लोगों से उनका व्यक्तिगत और आत्मीय लगाव सदैव बना रहा है…यहां की एक-एक जनता राविलास पासवान जी को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए अपना कीमती वोट झोपड़ी पर ही डालेंगे। यही सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी। मै तो जनता के बीच जाता हूं सब ये बोलते हैं कि आदरणीय रामविलास पासवान को हमलोगों ने खो दिया है लेकिन उनकी बनाई पार्टी को हम निश्चित तौर पर आगे लेकर जाएंगे। ऐसे में प्रतिद्वंदी की हालत खराब होना स्वभाविक है।

इसलिए जनता के बीच आप खुद जाइए और पता करिए…उनके दिल की बात सुनिए। वो अब नौ-तेरह में नहीं हैं। सीधा झोपड़ी के लिए तैयार बैठे हैं। बस 3 नवम्बर का इंतजार करिए। और 10 नवम्बर को परिणाम देखिएगा।

इसका मतलब ये है कि इलाके में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रैली का असर कुछ खास नहीं पड़ा…जैसा आप कह रहे हैं, उससे यही लगता है कि नीतीश कुमार के प्रति लोगों में गुस्सा है। क्या वजह हो सकती है इसकी।

देखिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सड़क, नाली-बिजली की बात करते हैं….जो व्यक्ति 15 वर्षों से किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री पद पर होगा क्या उसकी यही उपलब्धि है कि सड़क, बिजली, पानी दे दिया। इसके लिए तो नगर निगम बना हुआ है। पथ निर्माण विभाग और भवन निर्माण, ग्रामीण विकास कार्य मंत्रालय बना हुआ है। ये काम तो नगर निगम करती है। फिर आप मुख्यमंत्री हैं तो रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए। पलायन ना हो इसकी व्यवस्था में लगनी चाहिए। शिक्षा में कैसे विकास हो इसपर काम करना चाहिए।

लघु-कुटिर उद्योग कैसे लगे इसपर काम करना चाहिए। लेकिन नहीं । आप ही बताइए जब आप लोग मुख्ममंत्री से सवाल पूछते हैं कि फैक्ट्री क्यों नहीं लगी। रोजगार का सृजन क्यों नहीं हुआ…पलायन क्यों नहीं रूक रहा…शिक्षा का स्तर क्यों बदतर से बदत्तर होती चली गई…पढ़ाई..कमाई..सिचाई क्यों ठप है। तो कहते हैं कि बिहार में समुद्र नहीं है। अब आप बताइए कि समुद्र कहां से लाएं। खगड़िया तो बारह महीने में आधे साल तक तो बाढ़ के कारण समुद्र बना ही रहता है फिर तो खगड़िया में बड़ी-बड़ी फैक्ट्री होनी चाहिए। आपको जानकर आश्रचर्य होगा कि परबत्ता एक ऐसी जगह है जहां से रिकार्डतोड़ लोग पलायन करते हैं…सिर्फ औऱ सिर्फ चार-पांच हजार रूपये कमाने के लिए उन्हें घर-बार छोड़कर बच्चे-बीबी को छोड़कर बाहर रहना पड़ता है…इस पीड़ा को मुख्यमंत्री ने कभी समझा,,,नहीं समझा।

जनसंपर्क करते लोजपा प्रत्याशी आदित्य कुमार शौर्य ।

लेकिन हमारे नेता लोजपा सुप्रीमों चिराग पासवान ने इसे समझा है। उन्हें इसकी पीड़ा है। इसी का तो जवाब हो मांगते रहे मुख्यमंत्री से लेकिन उनकी एक नहीं सुनी नीतीश कुमार ने। जिसका नतीजा ये हुआ कि उनका विरोध करना ही एकमात्र उपाय था…नहीं तो जनता को क्या जवाब देते हमारे नेता। इसलिए जनता अब नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने का पूरी तरह से मन बना चुकी है। लोजपा एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। जदयू का सुफरा साफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी जनता।

क्या शराबबंदी को लेकर जनता के बीच कोई चर्चा होती है। आपलोग तो ये मुद्दा भी उठा रहे हैं।

