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भाजपा का लवजेहाद, जदयू के नखरे

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नयन की नज़र से- राजनीतिक लव स्टोरी।

पटना, मौर्य न्यूज18

टिप-टिप बरसा पानी। पानी में आग लगी। आग लगी सीने में तो जलने लगा सारा बदन। ये शॉग राजनीति के खिलाडियों पर विचार के लिए लाया जाए तो वर्तमान दौर में जदयू पर खासकर फिट बैठ रही है। वजह भी है। जदयू के नखरे औऱ भाजपा का लवजेहाद। कमाल का है।

लोकसभा चुनाव से पहले जदयू औऱ भाजपा का प्यार देखते बनता था। इश्क में बहुत कुछ लुटाया पिटाया जाता रहा है। सो, भाजपा ने भी बिहार में पांच सिटिंग सीटे जदयू के लव में लुटा दिए। चर्चा खूब हुई। सरेआम हुई। लैला-मंजनूं। हीर-रांझा। टाइप प्यार के लिए कुर्बानी देने वाले सबके सब मुंह ताकते रह गए। सबके किस्से पीछे छूट गए जब सीटें 17-17 बांट ली गईं। हम तेरे बिन रह नहीं सकते…या यूं कहिए अब जीना है बस तेरे लिए टाइप । राजनीति लव स्टोरी चल पड़ी। वैसे, जहां प्यार होता है, तकड़ार भी वहीं होता। जदयू का तकड़ाड़ ये बताता है कि प्यार कितना गहरा है। वैसे भी ये प्यार औऱ तक़ड़ाड़ कोई नया नहीं दशकों पुराना है। इस प्यार में देखें तो बेक्रअप भी है। जब गुस्से में राजद के रूप में सौतन खोज ली गई। और कांग्रेस को सहवाला बनाकर शादी तक रचा ली गई लेकिन पहला प्यार इतना कमजोर ना था।सो, बहारे फिर आयीं। आ अब घर लौट चले कि तर्ज पर बहारे लौट भी आयीं। लेकिन एकबार फिर लव-स्टोरी में ट्यूस्ट आया है। नखरे जदयू के और प्यार भाजपा के क्या गुल खिलाती है इसबार दुनिया कि नज़रे टिकीं है इस पॉलिटिकल लव स्टोरी को जानने समझने को।

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अब थोड़ी सी सच्चाई जाते हैं और कल्पना करके कुछ ख्वाब देखते हैं… क्या है इस नखरें में।

महोदय को ये भी नहीं भूलना चाहिए कि 2014 में तमतमा के अकेले मैदान में उतरे थे. और अपनी क्षमता से दो सीट लाए थे,। दो सीट के बाद हद तो तब हो गई कि अधिकांश सीटों पर जमानत तक जब्त हो गई थी। थोड़ा कड़वे लहजे में कहें तो औकात शायद इसी को कहते हैं। जो दुनिया देख चुकी है। और आप भी। खैर, अब वर्तमान की बात कर लेते है, 2019 में सीट ज्यादा मिलीं तो जरूरी नहीं कि मंत्रालय भी ज्यादा ही मिले। सरकार हर हाल में साथ चलाएंगे…इस कमिटमेंट के तहत आपको भी लिया गया। बांकी सहयोगी को भी। सीट कम ज्यादा एक अलग विषय है। पहले, आपको सरकार ने बुलाया तो स्वीकार करना सच्ची दोस्ती का सबूत होता। लेकिन नहीं आप कुछ उल्टा करेंगे। कुछ कुलटा करेंगे। ऐसा सबको लग भी रहा था। हुआ भी वही। साफ है, वर्तमान प्रकरण में यहां महोदय का ये इनकार और दुत्कार बताता है कि ये कैसे हैं । जरा इन्हें शिवसेना वालों से सीखनी चाहिए। आप से ज्याद सीट पाकर भी वो सरकार के निर्णय के साथ रही। दोस्ती इसे कहतें है। आपके इसी रवैये के कारण डीएनए पर चर्चा होने लगती है।

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वैसे, सच्चाई छुपती नहीं । इससे ये भी साबित हो गया कि लालू प्रसाद, महोदय के बारे में जो कहते हैं, उसपर मुहर लगती है। डर है कि कहीं इसबार भी डीएनए वाली जिन्न फिर ना बाहर आ जाए। जो कहीं से उचित नहीं होगा। लेकिन इस रवैये से डर लगता है। आपके पुराने रिकार्ड को देखा जाए तो, आपने बिहार के विशेष दर्जे को लेकर ऐसा हाय-तौबा मचाया था कि लगा जैसे इसके बिना तो आप भाजपा को छोड़ेंगे नहीं। आरएसएस मुक्त देश बनाने चले थे ना आप। यही कमिटमेंट था ना आपका। बस याद दिला रहा हूं। लेकिन आगे क्या हुआ। सब ताक पर रख आये। सीट पाने के लिएऐ सत्ता कायम रहे। शायद इसलिए फिर से मुहब्बत कर बैठे। लव में ऐसा होता है। प्यार अंधा ही होता है। पिछली सारी बातें भूला दी जाती है। लेकिन, आपका वक्त आया तो अब आप मंत्रलाय के लिए नखरे करने लगे। काश आप बिहार के विशेष दर्जे देने की शर्त पर फिर से मुहब्बत किया होता। आरएसएस मुक्त भारत बनाने के मुद्दे वाली शर्त पर मुहब्बत किया होता तो आपके डीएनए की चर्चा करने वालों की मुंह नोच ली जा सकती थी। लेकिन नहीं। आपकी मन-मर्जियां चलती है। वक्त देखकर आपके नखरे फैलते औऱ शिकुरते हैं। खैर, किसी को दोषी ठहराने से पहले सोचिए सिक्का कैसा है। दुनिया में हर योद्दा का पतन काल आता है…उसके लिए एक कहावत प्रसिद्ध है- विनाश काले….वाली..। जो आपके गले ना लग जाए।

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अब जरा दूसरा सिन भी सोचिए …ये भी हो सकता है कि महोदय अपनी ही पार्टी में तालमेल नहीं बिठा रहे हों, ये तय नहीं कर पा रहें हों कि किसको मंत्री पद देकर खुश करें किसको नाराज। बेहतर है कुछ लो ही मत। और बदनामी अगले के मत्थे ठोंक दो। यहां समझने वाली बात है कि 17 सीटें जो अपनी पांच सिंटिंग सीटें छोड़कर आपको साथ लेकर चलने को तैयार हुई। उसे दो-तीन मंत्रालय देने में क्या दिक्कत होगी। यहां ये भी हो सकता है कि आप उपप्रधानमंत्री पद भी मांग रहें हों।या आगे चलकर ये भी पद आपको चाहिए हो। क्योंकि बराबरी का दर्जा जो चाहिए आपको। अंदर की बात तो ऐसी ही लगती है। कौन जानता है अपके सिक्के को। लालू जी तो शिकार हो चुके हैं। लेकिन इस दफा भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। मुझे ऐसा लगता है।

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वैसे भाजपा के पास आप जैसे दर्जनभर मुख्यमंत्री चाणक्य बैठे हैं। राजनीति में लोहा मनवाने में भाजपा का जोड़ नहीं । आप खेल खेलेंगे, तो भाजपा प्यार करेगी ऐसा तो इसबार नहीं ही होगा। फिलहाल, भाजपा का लव जेहाद जारी रहेगा। वो आपसे प्यार कती रहेगी और आप नाटक करते रहेंगे। ऐसा लगता है।

नयन की नज़र से आप देखते रहिए सारी दुनिया।

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