बिहार पॉलिटिक्स : आप क्यों रोए…! Maurya News18

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नयन की नज़र से पॉलिटिक्स !

…और जदयू सुप्रीमो नीतीश का अंतिम चुनाव

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18 ।

बिहार के कार्यकारी मुख्यमंत्री 10 नम्बर 2020  के बाद । क्या कहलाएंगे। देश की राजनीति में सबसे बड़ी खबर होगी। कोरोना कांड के बाद पूरी दुनिया में इस वक्त अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव  और भारत के बिहार में मुख्यमंत्री का चुनाव हुए हैं। दोनों जगह एक बात कॉमन है वो ये कि वर्तमान शासक पर विरोधी हावी है। नतीजा,  शायद अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में जिस तरह से उलट-फेर हुए…ऐसा कुछ बिहार में होता है तो देश की राजनीति में एक नये युग की शुरूआत हो सकती है। एक नये बिहार के रूप में यहां से लकीरें खींची जा सकती है।

जिसकी संभावना तो दिखती है। लेकिन साफ-साफ कुछ कहा नहीं जा सकता । वहीं बिहार की राजनीति इस वक्त क्रिकेट मैच जैसी, 20-20 खेल जैसी हो गई है। जहां हार-जीत के फैसले के लिए अंतिम गेंद तक इंतजार करना पड़ता है।

बिहार की राजनीति के 2020 मैच में भी — 

अंतिम ओवर, अंतिम बॉल, अंतिम पीच, अंतिम सोंच, अंतिम राजनीति…यानि की 20-20 मैच की तरह ही अंतिम बॉल तक आपको परिणाम का इंतजार करना होगा। कह सकते हैं…इस वक्त बिहार में चुनाव को लेकर..जो राजनीति मैच है- पूरा पैसा वसूल राजनीति है। जनता को भी खूब मजा आ रहा है। मीडिया को भी दिखाने और सवाल खड़ा करने का स्कोप ढ़ेर सारा है। दो पार्टियों में झगड़ा लगाने का स्कोप भी बिहार के चुनाव में राजनीतिक पार्टियों ने दे रखी है। सो, खबरें तरह-तरह की रोज परोसी जा रही है।

खैर, पांच साल में इस तरह का पर्व आता है। सो, इसबार की राजनीति में चुनावी खेल-2020 काफी मजेदार रहा। पैसा वसूल वाला मैच हो गया है। सट्टा बाजार भी लग चुका है। करोड़ों रूपये की सट्टेबाजी लगायी जा रही है। 10 नम्बर 2020 को ये खेल पटना से दिल्ली तक बड़े पैमाने पर रंग लाएगा। कइयों को माला-माल कर सकता है, कइयों को कंगाल भी।

खैर, जो भी हो…ये तो बाजार की बात थी। लेकिन हम फिर से लौटते हैं, बिहार की राजनीति पर।

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और बिहार के दिग्गज लीडर और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार की बात कर लेते हैं कि आखिर नीतीश कुमार चुनाव की आखिरी तारीख को ही क्यों रोए।

आपको बता दें कि, नीतीश कुमार ने अपने 69 साल की उम्र में 40 साल राजनीति में झोंक दी। अब 2020 विधानसभा में कह दिया है कि बस अब और नहीं। अंतिम है माइ-बाप। इसके बाद नहीं। सो, आप समझिए करना क्या है। दीजिएगा ना वोट। कहते-कहते मंच से क्या उतरे। पूरे देश की राजनीति गलियारे में भूचाल आ गया।

फेसबुक और मीडिया में खबरें आने लगी…नीतीश कुमार अब राजनीति छोड़ रहे हैं। खुद की संन्यास लेने की घोषणा कर दी। जबतक लोग जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के कहे का कुछ मायने समझते…तबतक तो देश की पूरी मीडिया ने जंगल में आग की तरह बात खबरें फैला दी। खबर में भी इतनी ताकत थी कि तेजी से फैलानी शुरू हो गई।

 खबरें कुछ इस अंदाज में फैलने लगी … कि ये देखिए…ये लीजिए…ये सुनिए….नीतीश कुमार ने खुद ही हार मान ली….नीतीश कुमार ने संन्यास लेने की घोषणा कर दी…नीतीश कुमार अब नहीं होंगे बिहार के अगले मुख्यमंत्री….नीतीश कुमार ने राजनीति में फिर कुछ नया करने जा रहे हैं…नीतीश कुमार ने खेल दिया है इमोशनल कार्ड….वोट पाने के लिए नीतीश कुमार ने खेला इमोशनल कार्ड।

इस तरह से तरह-तरह की बातें घंटेभर में जंगल में आग की तरह देशभर में फैल गई।  फिर तो विभिन्न दलों और पार्टियों के राजनीतिज्ञों, पॉलिटिशियन, पॉलिटिकल वर्कर के भी सांप सुंघ गए…

नतीजा, वो भी भांति-भांति टाइप के कॉमेंट करने लगे — ले लोटा..अब क्या होगा। ले बलैया- अब क्या होगा…। चिराग फैक्टर के चलते तो नहीं ऐसा बोल दिए। लगता है अंतिम चरण में मतदाता को इमोशनल बना के वोट लेने के लिए ये सब किए हैं।