बिल्कुल । ये भी मुद्दा है। हमारे नेता चिराग पासवान कह चुके हैं कि शराबबंदी अच्छी बात है लेकिन आप शराबबंधी करके उस पर कोई काबू नहीं पा रहे। खुलेआम शराब बिक्री हो रही है। होम डिलिभरी की जा रही है। एक फोन करिए आपके घर पर शराब की बोतलें पहुंच जाती है। ये किसी से छिपा है क्या। क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहेंगे कि ऐसा बिहार में नहीं हो रहा है। आपने कानून तो बना दिया। गरीब-गुरबों को पकड़ कर जेल भेज दिया। लाखों की सख्या में लोग जेल में हैं। सिर्फ शराब के कानून के अंतर्गत बताइए…कि उसके परिवार का भरन-पोषण कैसे हो रहा होगा। जेल से छुड़ाने के लिए परिवार जमीन बेच-बेच कर, कर्ज ले-ले कर मुकदमे की लड़ाई लड़ रहा है। कोर्ट कचहरी का चक्कर काट रहा है। बताइए जिंदगी तबाह कर दी आपने, ऐसे में कोई गुस्सा नहीं करेगा तो क्या प्यार करेगा। इसका नतीजा, नीतीश कुमार और उनकी पार्टी को भूगतना ही होगा। कोई खुश नहीं है। और हमारे नेता चिराग पासवान ने साफ कहा है कि लोजपा को चुनिए….झोप़ड़ी का साथ दीजिए..हम इन शराब माफियाओं को भी जेल की सलाखों के अंदर करेंगे। और शराब माफियाओं से दौलत कमाने वाले नेता को भी। इसकी जांच होगी…बिहार फस्ट, बिहारी फस्ट का नारा यूं ही बुलंद नहीं किया जा रहा। जनता झोप़ड़ी के साथ है। रिजल्ट देख लीजिएगा।

कहा जा रहा है कि जातिए समीकरण में आपको आपकी ही जाति सवर्ण में आप पिछ़ड़ रहे हैं। आपकी जाति के लोग आपको दबंग नहीं मानते ।

देखिए। ये समझने की बात है। जो विधायक पहले से हैं उनकी दबंगई यहां चलती है। वो सवर्ण होते हुए अपनी धौंस सवर्ण गरीब-गुरबों पर चलाते ही हैं। बांकी जाति समुदाय के लोगों पर भी धौंस चलाते हैं। इलाके में आप किसी से पूछिए सब आपको यही कहेंगे कि विधायक का रवैया बहुत बुरा है। ऐसे विधायक से मुक्ति चाहिए। सभी त्रस्त हैं। औऱ जो लोग उनके डर से कुछ बोल नहीं पाते हैं…वो आपसे तो उनके ही फेबर की बात करेंगे ना। लेकिन सच्चाई जानिएगा तो धीरे-धीरे हर वर्ग के लोग झोपड़ी के साथ हो लिए हैं।

वर्तमान विधायक के रवैये से सभी खफा है। उनका घमंड सातवें आसमान पर है। जो टूटने जा रहा है। सो, बौखलाए हुए हैं। लेकिन बौखलाने और पैसा लुटाने से अब कुछ नहीं होने वाला। यहां की जनता काफी साहसी और मजबूत इरादों वाली है। बाबूलाल के लिए सबको सहानभूति है। जनता जानती है कि बाबूलाल जैसे जनप्रतिनिधि की अब जरूरत है। जिसके पास अपना सुख-दुख व्यक्त किया जा सके। जो क्षेत्र की विकास के अलावा किसी तरह की वसूली का कार्यक्रम नहीं चलाएगा। लोजपा सुप्रीमों चिराग पासवान के बीच जनता ने मुट्ठी बांध कर वचन दे दिया है…कह दिया है कि अबकी बार झोप़ड़ी-कमल की सरकार।

सुना है आप किताब लिखने के भी शौकीन हैं। आपकी किताब संविधान का दर्द हमने पढ़ा है। देखा आपने उसमें कोशी की समस्या औऱ अपने आंदोलनों का जिक्र किया है।

जी, बिल्कुल। पढ़ाई लिखाई शुरू से मैंने की है। औऱ किताबें लिखता रहा हूं। संविधान का दर्द मेरी वो पुस्तक है जो वास्तव में दर्द है। फिल करती है जनता। उसमें मैंने आंदोलनों का उल्लेख किया है। उसको पढ़ने के बाद कोई भी बाबूलाल को किसी खास वर्ग विशेष से बंधा हुआ नहीं कह सकता । हम तो हमेशा से अपने क्षेत्र की जनता। अपने क्षेत्र, राज्य औऱ राष्ट्र के विकास के लिए लड़ते रहे।

बाबूलाल शौर्य की लिखी पुस्तक संविधान का दर्द … की एक झलक आप भी देखिए…।