न पैसा, न गाड़ी : दिहाड़ी से घर चलाने वाली मजदूर बनी विधायक : MAURYA NEWS18

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पश्चिम बंगाल में सल्टौरा निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की

तृणमूल कांग्रेस के संतोष कुमार मोंडल को 4,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया।

पति सरबन दिहारी मजदूरी का काम करते हैं। जो रोजाना सिर्फ 400 रुपए कमा पाते हैं।

जो झोपड़ी में रहती है, 3 बकरियाँ व 3 गौएं उसकी सम्पत्ति है।

चंदना बाउरी, एक दिहाड़ी मजदूर भोगी की पत्नी बनी विधायक /

KOLKATTA, MAURYA NEWS18

भले ही बंगाल में भाजपा को बहुमत न मिला हो लेकिन भाजपा के लिए चंदना बाउरी, एक दिहाड़ी मजदूर भोगी की पत्नी, जिन्होंने पश्चिम बंगाल में सल्टौरा निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। 30 वर्षीय चंदना बाउरी ने तृणमूल कांग्रेस के संतोष कुमार मोंडल को 4,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया। पति मजदूरी करते तथा शपथ पत्र के मुताबिक बैंक खाते में सिर्फ 6335 रुपये थे, बताया जा रहा है कि चंदना बाउरी के पति सरबन दिहारी मजदूरी का काम करते हैं। जो रोजाना सिर्फ 400 रुपए कमा पाते हैं।

पति और पत्नी दोनों मनरेगा में पंजीकृत मजदूर हैं। महज़ 12वीं तक ही पढ़ी हैं। उनके तीन बच्चे भी हैं। चुनाव आयोग में दिए गए शपथ पत्र के मुताबिक चंदना के बैंक खाते में सिर्फ 6335 रुपये हैं। संपत्ति के नाम पर उनके पास 3 बकरियां, 3 गाए और एक झोपड़ी है। उनके घर में टॉयलेट तक नहीं है शपथपत्र के अनुसार उनके उनकी कुल अचल संपत्ति 31985 रुपए है।पार्टी के प्रति वह इतनी ज्यादा समर्पित हैं कि प्रचार के लिए रोजाना कमल के प्रिंट वाली भगवा रंग की साड़ी पहनकर निकलती थी।

उनकी विनम्र शुरुआत से अधिक प्रेरक बनी। इस सीट में सबसे दिलचस्प की बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 21 मार्च को संबोधित करते हुए कहा था। बांकुरा की सालतोरा विस सीट से भाजपा उम्मीदवार चंदना बाउरी ममता बनर्जी को चुनौती देगी। जो, की वाकई में सच साबित हुआ।

विधायक चंदना बाउरी

चुनाव लड़ रही चंदना का मुकाबला टीएमसी के संतोष मोंडल से हुआ था। इस मुकाबले में चंदना ने चार हजार से अधिक वोटों से संतोष मोंडल का हरा दिया। चंदना को 42167 मिले, जबकि संतोष को 38393 वोट मिले।कौन हैं चंदना बाउरी जिसे प्रधानमंत्री खुद दावेदारी ठोके थे:

आपको‌ बता दें कि भाजपा ने सालतोरा विधानसभा सीट से चंदना बाउरी नामक महिला को उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि चंदना बेहद की गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वहीं, एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, चंदना बाउरी पश्चिम बंगाल के सबसे गरीब उम्मीदवारों में से एक हैं। चंदना के पास प्रचार के लिए न तो पैसे थे और न ही कोई गाड़ी। इसके अलावा उनके साथ समर्थकों का हुजूम भी नहीं था। फिर भी जीत गई।