पूर्व CM का छलका दर्द, कोई बिजली बिल कम करा दे। Maurya News18

0
155

Maurya News18, Patna

Political Desk

सत्ता भी चली गई। पहलेवाला रूतबा भी नहीं रहा। नाम के आगे EX भी लग गया। कहने को तो बिहार जैसे राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं लेकिन पूर्व होते ही हर कोई दगा दे जा रहा है। बिजली विभाग भी आंख तरेर रहा है। इतना बिल भेज दे रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को चिट्ठी लिखनी पड़ रही है।

वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर उन्होंने अपनी पीड़ा का इजहार किया है। अपने मार्मिक खत में उन्होंने बिजली बिल को लेकर आक्रोश जाहिर किया है।

दरअसल, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा यानी ‘हम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी की सबसे बड़ी परेशानी उनके आवास 12 एम स्टैंड रोड पर हर महीने आने वाला बिजली का बिल है। आहत मांझी कहते हैं कि नीतीश कुमार को हम अपना आदमी समझते हैं और तकलीफ अपने लोगों से बयां की जाती है। मेरे पास 1 लाख 4 हजार का बिजली बिल आया तो इस बात ने मुझे टच किया, क्योंकि इतना तो मेरा वेतन भी नहीं है। इसलिए मैंने नीतीश कुमार को पत्र लिखा कि नीतीश जी भगवान न करे कि आप कभी पूर्व मुख्यमंत्री हों, बराबर सीएम  ही रहें। क्योंकि पूर्व सीएम को क्या-क्या झेलना पड़ता है वह मैं झेल रहा हूं।

साधारण विधायकों को 2000 यूनिट बिजली बिल में छूट दी जाती है और मुझे भी सिर्फ यही छूट दी जा रही है जो एक पूर्व सीएम के लिए नाकाफी है। अनलिमटेड छूट पूर्व सीएम को न मिले लेकिन कम से कम 5000 यूनिट तक की छूट पूर्व सीएम को मिलनी चाहिए।

पूर्व सीएम ने पत्र में आवास और सुरक्षा का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि मैं जेड प्लस सुरक्षा घेरे में रहता था। मुझे CRPF की सुरक्षा मिली थी। बाद में जेड प्लस सुरक्षा हटा दी गई, जबकि मैं नक्सल प्रभावित क्षेत्र से आता हूं। एक आम मंत्री और विधायको से ज्यादा मेरा दौरा होता है इसलिए मुझे विशेष सुविधा मिलनी चाहिए, क्योंकि यह मांग सिर्फ मेरे लिए नहीं है, बल्कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए है।

बता दें कि उन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा दे दी गई है और जिस आवास में वे रहना चाहते थे सरकार ने वह आवास भी उन्हें अलॉट करा दिया है।

अब एक समस्या सिर्फ बिजली बिल की है, जिसके निपटारे के लिए जीतन राम मांझी ने गुरुवार को सीएम नीतीश से मुलाकात भी की है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उनकी बिजली की समस्या भी सरकार खत्म कर देगी।