बिहार में पप्पू यादव ! जान बचाने वाला सुपर हीरो ! MAURYA NEWS18

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बिहार : चहुंओर गुंज रहा एक ही नाम आखिर क्यों ?

जनता की चीत्कार से डरिए सरकार, निकलिए बाहर…

जनता सब देखती है सरकारी बाबू…आप क्या कर रहे हैं ….

ट्वीटर बबुआ आप भी छोड़िए कोठरी, गद्दे पर बहुत सो लिए….जनता के बीच जाइए

पापा के लिए रोजा रखते, दुर्गा पूजा करते लेकिन जनता की जान पर आई तो कुछ दिख नहीं रहा …आखिर कैसे नेता हैं ,सिर्फ ट्वीट-ट्वीट खेलेंगे, आप पर भी सवाल तो उठेगा ।


विपक्ष के नेताओं के भी कुछ करने की घड़ी, आपकी वजह से भी सरकार को पकी-पकाई खिचड़ी मिलती रहती है । उठिए घुमिए …संभालिए एक-एक जिले को ।

नयन, पटना, मौर्य न्यूज18

सिर्फ पप्पू यादव का ही नाम क्यों ले रही जनता


बिहार में कोरोना । मुंह बाए है । लोगों को हॉस्पिटल चाहिए । बेड चाहिए । ऑक्सिजन चाहिए । वेंटिलेटर चाहिए । रेमडेसिविर दवा चाहिए । आरटीपीसीआर रिपोर्ट चाहिए । बिहार में सरकार भी है । मुख्मयमंत्री भी है । स्वास्थ्य मंत्री भी है । व्यवस्था भी है । हॉस्पिटल भी है । AMIIS, IGIMS, PMCH, NMCH, ESIC HOSPITAL भी है । साथ में हो-हल्ला मचाने वाले विपक्ष के नेता भी हैं । खादी पहनकर नेतागिरि करने वाले भी है । लेकिन कुछ नहीं है तो वो है चाहत । व्यवस्था के नाम पर सिर्फ ये कर रहा हूं, वो कर रहा हूं के अलावा कुछ दिख जाए तो बताइएगा । लेकिन इन सब के बीच बिहार की जनता के बीच जान बचाने वाला कोई सुपर हीरो है तो वो हैं पप्पू यादव । पूर्व सांसद हैं । जन अधिकार पार्टी लो. के सुप्रीमो हैं और जो खुल्लेआम जनता के बीच अस्पतालों का दौरा कर रहे ।


दुख की घड़ी में खड़ा होना इसको कहते हैं ….

फोन से लोगों की मदद कर रहे और ऑक्सिजन से लेकर रेमडेसिविर जैसी दवाइयां भी उपलब्ध करा रहे । लोगों की जान बचाने के लिए कोरोना की परवाह किए बिना सशरीर सुबह से देर रात तक सड़कों पर दौड़ लगा रहे हैं । हॉस्पिटल दर हॉस्पिटल जा रहे, ऑक्सिजन प्लांटों की खाक छान रहे हैं। अब इन्हें जान बचाने वाला सुपर हीरो ना कहा जाए तो क्या कहा जाए । सरकारी बाबू या सरकारी मंत्री इस तरह का जज्बा क्यों नहीं दिखा पा रहे, सवाल यही उठ रहा है बिहार में । कौन है जनता की सेवा के लिए खुल कर आइए सामने ।
इसी पर है मौर्य न्यूज18 के लिए “नयन” की ये पूरी रिपोर्ट जरा आप भी गौर करिए ….।

अब तक जो किया पप्पू यादव ने उस पर एक नज़र ….

  1. जिसे ऑक्सीजन चाहिए उसे ऑक्सीजन सिलेंडर दिया, खरीद कर भी बांटे ।
  2. जिसे रेमडेसिविर चाहिए , उसे रेमडेसिविर दिया….मुफ्त में दवा दी ।
  3. बेड की सुविधा चाहिए तो वो सुविधा भी मुहैया कराई
  4. जिसे अस्पतालों में जगह चाहिए ..इलाज चाहिए उसका प्रबंधन किया
  5. ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए ऑक्सीजन प्लांट का दौरा किया, जायजा लिया ।
  6. सबकी समस्या सुनने के लिए हेल्प लाइन नम्बर जारी किया ।
  7. खुद अस्पतालों में जाकर लोगों के हालचाल ले रहे ।
  8. अस्पतालों और सरकारी सिस्टम का लाइव प्रसारण कर सिस्टम की पोल पट्टी खोल रहे ।
  9. सरकार जो कहती है वो कितना कर रही है उसका लाइल पोस्टमार्टम सब दूध का दूध पानी का पानी कर दे रहे
  10. सुबह से लेकर देर रात तक कोरोना जैसे संकट से खुद लड़ रहे, जनता के बीच खड़े हो रहे । जान की परवाह किए बिना ।

सुबह से देर रात तक का सफर समझिए ….


