मार गई तेरी जुदाई…

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Maurya News 18

सियासत में एक रिश्ता ऐसा भी…जहां पुराने दिनों की बातों को याद कर प्रधानमंत्री की आंखें भर आती हैं। वे अपने आंसुओं को बाहर निकलने से रोक नहीं पाते हैं। रो पड़ते हैं। गरमा-गरम बहसबाजी के बीच भावनाओं का ऐसा ज्वार आप केवल भारत की संसदीय प्रणाली में ही देख सकते हैं क्योंकि यहां संबंधों की अपनी गरिमा होती है। मंगलवार को राज्यसभा में जो नजारा देखने को मिला, वह लोकतंत्र का सबसे सुंदर दृश्य था। दरअसल राज्यसभा से वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की विदाई को लेकर सभी अपनी-अपनी बातें रख रहे थे।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलाम नबी आजाद से अपनी दोस्ती का जिक्र करते हुए कश्मीर में गुजरातियों पर हुए आतंकवादी हमले से जुड़ा एक वाकया सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे गुलाम नबी आजाद ने गुजरातियों की मदद की थी। उन्हें संकट की घड़ी से उबारा था। यह सब बताते हुए पीएम मोदी की आंखों से आंसू छलक आए। उन्होंने कहा कि अनुभवी आजाद सुझाव देने में माहिर हैं। मित्र की तरह उनका आदर करता हूं। विपक्ष के नेता के पद पर रहते हुए उन्होंने कभी दबदबा बनाने का प्रयास नहीं किया। उन्हें जितनी चिंता अपने दल की थी, उतनी ही सदन और देश की भी थी।

पीएम ने बताया कि वे जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब आजाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे। उन दिनों कश्मीर में पर्यटकों पर आतंकी हमला हुआ और कुछ पर्यटक मारे गए थे। इनमें गुजरात के पर्यटक भी थे। मोदी ने कहा-तब सबसे पहले गुलाम नबी आजाद ने फोन कर उन्हें इस घटना की सूचना दी। उनके आंसू रुक नहीं रहे थे।

वहीं गुलाम नबी आजाद भी उस घटना को याद कर भावुक हो गए। उनकी आंखें भी गीली हो गईं। उन्होंने कहा कि कई दफा टोका-टोकी हुई लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कभी बुरा नहीं माना। उन्होंने हमेशा व्यक्तिगत संदर्भ और पार्टी को अलग-अलग रखा। पांच बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करनेवाले गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्हें अपने हिंदुस्तानी मुसलमान होने में फक्र है। मैं उन खुशकिस्मत लोगों में हूं जो कभी पाकिस्तान नहीं गया।

विश्व में किसी मुसलमान को यदि गर्व होना चाहिए तो वो हिंदुस्तान के मुसलमान को होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब वे जम्म-कश्मीर के सीएम बने थे तो उसके कुछ ही दिनों के बाद आतंकी हमला हुआ था और कुछ पर्यटक मारे गए थे। जब वे हवाई अड्डे पहुंचे तब पीड़ित परिवारों के बच्चे उन्हें पकड़कर रोने लगे। यह दृश्य देखकर उनके मुंह से चीख निकल गई, खुदा तूने ये क्या किया…उन्होंने बताया कि जब वे छात्र राजनीति में थे तब सबसे अधिक मत कश्मीरी पंडितों का ही मिलता था।

उन्होंने विदाई के दौरान मोदी और अमित शाह से कश्मीरी पंडितों को बसाने की दिशा में प्रयास करने का आग्रह कर शेर सुनाया। ‘गुजर गया वह जो छोटा-सा एक फसाना था, फूल थे, चमन था, आशियाना था, न पूछ उजड़े नशेमन की दास्तां, न पूछ थे चार तिनके, मगर आशियाना था। इस मौके पर गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू समेत सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया।

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