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होमBIHAR NEWSएक मुलाकात- पूर्व सीएम की बहू से !

एक मुलाकात- पूर्व सीएम की बहू से !

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बोलीं, सीएम की बहू कहलाई, सांसद की पत्नी कहलाई और अब सांसद की मां कहलाउंगी

नूतन पांडेय, बिहार के पूर्व मुख्यंमत्री केदार पांडेय की बहू हैं, कांग्रेस को मानती है परिवार

पति मनोज पांडेय बेतिया से सांसद रहे, कैंसर से रहे थे पीड़ित, 1996 में दुनिया छोड़ गए

अब बेटा शाश्वत केदार पांडेय बाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के हैं उम्मीदवार

नीलम बोलीं, जनता के बुलावे पर राजनीति में लौटी और बेटे को समाज सेवा में झोंका है

नयन, मौर्य न्यूज18, पटना, बिहार ।

बाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र से खास रिपोर्ट

मेरा बेटा शाश्वत केदार पांडेय जनता के बीच है। अब वो सांसद बनेगा और मैं एक सांसद की मां कहलाऊंगी। ऐसा होता हुआ में देख रही हूं। मुझे जनता पर पूरा यकीन है वो अपना सांसद शाश्वत केदार को ही चुनने को बेताब है। इस तरह मेरा सपना पूरा होने को है।

कुछ इस तरह अपनी भावनाओं को व्यक्त करती हुईं, कांग्रेस वर्क बनकर नूतन पांडेय ने चंपारण की धरती से राजनीति की दूसरी पारी की शुरूआत कर दी है।

कहती हैं, पति सांसद मनोज पाडेय 1996 में दुनिया छोड़ चले गये। कैंसर ने उन्हें असमय हमलोगों के बीच से दूर कर दिया। तब वो बेतिया से सांसद थे। मेरे पास एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए।
बोलते-बोलते उनकी आंखे नम हो जाती है, आंखे आंसुओं से भर आते हैं। आंचल से आंखों को पोंछती है। औऱ तर गले से शिशकती आवाजें शायद वो सब सीन आंखों के सामने होने का प्रमाण देता रहा और वो बोलती रहीं।

कहने लगी, उस वक्त कई लोगों ने कहा भी आपको कांग्रेस टिकट देगी औऱ आप चुनाव जीत भी जाएंगी। सांसद बन जाएंगी तो बच्चे की परवरिश भी अच्छे से हो जाएगी। जनता चाहती है कि आप केदार बाबू और मनोज बाबू की कमी को पूरा करें। पर मैं ऐसा करने से इनकार कर दी। लाख लोगों ने मनाया पर मैं साफ इनकार कर दी।

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कहने लगीं, मेरे सामने दो बच्चों की जिंदगी अहम थी। पति को खोकर अपने बच्चों को अधर में डालने वाली मां मैं नहीं बनना चाहती। राजनीति सेवा भाव के लिए है ना की पेशे के लिए। इसलिए मै अपना स्टैंड क्लियर रखी। इस इनकार के बाद अपने दोनों बच्चों को पालना मेरे लिए ससुर औऱ पति की अनुपस्थिति में बहुत ब़ड़ी चुनौती थी। पर मैं इस चुनौती को स्वीकार की औऱ नौकरी करनी शुरू की । फिर, दिल्ली चली गई। वहीं जॉब की और बच्चों की पढ़ाई- लिखाई और उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठाने लगी ।

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नौकरी के दौरान दिव्यांगों की सेवा में भी लगी रही। अपनी नौकरी की सैलरी से दिव्यांगों की सेवा करना मुझे सुकून देता रहा। इस काम के लिए नेशनल अवार्ड भी मिले। इससे प्रोत्साहित हुई। इस बीच दोनों बच्चे एक बेटी जो डॉक्टर बनी और बेटा शाश्वत एमबीए करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े पदों पर रह कर काम शुरू कर दिया। ये सब मेरे लिए काफी सुख देने वाला पल था।जिदगी पटरी पर लौट गई थी। लेकिन मेरे मन में एक बात जरूर थी कि पति के निधन के वक्त जनता की चाहत कि मैं फिर से राजनीति में लौटू । अब इस बारे में अब सोंचने का वक्त आ गया है। औऱ इसी सोंच के साथ मैं पिछले कई सालों से कांग्रेस में एक साधारण वर्कर बनकर कर पार्टी की सेवा देनी शुरू की।

यही क्रम कई सालों से चला आ रहा है। फिर मैंने अपने बेटे शाश्वत केदार से भी बोली कि तुम्हे भी नौकरी के साथ समाज सेवा पर ध्यान देना होगा। औऱ कांग्रेस पार्टी में वर्कर बनकर ऐसा किया जा सकता है। फिर मेरे बेटे ने भी बिहार में युवा कांग्रेस विंग को ज्वाइन किया औऱ राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अब तो कई सालों से पार्टी में सेवा दे रहे हैं। कार्यशैली सीखकर जनता के बीच जाकर काफी मेहनत भी कर रहे हैं।