उनकी ही पार्टी जदयू के अंदर-बाहर सबकी बोलती बंद हो गई। भाजपा भी इसी बीच मुंह में पान रखकर…गुलगुलाते हुए टाइप से कुछ बोलकर आगे बढ़ गई।

भाजपा नेता सुशील मोदी और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार दोनों की हिट जोड़ी । मौर्य न्यूज18 ।

इधर, लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान मीडिया के सामने आए…गरजे बोले…ये सब करना ही था तो चुनाव से पहले कर दिए होते…अब क्या इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं….जनता को अंतिम चरण में बरगला कर, इमोशनल बनाकर वोट लेने के लिए नीतीश कुमार ये सब कर रहे हैं। इससे जनता पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव । मौर्य न्यूज18 ।
लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार । अब प्यार ना रहा। बागी बने हैं। मौर्य न्यूज18 ।

वहीं, महागठबंधन से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार राजद नेता तेजस्वी यादव भी खुलकर बोलना शुरू कर दिए कि नीतीश कुमार अंतिम चरण आते-आते हार मान चुके हैं। उनको पता चल गया है कि जदयू का पत्ता साफ होने जा रहा है, इसलिए अंतिम चरण के अंतिम दिन इमोशनल बात बोलकर जनता से वोट झटकना चाहते हैं ताकि विदाई भी हो तो थोड़ा स्कोर करके हो। बेहतर तरीके से हो।

इसलिए वो ऐसा कर रहे हैं। राजद नेता तेजस्वी कहते हैं कि नीतीश कुमार को अहंकार ले डूबा। वो थके हारे हैं। उन्हें बाकई आराम करने की जरूरत है। उन्हें बिहार की गद्दी पर बने रहने का मोह छोड़ देना चाहिए। अब रोने से कुछ नहीं होने वाला।

इधर, पब्लिक की बात करें तो…यहां भी तरह-तरह के लोग मिले। जो आए दिन राजनीतिज्ञ से हटकर बातें करते थे, वो भी इस खबर के बाद राजनीति की बात शुरू कर दी। मौर्य न्यूज18 ने नीतीश कुमार के बयान पर जनता की राय जानने की भी कोशिश की। इस कारण मौर्य न्यूज18 बिहार के विभिन्न इलाकों में जाकर वहां की जनता से भी बात की और विभिन्न दलों के समर्थकों से भी बात की।

और ये जानना चाहा कि नीतीश कुमार ने जो कहा है कि ये मेरा अंतिम चुनाव है। सो, वोट हमे दीजिए। इसपर आपकी क्या राय है।

पब्लिक का मोटा-मोटी यही कहना था कि नीतीश कुमार आप क्यों रोये। 15 सालों से लगाकर गले हमे…फिर आप क्यों रोए।

कह सकते हैं …नीतीश कुमार के इस इमोशन का असर उनपर भी पड़ता दिखा है जो बाकई कल तक चुनाव में उनपर काफी गुस्से में थे। दो चरणों के मतदान में जदयू को कितना फायदा या नुकासान हुआ ये तो स्पष्ट नहीं है लेकिन तीसरे चरण में जदयू को ये रोने वाली स्क्रिप्ट फायदा जरूर दिलाती दिख रही है।

वैसे, कुछ जनता इस बात को लेकर भी खफा है कि कम से कम नीतीश कुमार को इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए थी। गद्दी पाने के लिए एक तरह से ये रोना ही है। जो सही नहीं है। अब आगे अपनी ही पार्टी में किसी और को इस लायक बनाने में जुटना चाहिए।

चलते-चलते एक बात और….।

बिहार में इस वक्त जिस तरह की राजनीति नीतीश कुमार की लेकर चल रही है….उससे इतना तो साफ है कि हर पार्टी नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने के लिए ही गोलबंद है। यानि इस गोलबंदी में सहयोगी पार्टी भाजपा भी अंदर खाने से इसमें कहीं ना कही शामिल है। एनडीए के साथ रहने वाली लोजपा नीतीश के कारण जदयू से अलग हो गई। और लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान से ठान चुके हैं कि नीतीश कुमार को बिहार की गद्दी से हटाना ही आखिरी मकसद है। लक्ष्य है। इसके साथ ही महागठबंधन और अन्य विरोधी पार्टी तो चाहती ही है कि नीतीश को गद्दी से उतारा जाए। कुल मिलाकर देखे तो। साथ में रहने वाली पार्टी हो या विरोधी सबके सब नीतीश हटाओ अभियान में जुटे है। कारण भी साफ है…जनता के अंदर तरह-तरह की बातों को लेकर गुस्सा है। गुस्सा कुछ सालों से चरम पर है जिसका खामियाजा भूगतना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में नीतीश कुमार ने सच में खुद को अलग-थलग पा रहे हैं। ऐसे में आगे का परिणाम ही नीतीश कुमार की आगे की जिंदगी का फैसला कर सकता है।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।