यूपी में योगी को घेरने की तैयारी, ओवैसी को आगे कर बनी रणनीति। Maurya News18

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Maurya News18, Lucknow

Political Desk

2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव होना है, इसको लेकर  भाजपा, कांग्रेस, सपा व बसपा समेत तमाम पार्टियां अपने-अपने हिसाब से रणनीति बनाने में जुट गई हैं। लेकिन इन सब पार्टियों से जुदा एक पार्टी ऐसी भी है जो हैदराबाद और बिहार के रास्ते होते हुए यूपी के विधानसभा में अपने विधायक को पहुंचाने की तैयारी में जुटी है। इसको लेकर उसने पुख्ता रणनीति बनाई है। कई पार्टियों से गठजोड़ को लेकर उसके मुखिया की बात हो चुकी है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं… असदुद्दीन ओवैसी की। बिहार में एआईएमआईएम की जीत से गदगद  ओवैसी की नजर अब उत्तर प्रदेश में गुल खिलाने की है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के मुखिया ओवैसी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वे साथ में मिलकर चुनाव लड़ेंगे। इतना ही नहीं, वे दोनों यूपी में एक साथ दौरा भी करने लगे हैं। दोनों छोटे-छोटे दलों को अपने साथ लाने की कवायद में जुटे हैं।

 

ओवैसी और राजभर आम आदमी पार्टी के साथ ही अन्य छोटे दलों जैसे शिवपाल सिंह यादव की प्रसपा और कृष्णा पटेल के अपना दल को एक साथ लाने की तैयारी में हैं। ऐसे में शिवपाल यादव से ओवैसी की मुलाकात नये गठबंधन की ओर इशारा कर रहा है।

यूपी में भाजपा के कमल को खिलने से रोकने के लिए अभी से ही सियासी खिचड़ी पकनी शुरू हो गई है। शनिवार को जब ओवैसी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव एक शादी समारोह में मिले तो अटकलों का बाजार गर्म हो गया। बताया जा रहा है कि उन दोनों के बीच लगभग आधे घंटे तक गुफ्तगू हुई।

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव भागीदारी संकल्प मोर्चा के साथ लड़ने के संकेत दिए हैं।

दरअसल, शनिवार को एआईएमएआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली की पुत्री के निकाह का मौका इसका गवाह बन गया। अचानक शाम सात बजे एआईएमएआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओवैसी व प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव पांच मिनट के अंतर पर माहुल पहुंच गए। वैवाहिक समारोह में अचानक से सियासी लहर चल पड़ी। 

कस्बे के रफी मेमोरियल स्कूल कैंपस में बने बड़े टेंट में दोनों नेताओं ने शौकत की बेटी व दामाद को आशीर्वाद दिया। इसके बाद ओवैसी और शिवपाल सवा सात बजे से पौने आठ बजे तक अलग टेंट के कमरे में गहन बातचीत में मशगूल रहे। इस दौरान दोनों अध्यक्षों के अलावे शौकत व प्रसपा के महासचिव रामदर्शन यादव भी थे। किसी अन्य के वहां जाने की इजाजत नहीं थी। हालांकि, अंदर क्या सियासी खिचड़ी पकी अब तक इसका कुछ औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, मगर इशारा है कि दोनों साथ में चुनाव लड़ सकते हैं।

शिवपाल यादव ने कहा कि समान विचारधारा के लोग और सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एक साथ आकर भाजपा को प्रदेश व देश से उखाड़ फेंकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश से भी यही कहा है कि सबको जोड़ें। शिवपाल यादव ने यह भी कहा कि हम सपा में विलय नहीं करेंगे, बल्कि गठबंधन करेंगे।