सुबह-सुबह शायद आपकी आंख खुले तो राजेश रंजन पप्पू यादव के फेसबुक अकाउंट पर चले जाइए । आपको लाइव दिखेगा वो कर क्या रहे । आपको मिलेंगे वो पटना के किसी हॉस्पिटल में । चाहे वो PMCH , NMCH, IGIMS, ESIC BIHTA या अन्य प्राइवेट नर्सिंग होम में ही मिलेंगे । इसलिए नहीं की वो खुद अपना इलाज कराने के लिए वहां पहुंच रहे हैं । इसलिए कि लोगों की जानें जा रही है, उसे कैसे बचाया जाए। सिस्टम का पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखनी है तो पप्पू यादव के फेसबुक अकाउंट पर आप जाइए आपको खुद दिख जाएगा कि सरकारी सिस्टम का क्या हाल है । सरकार क्या कहती है और क्या हो रहा है । डॉक्टर हों या स्वास्थ्य कर्मी या सफाई कर्मी जिन्हें सरकार ने लगा रखा है वो किस तरह से फंक्शन कर रहे हैं । देखेंगे तो आंखे खुली की खुली रह जाएगी । सरकार रोज आपसे अखबारों के जरिए, सोशल मीडिया के जरिए, ट्वीट करके, टीवी समाचारों में आकर आपकी सलामती की दुआ मांगती है और कहती है कि सारा इंतजाम टंच है। जो कमी है उसे पूरा कर देंगे ।

सरकारी अस्पताल नहीं मौत का घर बना रखा है ….

लेकिन सच्चाई जानेंगे तो आपको हॉस्पिटल जीवन रक्षक नहीं साक्षात मौत का घर दिखेगा । अस्पताल गए नहीं की आप मौत की घड़ी गिनने वाली स्थिति में आ जाएंगे । जो हालत है वो साफ बयां करती है कि स्वास्थ्य विभाग कितना बढ़िया से खुद एसी में रहकर पब्लिक को सिर्फ दिलासा दिलाने में माहिर हो चला है । क्या सिर्फ दिलासा दिलाने से इलाज हो जाएगा । ये कर रहे हैं…, वो कर रहे हैं…, इससे काम चल जाएगा । नहीं तो फिर क्यों नहीं सरकारी सिस्टम अस्पतालों में खुद तैनात है । क्यों नहीं हर हॉस्पिटल के अंदर बाहर अधिकारियों को बड़े पैमाने पर मुस्तैद किया जा रहा है । क्यों नहीं मुख्यमंत्री खुद अस्पतालों का दौरा करके सिस्टम की टोह ले रहे । क्यों नहीं स्वास्थ्य मंत्री अस्पतालों में खुद कैंप कर रहे । कैसे इन लोगों को नींद आ रही है । ये घड़ी दुख की है । जनता को कोई शौख नहीं है अस्पतालों में भर्ती होने का, ऑक्सीजन सिलेंडर मुंह में लगाके रखने का, रेमडेसिविर जैसी किसी काम की दवा ना होकर भी 20 हजार से 80 हजार रूपये तक में खरीदने का ।

रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वालों को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही सरकार


