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मंगलवार, जून 22, 2021
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RSS के लैब में यूपी भाजपा का फार्मूला तैयार ! संघ बोला-योगी ही यूपी के हीरो ! Maurya News18

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RSS ने आंखें तरेरी, कहा- मोदी-योगी नहीं यूपी की सोंचो…

संघ ने कहा – सबकुछ भुलाकर चलो 2022 की ओर !

खबरें यही आती रही कि यूपी में मोदी-योगी और भागवत का राग…मुझको जो पसंद है वही बात करेंगे, अब ऐसा नहीं होगा ।

ये भी हुआ तय कि अब बांकी राज्यों के चुनाव में पीएम मोदी का चेहरा इस्तेमाल नहीं होगा !

RSS का योगी मॉडल तैयार, कहा – यहां चलेगा सिर्फ योगी-योगी और मोदी-शाह मिलकर करें काम …!

UP चुनाव 2022 के लिए संघ की बैठक में बनी कई और रणनीति

नयन, नई दिल्ली, मौर्य न्यूज18

उत्तरप्रदेश देश का आधा हिस्सा इसी में है । यहां चुनाव होना है । 2022 में फाइनल मुकाबले के लिए हर पार्टी रणनीत बना रही है । भाजपा सत्ता में है तो कहीं खिसक ना जाए । सो, जीत का फार्मूला । सत्ता कायम रखने का फार्मूला अभी से तैयार कर लिया गया है । आइए इस रिपोर्ट के जरिए फार्मूले को समझते हैं ।


.सब ठीक नहीं चल रहा…योगी के बर्थ डे रिएक्शन ने पोल खोल दी..

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लैब में इस फार्मूले को तैयार किया गया है । जिसका केमिकल रिएक्शन भी पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा है । केमिकल रिएक्श उस दिन साफ दिखा जिस दिन यूपी सीएम योगी आदित्य नाथ का अवतरण दिवस था…यानि आम बोलचाल में बर्थ डे से ज्यादा समझ पाएंगे आप । सो, सीएम योगी का बर्थ डे पिछले दिनों था,…उस दिन आरएसएस के लैब में यूपी के लिए तैयार फार्मूले का रिएक्श भी देखा गया । देखा ये गया कि केमिकल लोचे में योगी साहब को भाजपा के तीन महत्वपूर्ण वैज्ञानिकों ने सीएम योगी के जन्म दिन पर बधाई तक नहीं दी । भाजपा के तीन महत्वपूर्ण थींकटैंक वैज्ञानिक ही कहिए पीएम मोदी, अमित शाह और डॉ जेपी नड़्डा ।

इन तीनों ने सीएम योगी को कोई बधाई नहीं दी । वैसे, उड़ती खबर ये आई कि बधाई फोन से दे दी गई है लेकिन पिछला रिकार्ड ये बताता है कि योगी के सीएम बनने के बाद से ये तीनों महानेता हर वर्ष ट्वीटर पर बधाई दी थी लेकिन इस बार वहां कुछ नहीं दिखा, यानि ट्वीटर पर कोई बधाई नहीं । फिर क्या था, इस केमिकल रिएक्शन की खबर पूरे देश में आग की तरह फैल गई और सारे भाजपाइयों से कहा गया कि इस मुद्दे पर मुंह में मास्क लगाकर रहें वरना कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक वायरस पकड़ लेगा, अगर ज्यादा तूल दिया तो लाइफ किसी काम का नहीं रह जाएगा । हुआ भी वहीं…इस मुद्दे को तूल नहीं दिया गया…शांति से निकल गई बात। लेकिन केमिकल रिएक्शन का अंदर खाने में असर देखा जा रहा है ।


इन सब के बीच आरएसएस मोहन भागवत ने भी रिएक्शन का जवाब रिएक्शन से दिया । भाजपा के तीनों शीर्ष महारथी नेताओं ने भोज पर उन्हें निमंत्रण दिया । लेकिन मोहन भागवत ने तबीयत नासाज़ होने की बात कहकर भोज का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया.

