बिहार पॉलिटिक्स : शराब में चिराग ने लगा दी है आग, जदयू की जल रही… भाजपा बनी फायरब्रिगेड ! Maurya News18

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बिहार का चुनाव पूरे रंग में….जनता का मूड देख दिग्गज नेता की बेचैनी बढ़ी।

लोजपा के खेल में जदयू की घबराहट बढ़ी, राजद की सभा में उमड़ती भीड़ ने भी चिंता बढ़ाई

जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार का गुस्सा सातवें आसमान पर, युवराज की सभा में भीड़ पर टिप्पणी करने लगे हैं…।

जदयू औऱ भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच अंदर ही अंदर मतभेद उजागर, भाजपा नेता सुशील मोदी भी कर चुके हैं इसपर गुस्सा

दिलचस्प परिणाम आने की उम्मीद, आगे की तस्वीर अबतक साफ नहीं

नयन, पटना। मौर्य न्यूज18

बिहार चुनाव 2020। क्या कभी सोंचा था शराब बनेगा मुद्दा। क्या कभी सोंचा था जिस शराब के नाम पर जदयू जनात के बीच ताल ठोक रही थी, वही शराब जदयू को ही पीने लगेगी। कहने की बात नहीं कि शराब पीकर तो लोग नशे में हो जाते हैं…झूमते हैं….नाचते हैं…। लेकिन जदयू की शराब ने उसके किए की नशा उतारने में लगी है। क्या सोंचा था…ऐसा भी होगा। पर, मान ना मान हो तो यही रहा है। लोजपा के चिराग ने शराब में ऐसी आग लगा दी है कि जदयू धधक-धधक कर जल रही है।

जनता के बीच शराब का मुद्दा…जंगल में आग की तरह फैल रही है। जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार भी कह चुके हैं कि शराब के कारण लोग मुझसे गुस्से में हैं…लेकिन मैंने जो कमिटमेंट कर दिया तो अपनी भी नहीं सुनता हूं। नीतीश कुमार के इस मूड ने जनता के माथे को गरम कर दिया है….मगज में आग लगा दी है…गुस्से में है जनता और चिराग ने अपना थर्मामीटर लगाकर जैसे ही जनता के तापमान को नापा…उसे ठंडा करने की बजाये गरम लोहे पर हथौड़ा मार दिया है। चिराग ने शराब में आग लगा दी है। औऱ जदयू धधक रहा है। जल रहा है।

हाय री शराब ! तेरा नशा भी बुरा। तेरी सोहबत भी बुरी। तेरी यारी भी बुरी। तेरी-मेरी प्रेम कहानी भी बुरी। लेकिन उन शराबियों का क्या करेंगे जो नशे में भी है…और गुस्से में भी। जदयू इसपर कैसे काबू पाय समझ में नहीं आ रहा।

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लेकिन इन सब के बीच राहत बस इतनी है कि भाजपा इस आग को बुझाने में लगी है। फायरब्रिगेड की भूमिका में है। भाजपा आग को बुझाने में ये भी देख रही है कि कहीं इसकी लपटे उसको भी ना चपेट में ले ले। ऐसे में फूंक-फूंक के आग बुझा रही है। पहले चरण में भाजपा ने पूरी ताकत जरूर लगाई की आग को कैसे ठंडा किया जाए…लेकिन जनता के रूख को देखते हुए…अब भाजपा भी काम चलाऊ कार्यक्रम में लग गई है। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा फायरब्रिगेड के रूप में कितना कामयाब हो पाती है।

कहने वाले अब ये भी कह रहे हैं..कि भाजपा ये सोंच रही है कि जितना बचाव जदयू के लिए करना था कर लिया लेकिन अब और नहीं…। इसकी एक वजह औऱ भी है…जदयू सीट पर लोजपा के कड़े रूख के कारण भाजपाई कार्यकर्ता पूरी तरह से लोजपा के पाले में छिपे रूस्तम की तरह काम कर रहे हैं। वजह, साफ है….भाजपाई को लग रहा है कि लालटेन को जलाने का तो सवाल नहीं है औऱ तीर से गुस्सा है…फिर झोपड़ी एक अच्छा विकल्प है। औऱ ये विकल्प भाजपाई को खूब रास आ रहा है।

