बिहारी चक्रव्यूह में दीदी ! Maurya News18

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‘दीदी’ का गुस्सा सातवें आसमान पर, कहा- मेरा बॉडीगार्ड और ड्राइवर भी बिहारी है !

अतुल कुमार, पटना, मौर्य न्यूज18

चौंकिए नहीं

जी हां, चौंकिए नहीं…दीदी यानी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आजकल बात-बात पर नाराज हो जा रही हैं कभी जय श्री राम के नारे से भभक पड़ती हैं तो कभी बंगाली और बिहारी की बात करने पर भड़क जाती हैं। दरअसल बंगाल के चुनाव को लेकर उनपर इतना दबाव है कि वे बात-बात पर गुस्सा हो जाती हैं। दबाव होना स्वाभाविक भी है। विरोधी पार्टियां उन्हें घेरने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही हैं। कांग्रेस व कम्युनिस्ट पार्टियों के अलावे इस बार बंगाल चुनाव में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है।

इतना ही नहीं नीतीश कुमार की पार्टी जदयू भी दीदी को घेरने की तैयारी में है। तकरीबन 50 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम चल रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह जैसे बड़े नेता खुद बंगाल में कैंप कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई रैलियां कर चुके हैं। हर पार्टी बिहारियों को लुभाने या यूं कहें कि हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों को अपने पाले में करने की कोशिश में लगी हैं।

40 फीसदी गैर बंगाली बिगाड़ सकते हैं दीदी का खेल

ममता बनर्जी ने एक कार्यक्रम में संवाद के दौरान कहा कि उन्होंने पिछले 10 वर्षों में हिंदी भाषियों के हित में कई काम किए हैं। राज्य में कई हिंदी अकादमी से लेकर विश्वविद्यालय व कॉलेजों की स्थापना की गई है। भारतीय जनता पार्टी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने हिंदी भाषियों से अपील की कि उनकी बातों पर ध्यान ना दें। दीदी ने कहा कि हम चाहते हैं कि बंगालियों से भी ज्यादा हमें बिहारियों का वोट मिले।

आपको बता दें कि इसी दौरान ममता बनर्जी ने यहां तक कह डाला कि हमारे सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर भी हिंदी भाषी हैं जिनके हाथों में हमारी जिंदगी की स्टीयरिंग है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के अधिकतर आईएएस व आईपीएस अधिकारी भी बिहार, यूपी, हरियाणा व अन्य हिंदीभाषी राज्यों से हैं जिन्हें उनकी सरकार ने महत्वपूर्ण पदों पर मौका दिया है। उनका कहना है कि हमने बिहारी राजीव सिन्हा को मुख्य सचिव बनाया था वहीं डीजीपी वीरेंद्र हरियाणा से हैं। ममता बनर्जी यह सब यूं ही नहीं बोल रही थीं बल्कि यूपी-बिहार और राजस्थान की बड़ी आबादी उनके निशाने पर थी।

उल्लेखनीय है कि दो दशक पूर्व “आमरा बंगाली”  वाम शासन काल में एक भाषायी सह प्रांतवाद की आवाज कुछ लोगों के एक संगठन ने उठायी थी। संगठन के लोग कोलकाता के बड़ा बाजार, लेनिन सारणी, चितपुर, मछुआ बाजार, सियालदह,  एपीसी रोड, धर्मतला, पार्क स्ट्रीट और हावड़ा के मुख्य बाजारों के व्यापारिक प्रतिष्ठानों और दुकानों पर लगे हुए हिंदी साइनबोर्ड पर कालिख पोत देते थे।

सियालदह और हावड़ा लाइन के रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लगे स्टेशनों के हिंदी नाम पट्टिकाओं पर कालिख पोत कर ‘आमरा बंगाली’ का स्लोगन लिख देते थे। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में स्थायी निवासी के तौर पर यूपी, बिहार, राजस्थान के हिंदी भाषा-भाषियों की जनसंख्या कुल आबादी की 40 प्रतिशत के करीब है। जिसमें भारतीय मुस्लिम समुदाय भी शामिल है। जूट मिल उद्योग व अन्य कुछ प्रतिष्ठानों की बदहाली के कारण कुछ लोग कम जरूर हुए हैं। इसके बावजूद यह आबादी कोलकाता-हावड़ा और उससे सटे शहरी व कस्बाई क्षेत्रों में इतना असर रखती है कि सरकार गठन में इनकी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता।

जदयू 50 सीटों पर बिगाड़ सकता है समीकरण, पूर्वांचल के वोटरों पर है नजर

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में जदयू लगभग पचास सीटों पर अपनी ताकत आजमाएगा। हालांकि सीटों की संख्या पर आखिरी तौर पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को यह फैसला लेना है कि पश्चिम बंगाल में कितनी सीटों पर पार्टी अपनी ताकत आजमाएगी। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी का कहना है कि वह कोई बदले की भावना के साथ पश्चिम बंगाल के चुनाव मैदान में नहीं जा रही। पार्टी अपने विस्तार की योजना के तहत पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ेगी।

जदयू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल जदयू की प्रदेश इकाई से यह रिपोर्ट मंगायी गयी है कि वहां किन-किन क्षेत्रों में पार्टी को अपना प्रत्याशी देना चाहिए। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर पार्टी अपने को केंद्रित करेगी जहां बिहारी वोटर और खासकर पूर्वांचल के वोटरों की संख्या अधिक है। इस क्रम में हावड़ा, वर्दमान और पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहरों को केंद्रित किया जा रहा है। यहां बिहार के श्रमिकों की संख्या काफी अधिक है जो अब वहां के वोटर बन गए हैं। जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया कि 2011 में पार्टी ने पश्चिम बंगाल में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद जदयू ने पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं लड़ा पर पार्टी की इकाई वहां सक्रिय रही है।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए अतुल कुमार की रिपोर्ट ।