खेल यहीं नहीं थमा…आगे फिर मीटिंग हुई और आरएसएस ने साफ कर दिया कि यूपी में तो केवल और केवल योगी नाम ही चलेगा…पीएम मोदी का फेस यहां के लिए जरूरी नहीं है । हां, मोदी और शाह पूरे तन-मन से यूपी में अपने योगदान की तैयारी में जुट जाएं, बिना किसी लाय लपेट के । आरएसएस के इस फार्मूले में ये भी साफ कर दिया गया कि कोई कैबिनेट विस्तार भी नहीं होगा और फिर दोबारा पीएम मोदी और योगी के बीच तकरार जैसी स्थिति दिखनी नहीं चाहिए । इतना हार्ड फार्मूला भाजपा के हवाले कर दिया गया ।


इस फार्मूले को संगठन के राष्ट्रीय मंत्री बीएल संतोष और यूपी के भाजपा प्रभारी राधामोहन सिंह और सिनियर लीडर राजनाथ सिंह को सौंपते हुए भाजपा अध्यक्ष डॉ जेपी नड्डा के हवाले कर दिया गया ।

अब तस्वीर पूरी तरह से साफ है…यूपी में होना क्या है । अब पूरी तरह से गेंद योगी के पाले में है। यहां ऐसा भी नहीं है कि सीएम योगी को ढ़िला छोड़ दिया गया है । सीएम योगी को भी टास्क सौंप दिए गए हैं ।

योगी को भी दिया गया है टास्क

टास्क ये कि ठाकुर वाली छवि से बाहर निकलने के लिए एड़ी-चोटी एक कर दें । ओबीसी का साथ थामे रखने के लिए पैनी नज़र बनाए रखें । उनकी खुशी में ही सबकी खुशी है । बह्ममणों को थोड़ा पूज लेने में कोई दिक्कत नहीं है, सो, इसका भी प्रबंध कर लिया जाए । यहां सीएम योगी को ये सब फटाफट करने को कहा गया है । ताकि कुछ माह में ही तस्वीर बदलती दिखे । लगे कि हां, जो नाराज खेमा है उसके अंदर विश्वास पैदा होने लगे कि सीएम योगी मेरी भी सुनते हैं…और थोड़ी याचक वाली भूमिका में भी आएं। तन कर और अड़ कर वाली स्थिति से बचने को कहा गया है ।


ये फार्मूला सीएम योगी को अच्छी तरह से समझा दिया गया है । जो उन्हें जल्द से जल्द कर के दिखाना ही होगा । तभी आरएसएस सीएम योगी की पीठ पर मुस्तैदी से खड़ा रह सकेगा । कहा ये भी जा रहा है कि सीएम योगी को ये फार्मूला पसंद आया है , उनका मानना है कि उन्हें लोग ठाकुर वाली छवि से आंकते हैं वो गलत है…हमने अबतक वही किया जो गलत थे…उन्हें बख्सा नहीं और जो सही थे उन्हें कभी तंग नहीं किया । उनके खेमे से बात ये कही जा रही है कि हमने भ्रष्टाचारियों, अपराधियों और गुंडा तत्वों का सफाया करने का वादा किया था…

सो, जनता के इस वायदे को पूरा करने के लिए मुझे जो भी कुर्बानी देनी पड़ी मैंने दी और रही बात सबको साथ लेकर चलने की तो…संगठन में ऐसा कोई कह नहीं सकता जिसकी मैंने सुनी नहीं और सही मांग को मैंने पूरा नहीं किया हो…चाहे वो जिस जाति, धर्म, समुदाय के लोग रहे हों। हिदुत्व वाली छवि के लिए भी लोग जानते हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हिदुत्व के नाम पर खिलवाड़ करने वाले को मैंने राजनीति कारणों या स्वार्थवस किसी तरह की छूट दी हो ।

