टूलकिट फेम दिशा रवि को मिल गई जमानत। Maurya News18

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9 दिनों बाद मिली जमानत, कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार।

Maurya News18, Delhi

Crime Desk

दिशा रवि मामले में कोर्ट ने सरकार को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट का कहना है कि सरकार के जख्मी गुरूर पर मरहम लगाने के लिए किसी पर देशद्रोह के मुकदमे नहीं थोपे जा सकते। बता दें कि 22 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि को गिरफ्तारी के 9 दिन बाद सशर्त जमानत मिल गई।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को उनकी रिहाई के आदेश जारी किए। कोर्ट ने कहा, ‘‘वॉट्सऐप ग्रुप बनाना या किसी टूलकिट को एडिट करना कोई अपराध नहीं है।’’ बेंगलुरु की रहने वाली दिशा पर किसान आंदोलन से जुड़ी वह टूलकिट बनाने और एडिट करने का आरोप है, जिसे क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने शेयर किया था। इस विवादास्पद टूलकिट में 26 जनवरी और उससे पहले डिजिटल स्ट्राइक का जिक्र था।

कोर्ट का कहना है कि देश के नागरिक सरकार पर सजग तरीके से नजर रखते हैं। उन्हें सिर्फ इसलिए जेल में नहीं डाला जा सकता क्योंकि वे सरकार की नीतियों से असहमति रखते हैं। सरकार की नीतियों को भेदभाव रहित बनाने के लिए मतभेद, असहमति या विरोध करना जायज तरीकों में शामिल है। ऋग्वेद में भी अलग-अलग विचारों का सम्मान करने के हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का जिक्र है।

रिकार्ड में कुछ नहीं मिला

संविधान के अनुच्छेद 19 में भी विरोध करने के अधिकार के बारे में पुरजोर तरीके से कहा गया है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं मिला, जो बताता हो कि दिशा किसी अलगाववादी विचारधारा से जुड़ी थीं। दिशा का अपनी पहचान छुपाने की कोशिश करना भी बेवजह के विवादों से खुद को दूर रखने का एक तरीका था।

प्रॉसिक्यूशन यह भी साबित करने में नाकाम रहा कि ग्रेटा थनबर्ग को टूलकिट फॉरवर्ड करने के अलावे दिशा ने किस तरह दुनियाभर के लोगों को अलगाववादी तत्वों से जोड़ा।

अब तक मिले छोटे और अधूरे सबूतों के मद्देनजर 22 साल की एक लड़की को जमानत देने के सामान्य से नियम से अलग जाकर जेल भेजने का कोई साफ कारण नजर नहीं आता क्योंकि इस लड़की का पिछला रिकॉर्ड पूरी तरह से अपराध रहित रहा है और समाज में उसकी गहरी जड़ें हैं।

नई दिल्ली से मौर्य न्यूज18 के लिए क्राइम डेस्क की रिपोर्ट।