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नूतन कहती हैं कि कभी भी टिकट के लिए कोई बहुत जद्दोजहद नहीं करनी पड़ी। कांग्रेस 1996 की बात अब तक नहीं भूली है और यही कारण है कि अब मेरा बेटा शाश्वत केदार पांडेय बाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर चुनाल लड़़ रहा है। बिहार कांग्रेस के नेता औऱ दिल्ली के नेताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से इस संबंध में बात की और राहुल गांधी ने तुरंत टिकट देने पर सहमति जतायी। अब शाश्वत केदार राजनीति के मैदान में हैं।

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सवाल- ये पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस परिवार को ज्यादा देखती हैं। क्या विरासत में मिली राजनीति को ही कांग्रेस आगे बढ़ाने की परंपरा को अब भी फॉलो करती है ?

नूतन पांडेय- कहती हैं कांग्रेस से जुड़े हर व्यक्ति पार्टी में परिवार की तरह खुद को समझता है। पार्टी सिर्फ राजनीति नहीं करती बल्कि अपने वर्कर या पार्टी की सेवा करने वाले नेताओं को परिवार की तरह मान-सम्मान और सेवा भी देती है। ताकि कभी कोई परेशानी ना हो। कांग्रेस कोई छोटा-मोटा संगठन नहीं है और ना ही यहां कोई व्यक्तिगत लाभ के लिए कोई कुछ कर सकता है।

और रही बात विरासत में मिली राजनीति की या कांग्रेस के इस परंपरा में काम करने की तो ये सारी बातें वही करते जो राजनीति को बिजनेस समझ रखा है। और उसी दृष्टिकोण से देखते हैं। जबकि बिना काम किए, बिना किसी मेहनत के यहां कुछ हांसिल नहीं होता। जनता एक्शेप्ट करना भी जनती है और रिजेक्ट करना भी।

कहने लगीं, मैं कुछ जरूरी बातें कहना चाहती हूं उसे आप जरूर सुनिए। फिर आपको सारे सवालों का उत्तर मिल जाएगा।

कहने लगीं हमारे ससुर जी कांग्रेस लीडर रहे। बिहार के मुख्यमंत्री बने। पति कांग्रेस लीडर रहे बेतिया से सांसद बने। लेकि दोनों लोगों ने अपनी बदौलत अपने हक को पाया। जनता की सेवा करने का दोनों लोगों का अपना अंदाज था। कहती हैं, पति हमेशा कहते थे, जनप्रतिनिधि का मतलब है पहले जनहित फिर कुछ और जबतक ऐसा करने की क्षमता आपमें नहीं है तब तक आप उम्मीदवारी के योग्य भी नहीं। औऱ यही कारण है कि मैं नौकरी करते हुए भी अपने बच्चों की जनसेवा की भावनाओं को कूट-कूट कर भरी। दादा जी औऱ पिता जी की जनसेवा के किस्से सुनाती रही। कि किस तरह से वो अपने घर परिवार से पहले जनता को समझते रहे, उसकी भूख-प्यास मिटाने में लगे रहे। यही बात बेटे शाश्वत केदार में भी मुझे दिखने लगी है। जनसेवा उसमें कूट-कूट कर भरी है। बाल्मीकिनगर की जनता की चाहत है, उनका भरपूर प्यार भी मिल रहा कि शाश्वत ही बनेगें सांसद।

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कहती हैं कि टिकट मिलने से पहले मैंने शाश्वत को नौकरी त्यागे को कहा। मैंने कहा कि लोकसभा सदस्य बनने से पहले आप अपने को बेहतर इंसान बनाएं, फिर मानसिक रूप से खुद का तैयार करें कि हर हाल में जनता के लिए काम करेंगे औऱ जनता के बीच में हमेशा उपलब्ध रहेंगे। तभी आप चुनावी मैदान में जाएं । फिर जनता से वोट के लिए निवेदन करें।

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नूतन कहती हैं, शाश्वत में अपने बाबा यानि दादा औऱ पिता के सपने को आगे बढ़ाने की भरपूर ललक है। और वो जनता की भरपूर सेवा करेगा औऱ अभी काफी युवा है। युवा सोंच औऱ उसकी हाइयर एजुकेशन क्षेत्र के विकास में जरूर काम आएंगा।

वो कहती हैं- बाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र की जनता से मेरी भी अपील है कि कांग्रेस प्रत्यासी शाश्वत केदार पांडेय पर अपना प्यार बरसाती रहे। सांसद जरूर बन जाएंगे।

मौर्य न्यूज18 की खास रिपोर्ट।

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