मामूली सी 600 रूपये की दवा को इतना महंगा क्यों खरीदना पड़ रहा । ब्लैकमार्केटिंग क्यों हो रही है। ऐसा करने वालों को आप गिरफ्तार क्यों नहीं करती सरकार । एक्शन क्यों नहीं लेती । जब देश के नामचीन डॉक्टर कह रहे हैं ये रेमडेसिविर कोरोना से बचाव की सुई नहीं है तो फिर इसे लिखने वाले चिकित्सकों से बात क्यों नहीं की जा रही है । दवा कंपनी या दवा दुकानदारों पर एक्शन क्यों नहीं हो रहा । ऐसे ही सवालों को लेकर जब पप्पू यादव पोल पट्टी खोलने निकलते हैं तो सरकारी सिस्टम को मिरची लगती है, आखिर क्यों । इस समय राजनीति करने की जरूरत है क्या । इस समय इतने एनजीओ हैं उसकी सेवा क्यों नहीं ली जा रही है । आखिर सरकार सिर्फ मिंटिंग करने के लिए है और सोशल मीडिया पर लोगों को सांत्वना देने के लिए है । क्या इससे दुख दूर हो जाएगा । कोरोना भाग जाएगा । जाहिर है सिस्टम भ्रष्टतम लेव से भी उपर की स्थिति में है । सबको अपनी जान की फिक्र है । ऐसे में जनता के बीच कोई हनुमान बनकर खड़ा है तो वो है पप्पू यादव ही हैं । मान ना मान जान बचाने वाला सुपर हीरो देर रात तक कभी अस्पतालों में तो कभी ऑक्सीजन प्लांटों में मिल जाएगा ।


पप्पू यादव का घर का पता अब अस्पताल और ऑक्सीजन प्लांट ही हो गया है ….जाइए मिलिए और अपनी जान बाचइए ….।

कोई दूसरा विकल्प नहीं है । पप्पू यादव इस वक्त ना तो सांसद हैं औऱ ना ही विधायक हैं । ना ही सरकार के किसी अंग का हिस्सा । ना ही विपक्ष में सदन के अंदर किसी तरह की भूमिका लेकिन आपदा की बेला में वो उठ खड़े होते हैं । बाढ़ के समय भी जान की परवाह किए बिना लोगों को घर-घर तक आवश्यक सामग्री पहुंचाते देखा गया। लोगों की जान बचाने के लिए कमर भर पानी में तैरते दिखे । नौका से तो कभी ट्रैक्टर से तो कभी मोटरसाइकिल से । लोगों की जान बचे इसके अलावा किसी चीज की परवाह नहीं की । पटना जैसे इलाकों में ना तो उनका वोट बैंक है और ना ही कोई जनाधार फिर भी जनता की सेवा की बात आई तो वो उठ खड़े हुए ।

पटना में जब बाढ़ आई तो हाफ पैंट में सपरिवार जान बचाने सड़क पर खड़े ।
तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ।
जाप नेता पप्पू यादव बाढ़ आने के दौरान पटना में पीड़ितों को आवश्यक सामग्री पहुंचा हुए । फाइल फोटो ।

उस वक्त भी हाफ पैंट में घर से जान बचाकर निकले तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सरकार के सबसे बड़े सिस्टम के दूसरे मुखिया जी का ये हाल सबने देखा । लेकिन किसी ने ये नहीं देखा की वो किसी के लिए बीच पानी में खड़े हों । लेकिन पप्पू यादव की इस शैली पर वो भी जल-भूंज गए । गुस्सा उतारना शुरू किया । ये अलग बात है कि उनकी बोलती पप्पू यादव ने ऐसी बंद की कि सारी हेकरी ही गुम हो गई ।

ये वही ट्वीट का स्क्रीन शॉट है जिसे बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व वर्तमान में राज्य सभा के सदस्य सुशील मोदी ने पप्पू यादव पर टिप्पणी करते हुए लिखा था । उसी का अंश देखिए औऱ पढ़िए फिर समझ आइएगी कि कैसी राजनीति हो रही है। मिरची कितनी लगती है । खुद तो करेंगे कुछ नहीं लेकिन जनता के बीच ऐसे ट्वीट करने से पहले सोंचेंगे भी नहीं कि कर क्या रहे हैं । ये वक्त कौन सा है। यदि इसमें कोई सच्चाई है भी तो इस वक्त क्या इस तरह के ट्वीट करने का है सोचिए जरा । इसकी जगह वो राजनीति से उपर उठकर पप्पू यादव के जरिए ही जनता की सहायता की बात करते, धन्यवाद भी कर सकते थे । लेकिन इसका करारा जवाब दे दिया पप्पू यादव ने साफ कहा कि पैर छूकर इस वक्त आपकी भी सेवा कर दूंगा । हाफ पैंट पहनकर खुद जान बचाकर भागूंगा नहीं । – पप्पू यादव ने जो कहा ।

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जनता सब देखती है सरकारी बाबू । आप क्या कर रहे हैं ….
जनता की चीत्कार से डरिए सरकार । निकलिए बाहर ।


