INSIDE STORY : बिहार का सबसे बड़ा ENCOUNTER। Maurya News18

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जानिए बिहार में दिल दहला देने वाला ENCOUNTER के बारे में । जानेंगे तो रूह कांप उठेगी ।

हैंड ग्रेनेड फेंके जाने के बाद भी गन्ने के खेत से बाहर नहीं निकले बदमाश। फिर पुलिस ने क्या किया…दिलचस्प रिपोर्ट।

मौर्य न्यूज18, पटना

अतुल कुमार

ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। गन्ने का खेत बन गया रणक्षेत्र। लगभग 48 घंटे यानी दो दिन तक चला बेतिया का दिल दहला देनेवाला हैंड ग्रेनेड वाला ENCOUNTER…

तत्कालीन डीएसपी गिरिजानंदन शर्मा की मानें तो पुलिस की ओर से 700 गोलियां चली थीं और दो दर्जन से ज्यादा हैंड ग्रेनेड फेंके गए थे, दूसरी ओर से न जाने कितनी गोलियां चली होंगी। कुख्यात से मुठभेड़ की कहानी सुनाते-सुनाते रिटायर्ड आईजी गिरिजानंदन शर्मा पुराने दिनों में खोते चले गए।

बगहा में पहली पोस्टिंग के बाद बेतिया में

बगहा में पहली पोस्टिंग के बाद बेतिया में डीएसपी बनकर गए। वहां साल 1982 से 1984 तक रहे। की बात है। उस वक्त वहां फिरौती के लिए किसी का भी अपहरण कर लेना आम हो चला था। बदमाशों के कई गिरोह काम कर रहे थे। डर-डर कर जीना लोगों की आदत-सी बन गई थी। गिरिजानंदन शर्मा के लिए अपहरण पर अंकुश लगाना किसी चुनौती से कम नहीं था

3 जून, 1983 की सुबह उन्हें अपने मुखबिर से सूचना मिलती है कि दियारा के गंडक क्षेत्र में कुछ कुख्यात अपराध की साजिश रच रहे हैं। दो सेक्शन फोर्स लेकर वे बताई गई जगह की ओर निकल पड़ते हैं।

सड़क पर बिल्कुल सन्नाटा। बीच-बीच में केवल कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनाई दे रही थी। टीम नवलपुर गांव पहुंचती है तो साइकिल पर दूध ले जाते कुछ लोग दिखाई पड़ते हैं। पूछताछ के क्रम में उनलोगों से पता चलता है कि दूधियावां गांव में कुछ संदिग्ध लोग देखे  गए हैं। अभी तक डीएसपी गिरिजानंदन शर्मा को ये तनिक भी भनक नहीं थी कि वो जिस अपराधी से टकराने जा रहे हैं, वह कोई साधारण बदमाश नहीं बल्कि बेतिया का दुर्दांत दस्यु है। उसका नाम सुनते ही लोग दहशत में आ जाते हैं।

करीब सुबह के 7-8 बजे टीम दूधियावां गांव पहुंच जाती है। तलाशी अभियान शुरू होता है। एक-एक कर पुलिस सभी घरों की तलाशी लेने लगती है, इसी बीच गिरोह के गुर्गे एक घर से भागते दिखाई पड़ते हैं। पुलिस उनको चेज करती है। तबतक वो लोग भागकर गन्ने के खेत में छिप जाते हैं। कई एकड़ में फैला था ईख का खेत। पुलिस के लिए काफी मुश्किल हो चला था सभी को पकड़ना।

तत्कालीन डीएसपी गिरिजानंदन शर्मा अपने सहकर्मियों के साथ अभी रणनीति बना ही रहे थे तभी

तत्कालीन डीएसपी गिरिजानंदन शर्मा अभी रणनीति बना ही रहे थे तभी गन्ने के खेत से गोलियां चलनी शुरू हो जाती हैं। धायं-धायं की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठता है। आनन-फानन में पुलिसवाले भी अपना पोजिशन ले लेते हैं। जवाबी फायरिंग शुरू कर दी जाती है। कभी पुलिस की ओर से गोली चलती है तो कभी बदमाशों की ओर से। बीच-बीच में शांति छा जाती है लेकिन फिर गोलियों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठता है।

पुलिस पर बदमाश भारी पड़ने लगते हैं। वे संख्या बल में ज्यादा थे। गोलियां भी ज्यादा बरसा रहे थे। इसी बीच एक इंस्पेक्टर हीरालाल झा समेत चार पुलिसकर्मी बदमाशों की गोली से घायल हो जाते हैं। उन्हें इलाज के लिए तत्काल बेतिया अस्पताल भेजा जाता है और मुख्यालय से अतिरिक्त फोर्स की डिमांड की जाती है।

जब गोली से बात नहीं बनी तो

…जब गोली से बात नहीं बनती है तो पुलिसवाले गन्ने के खेत में बदमाशों के ऊपर हैंड ग्रेनेड फेंकते हैं। दो दर्जन से अधिक हैंड ग्रेनेड फेंकने के बावजूद भी कोई बदमाश खेत से बाहर नहीं निकलता है। इस तरह शाम के पांच बजे तक पुलिस और अपराधियों के बीच लुका-छिपी का खेल चलते रहता है। खेत में आग लगा दी जाती है। फिर भी कोई परिणाम नहीं निकलता। पुलिस हाथ मलती रह जाती है। कुछ ट्रैक्टर को भी खेत में उतारा जाता है ताकि बदमाश तितर-बितर होकर बाहर निकलें। लेकिन नतीजा सिफर रहता है।

अब अगले पोस्ट में जानिए कि आखिर वो कौन कुख्यात था जिसको पकड़ने के लिए पुलिस इतना जोखिम उठा रही थी, क्या पुलिस को सफलता मिली, वो पकड़ा गया, मारा गया या फिर फरार हो गया…       

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए अतुल कुमार की रिपोर्ट।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए बिहार क्राइम जर्नलिज्म स्पेशलिस्ट अतुल कुमार की खास रिपोर्ट। रिपोर्ट पूरी तरह से रिसर्च और तत्कालीन पुलिस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से चर्चित गिरिजानंदन शर्मा से बातचीत पर आधारित है।