बॉलीवुड की धाकड़ गर्ल्स से मिलिए मौर्य न्यूज18 पर। Maurya News18

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Indrani Sharma, Correspondent

हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री से पुरुष प्रधान कहानियां लिखी जाती रही हैं। समाज की तरह हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री भी पुरुष प्रधान है, जहां फिल्म के हीरो प्रमुख होते हैं। हीरोइन के नाम के आगे मुख्य हीरोइन तो लिखा होता है, लेकिन फिल्म में उनके पास डांस, गाना, ग्लैमर के अलावे थोड़ा-बहुत ही होता है कुछ करने को।

लेकिन ये पूरी तरह सच भी नहीं है, कुछ फिल्में ऐसी भी हैं जिसमें हीरो बस नाम के लिए थे। फिल्म का सारा दारोमदार एक्ट्रेस के ऊपर था।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बात करेंगे ऐसी ही फिल्मों के बारे में…

मॉम – हिन्दी फिल्म की पहली महिला सुपरस्टार श्रीदेवी की ये अंतिम फिल्म थी। फिल्म में दिवंगत एक्ट्रेस ने एक स्कूल टीचर का किरदार निभाया था। फिल्म में स्कूल में पढ़ने वाले कुछ स्टूडेंट को अपनी बेटी को छेड़ने के आरोप में सजा देती है। बदले में वो लड़के श्रीदेवी की बेटी का रेप कर उसे नाले में फेंक देते हैं। कोर्ट से लड़के छूट जाते हैं, इसके बाद एक्ट्रेस अपने तरीके से उन लड़कों से बदला लेती है। बदला लेने का उनका तरीका अनोखा और असरदार होता है।

कहानी – कहानी की पटकथा में विद्या वागची यानी कि विद्या बालन पूरी फिल्म में पुलिसवालों को चकमा देती दिखाई देती हैं।

फिल्म में मिसेज वागची अपने पति के हत्यारों को पुलिस की मदद से ढूंढती है और फिर उसे मार देती है। पूरी फिल्म में विद्या गर्भवती दिखाई देती है जो असल में बस एक झूठ होता है।

राजी – राजी एक ऐसी लड़की की कहानी है जो दुश्मन देश में जाकर वहां की जासूसी करती है। राजी के किरदार को आलिया भट्ट ने इस खूबी से अंजाम दिया है कि लगता नहीं कि वे एक फिल्म इंडस्ट्री में नई हैं।

आंखें – आंखें फिल्म में सुष्मिता सेन अंधों के ट्रेनर की भूमिका में हैं। इसमें सुष्मिता तीन अंधे (अक्षय कुमार, अर्जुन रामपाल एवं परेश रावल) को बैंक लूटने की ट्रेनिंग देती हैं। फिल्म में सुष्मिता की एक्टिंग काफी शानदार है और ट्रेनिंग इतनी सशक्त कि अंधे बैंक लूट लेते हैं और कोई समझ नहीं पाता कि तीनों अंधे हैं।