जनता को स्वास्थ्य सुविधा चाहिए । सरकार इसी बात के लिए होती है । कि दुख की घड़ी में सरकार खड़ी रहे । मौत का तांडव ना हो । मौत होने पर मुआवजे की घोषणा में माहिर सरकार नहीं चाहिए जनता को । जनता को जिंदगी देने वाली सरकार की जरूरत है । सांसे ले सके जनता उसको हवा चाहिए । शुद्घ पानी चाहिए । इतना करने में भी सरकारी सिस्टम को इतनी देर लग रही है या संभल नहीं रही स्थिति तो फिर सवाल तो उठेंगे । जनता तो बोलेगी । चीत्कारेगी । उसकी चीत्कार से डरिए सरकार । निकलिए बाहर । जाइए घूमिए अस्पताल-दर अस्पताल । ऑक्सीजन प्लांटों का हाल जाकर खुद देखिए । देखिए आपका सिस्टम कितना दुरूस्त है । वहां भी जनता का पैसा ही लगा हुआ है । जनता के पैसे पर चलने वाली सरकार आखिर यूं कैसे सोई रह सकती । इस तरह से कैसे चलेगा । दिलासे से कैसे काम चलेगा । जारा सोंचिएगा ।


ट्वीटर बबुआ आप भी छोड़िए कोठरी, गद्दे पर बहुत सो लिए….जनता के बीच जाइए


दूसरी ओऱ मजे की बात ये है कि सरकारी सिस्टम तो सरकारी सिस्टम है, कितना भी गा बजा लीजिए…सुधरने वाली नहीं है। लेकिन देखें तो विपक्ष के नेता जिनको सत्ता पक्ष ने ट्वीटर बबुआ नाम दे रखा है वो भी इस समय बिल में समाए हुए हैं । कुछ दिन पहले तक उनके घर में कभी कोई रोजा रख रहा था तो कभी दुर्गा मां की साधना करने में लीन था । पता चला कि ये सब अपने पिता की सलामती के लिए कर रहे हैं । लेकिन अब जब जनता मौत के गाल में समा रही है तो कहीं से कोई तस्वीर नहीं दिख रही कि वो दुर्गा मां की शरण में, उनकी चरणों में गिरकर साधना कर रहे हैं कि मां बचा लो जनता को । ना ही रोजा ही रख रहे । घर से बाहर शायद ही किसी नर्सिंग होम में भी घूम कर देख लिया होता । किसी ऑक्सीजन प्लांट का जायजा ले लिया होता । सरकारी सिस्टम का पोस्टमार्टम करके देखते । घूम कर देखते कि सरकारी अस्पातलों में जनता का इलाज किस तरह से चल रहा है । हां, एक पोस्टर रिलीज कर दिया कि कंट्रोल रूम में फोन करके मदद मांगिए ।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ विपक्ष के नेता (राजद से) पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव । फाइल फोटो ।

भगवान मालिक है जनता तो तराही-तराही कर रही है उनके कंट्रोल रूम में ना जाने किसका फोन जा रहा, जा भी रहा है या नहीं । कुछ नहीं सिर्फ हवा में तीर चलती रहनी चाहिए । उनको भी पिता के जेल से बाहर निकले की चिंता के अलावा कुछ नहीं दिखता , अब इस जुगार में हैं कि तीर से फिर से प्रेम हो जाए और सत्ता में लौट जाउं ।

दूसरी पार्टी के नेताओं का भी वही हाल है, सबको अपनी जान की पड़ी है ….

दूसरी पार्टी के नेताओं का भी वही हाल है । टीवी डिवेट में शामिल होने का तो टाइम मिल रहा लेकिन अस्पतालों में दुखियों का दूख दूर करने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं दिखती । ऐसे में अगर कोई पप्पू यादव नाम का इंसान जनता के बीच जोखिम लेकर उसकी बातों को सुन रहा है, जो बन रहा है कर रहा है । लोगों की जान बचाने में औऱ सिस्टम के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहा है तो उसे आप और हम नौटंकी कह रहे । राजनीति कह रहे हैं । कोस रहे हैं कि वो घमकी देकर काम करवाते हैं । बेशक यदि ऐसा करके किसी की जान बचाई जा सकती है तो करने में कोई गुरेज नहीं होनी चाहिए । तभी तो बिहार की जनता में एक ही नाम गुंज रहा है पप्पू यादव । पप्पू यादव । जान बचाने वाला सुपर हीरो ।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।