सीएम योगी के लिए आरएसएस ही एकमात्र सहारा


कहने वाले कहते हैं कि , सीएम योगी का खेमा, आरएसएस का दिल जीतने में कायमयाब दिख रहा है। और सीएम योगी के पीठ पर आरएसएस का ही एकमात्र हाथ है, आरएसएस ही सहारा है । सीएम बनने में भी आरएसएस का ही योगदान है..वरना भाजपा के थींकटैंक ने तो भाजपा नेता ई. मनोज सिन्हा के नाम की घोषण तक कर ही दी थी…जो अभी वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल हैं । ऐसे में योगी आदित्य नाथ किसी गलतफहमी के शिकार भी नहीं है कि आरएसएस छोड़कर उनका कोई माइ-बाप है । सो, वो वही कर रहे जो आरएसएस की ओऱ से कहा जा रहा ।

यूपी में भाजपा की लड़ाई भाजपा से ही


यूपी में कह सकते हैं कि सत्ताधारी भाजपा में लड़ाई भाजपा और भाजपा के बीच ही है जिसमें आरएसएस जज की भूमिका में है, मेन एम्पायर के रूप में है। खेल शुरू होने से पहले इस लड़ाई का बोरिया विस्तर समेटने की पूरी तैयारी में जुटी है, भाजपा भी औऱ आरएसएस भी । इस बीच कोरोना है जो इसे तूल देने से रोक रहा है वरना समाचार औऱ टीवी चैनलों पर इस मुद्दे को लेकर अब तक जितना बवाल खड़ा हुआ है…उससे कई गुणा ज्यादा डिबेट होते । लेकिन शुक्र कहिए कि ये सब कंट्रोल करने में पूरी ताकत झोंक दी गई है ।

विपक्षियों के हाथ में है मौका, लाभ उठा सकें तो उठा लें …


विरोधियों के लिए भी यही मौका है अपनी ठोस रणनीति से भाजपा के इस उठापटक के बीच अपने को जनता के बीच खड़ा कर लें । बंगाल चुनाव में भाजपा औऱ ममता की लड़ाई में जिस तरह से भाजपा को मुक्की खानी पड़ी है, विपक्षी दलों को उस रणनीति के साथ भाजपा को दबोचने का वक्त आ गया है …अगर कुछ कर सकते हैं तो कर लें वरना भाजपा संभली तो 2022 में भी सब हाथ मलते रह जाएंगे ।

मुख्य खबरों पर गौर करें तो….।


उत्तरप्रदेश में BJP के भविष्य की राजनीति का खाका दिल्ली में करीब-करीब तय कर लिया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दिल्ली की बैठक में साल 2022 में UP विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लड़ने का फैसला लिया गया है । इससे भी महत्वपूर्ण निर्णय यह माना जा सकता है कि UP और दूसरे पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चेहरा नहीं होंगे


संघ का मानना है कि क्षेत्रीय नेताओं के मुकाबले प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे को सामने रखने से उनकी छवि को नुकसान हुआ है। विरोधी बेवजह उन्हें निशाना बनाते हैं। संघ किसी भी नेता को अलग करने या नाराजगी के साथ छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। अब इस पर योगी को खरा उतरना है। महाराष्ट्र में शरद पवार परिवार को साथ लाने पर भी विचार हो रहा है।


बंगाल में ममता बनाम मोदी से नुकसान हुआ

RSS की दिल्ली में हुई बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की मौजूदगी में ये निर्णय लिए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में पश्चिम बंगाल के चुनावों को लेकर गंभीर चिंतन और समीक्षा की गई। संघ नेताओं का मानना है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में ममता बनाम मोदी की रणनीति से नुकसान हुआ।


इसमें चुनाव हारने से ज्यादा अहम यह है कि राजनीतिक विरोधियों को प्रधानमंत्री मोदी पर बार-बार हमला करने का मौका मिला। इससे उनकी इमेज को नुकसान होता है। इससे पहले भी बिहार में 2015 के विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार के खिलाफ और फिर दिल्ली विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भी इस रणनीति से कोई फायदा नहीं हुआ।

नई दिल्ली से मौर्य न्यूज18 पॉलिटिक्स के लिए नयन की रिपोर्ट

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