पहले सबूत दिखाइए, फिर होगी कार्रवाई, बिल्कुल कोर्ट के माफिक चल रहा सदन। Maurya News18

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Maurya News18, Patna

Political Desk

विधानसभा का सत्र चल रहा है, वो भी बिल्कुल कोर्ट के माफिक। पहले सबूत दिखाइए फिर होगी कार्रवाई। कुछ इसी अंदाज में शुक्रवार को एक वाकया हुआ। CPI(ML) के विधायक मनोज मंजिल ने आरा सदर अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल किया। जवाब में मंत्री ने सभी सुविधाओं का जिक्र किया। इसके बाद विधायक ने सदर अस्पताल की कई तस्वीर सबूत के तौर पर रख दी। फिर मंत्री मंगल पांडेय ने जवाब दिया कि दिखवा लेता हूं।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव ने कॉल ड्राप का मामला उठाया तो अध्यक्ष ने कहा कि हर चीज में राजनीति नहीं करें। उधर, विधानसभा से जुड़े एक सवाल को लेकर अध्यक्ष विजय सिन्हा ने कहा कि विधायक की तरफ से वे खुद सवाल पूछ रहे हैं। मंत्री जवाब दें कि यह काम कब तक पूरा हो जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री से पूछे गए ये सवाल

भाजपा विधायक पवन जायसवाल ने सदर अस्पतालों में पैथोलॉजी में जांच के नाम पर आंकड़ा दिखा कर राशि गबन करने का मामला उठाया। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

राजद विधायक रामानुज प्रसाद ने बिहार में खाद्य संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति का मामला उठाया। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 3 महीने में खाद्य संरक्षण अधिकारी की नियुक्ति कर ली जाएगी। भाकपा (माले) के विधायक अजीत कुमार ने दंत महाविद्यालय अस्पताल में तृतीय वर्ग कर्मचारी की नियुक्ति में आरक्षण प्रावधान लागू नहीं करने का मामला उठाया। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया की फिर से जांच कराई जाएगी।

विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा

लोकसभा की तर्ज पर विधायकों को भी सम्मान

विधानसभा के सदस्यों को उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने इसकी घोषणा की। पुरस्कार चयन समिति विधायक का नाम तय करेगी। इस पुरस्कार के तहत उन्हें प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। एक बार यदि किसी विधायक को पुरस्कार मिल गया तो अगले साल उनके नाम पर विचार नहीं किया जाएगा। लोकसभा की तर्ज पर विधानसभा में उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया है। यह पहली बार शुरू किया गया है।

वहीं, MLA अजय कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में कार्यकारी निदेशक के लिए वरीयता को प्राथमिकता नहीं दी गई है। डॉ. विद्यानंद प्रसाद और डॉ. अश्वनी कुमार को नजरअंदाज करते हुए डॉ. सुनील कुमार को पद दिया गया। जवाब में मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि संस्थान में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से कम समय के लिए प्रभार दिया गया है।