खगड़िया, बिहार।
खगड़िया कांग्रेस में फिर से खुलकर नई राजनीति को जन्म दी जा रही है, खगड़िया में 20 जनवरी को #मनरेगा_बचाओ कार्यक्रम के बहाने इसकी फिर से शुरुआत हो रही है, जहां पुराने कांग्रेसियों की अनुपस्थिति और बाहरी लोगों का प्रभाव देखा जा रहा है।
बिहार कांग्रेस के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, यह सवाल उठता है कि क्या बिहार प्रभारी कृष्ण अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की जोड़ी सही मायने में पार्टी को मजबूत करने में जुटी है?
खगड़िया के सिटिंग विधायक रहे छत्रपति यादव को टिकट से वंचित किया गया । चुनाव के समय खगड़िया की जनता के बीच ये चर्चा का विषय तो रहा ही, वर्तमान में देखें तो
मनरेगा कार्यक्रम के बहाने खगड़िया में पूर्व विधायक छत्रपति यादव जैसे सफल नेता को अवसर नहीं देने से क्या पार्टी को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है?
पूर्व विधायक छत्रपति यादव के प्रति AICC की ओर से जब पार्टी से निकाले जाने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई फिर कार्यक्रम में इगनोर क्यों किया गया ?

बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और बिहार प्रभारी अल्लावरू के निर्णयों से यह सवाल उठता है कि क्या पूर्व विधायक छत्रपति यादव के साथ न्याय हो रहा है? या AICC से हटकर अपनी राजनीति कर रहे हैं ? खगड़िया की जनता के बीच इस बात की काफी चर्चा हो रही है !
उधर, पटना में 16 जनवरी को बिहार कांग्रेस के दिग्गज लीडर डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह पूर्व विधायक छत्रपति यादव के आमंत्रण पर उनके घर भी पहुंचे थे और कहा था कि जो हुआ सो हुआ अब हम सब मिलकर बिहार कांग्रेस को मजबूती से लेकर चलेंगे । सवाल उठता है कि क्या इतने दिग्गज नेता की बातों का भी कोई असर नहीं है ? कई सवाल हैं जो बिहार कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। आखिर बिहार कांग्रेस को हाशिए पर ले जाने वाला कौन है ?

बिहार के खगड़िया से मौर्य न्यूज़18 की रिपोर्ट।