यहां ये बात भी गौर करने वाली है कि लालटेन से परहेज करने वाली जनता और जदयू से नाराजगी अब झोपड़ी के साथ निभाने का मनमिजाज बना चुके हैं…ऐसे में यदि भाजपाई किसी तरह की कोशिश कर भी ले.. तो भी बिहार की जनता किसी की सुनने वाली नहीं है। इसका सीधा फायदा लोजपा को मिलता दिख रहा है। वहीं भाजपा के लिए… जदयू कार्यकर्ता भी उदासीन होते दिख रहे हैं। इसका एक उदाहरण भागलपुर के मंच से भाजपा के दिग्गज नेता औऱ उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने जिस तरह से नाराजगी व्यक्त की, उससे साफ दिखता है कि अंदर ही अंदर भाजपाई औऱ जदयू दोनों के कार्यकर्ता अपने-अपने हिसाब से मैदान में जंग की तरह फाइट कर रहे हैं।

औऱ इसमें कोई शक नहीं जब सगा कोई दुश्मन बनता है तो उसका असर काफी गहरा होता है। जो दुश्मन सामने दिखता है उससे ज्यादा छिपे हुए दुश्मन जहरीले हो जाते हैं। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि भाजपाई जदयू के लिए और जदयू भाजपाई के लिए जहर का काम कर रहे हैं। नेता चाहे मंच से जितना कह ले जहर फैल चुका है। औऱ कह सकते हैं कि लोजपा दोनों के बीच नया खेल करने में कामयाब दिखती है।

यदि जातिय समीकरण को भी देखें तो…जदयू के पास जातिय समीकरण उतना ठोस नहीं है जितना भाजपा का है। ऐसे में भाजपा के नुकासान की गुंजाईस ज्यादा नहीं दिखती लेकिन जदयू की मिट्टी पलीद होना लगभग तय है। अब रिजल्ट आने के बाद ही सच्चाई का पता चलेगा कि आखिर इस फाइट में किसको कितनी कामयाबी मिलेगी।

दूसरे चरण में पब्लिक का रूख क्या होता है…बहुत सारी बातें इसपर निर्भर करती है। जहां तक लोजपा का सवाल है वो इन सबका कितना फायदा उठा पाती है ये देखना होगा लेकिन जदयू को जलाने का सारा इंतजाम तो कर ही दी है।

इधर, जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार भी लोजपा के रवैये को देखते हुए…औऱ राजद की सभा में भीड़-भाड़ को देखकर काफी खिसयाते हुए भाषण दे रहे हैं। कई बार मंच से इसका इजहार भी करते देखे गए । जनता सब देख ही रही है…कि आखिर नीतीश कुमार का ब्लडप्रेशर क्यों हाई हो जा रहा है। अब तो देखा जा रहा है कि नीतीश कुमार राजद की सभा में जुटने वाली भीड़ पर भी निशान साधने लगे हैं। खुले मंच से कह रहे हैं कि ऐसी भीड़ तो लालूजी की सभा में भी देखी जाती रही है, लेकिन रिजल्ट क्या हुआ। सबके सामने हैं।

अब सोंचने वाली बात है कि नीतीश कुमार ये सब क्यों कह रहे हैं…जाहिर है कहीं ना कही राजद के युवराज की सभा में उमड़ती भीड़ ने उनके माथे पर भी पसीना ला दिया है। पेंसेंस लूज होता दिख रहा है। ब्लडप्रेशर हाई कर दिया है।

राहत की बात ये है कि जंगलराज का डर दिखाकर जितना वोट बचा सकते हैं बचा ले…ये एकमात्र रास्ता बचा है। जदयू औऱ भाजपा इसपर ही जोड़ दे रही है। अब देखना है कि शराब औऱ जंगलराज कितना असर छोड़ता है।

चलते-चलते एकबात और….

कहा जा रहा एनडीए तय है..। महागठबंधन वाले कह रहे महागबंधन तय है। तय क्या है ये जनता के हाथ में है… पहले चरण में मतदान के आंकड़े की बात करें तो 71 सीटों में 37 सीटों पर मतदान प्रतिशत बढ़चढ़ कर हुए…बांकी सीटों पर मतदान प्रतिशत लुढक गया। ऐसे में कयास ये लगाए जा रहे हैं कि मतदान लुढकना वर्तमान सत्ता के लिए शुभ संकेत है लेकिन वोट किसको पड़ा…रिजल्ट का अनुमान इसी के आधार पर होगा। तभी मतदान का पूर्वानुमान सही साबित हो पाएगा…अभी ये सब देखना होगा। फिलहाल सभी पार्टियों की धड़कने बढ़ी हुई है।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।