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नीतीश के वफादार संजय सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बाकी को ठन-ठन गोपाल। Maurya News18

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मौर्य न्यूज18, पटना

अतुल कुमार

कहते हैं न कि किसी से वफादारी कीजिए तो जमकर, देर-सबेर उसका फल भी मिलता है। वर्तमान में सीएम नीतीश के करीबी लोगों की गिनती की जाए तो उसमें अनायास ही संजय कुमार सिंह का नाम जुड़ जाता है। ये वही संजय कुमार सिंह हैं जिन्हें राज्यपाल कोटे से विधान पार्षद यानी एमएलसी बनाया गया है।

संजय कुमार सिंह, जिन्हें लोग संजय गांधी भी कहते हैं, मूल रूप से पटना जिले के रहनेवाले हैं। राजधानी पटना में रहकर ही अपनी राजनीति को धार देते रहते हैं। लंबे समय से जदयू से जुड़े हुए हैं और इसके अलावे उनकी एक और पहचान है, CM नीतीश कुमार के खासमखास हैं। तीसरी बार जदयू कोटे से विधान परिषद के सदस्य बनाए गए हैं।

आरसीपी सिंह के बायें प्रसन्न मुद्रा में संजय कुमार सिंह उर्फ संजय गांधी

इससे पहले वे 2006 और 2014 में भी विधान पार्षद बने थे और अब तीसरी बार भी नीतीश कुमार ने उनपर भरोसा जताया और राज्यपाल कोटे से वे मनोनीत होकर विधान परिषद पहुंचे हैं। 2018 के बाद विधान परिषद में सत्ताधारी दल के वे राज्य नागरिक पर्षद के उपाध्यक्ष बनाए गए थे। साथ ही 2020 तक जदयू के मुख्य सचेतक भी रहे थे।

संजय कुमार सिंह को अब राज्य मंत्री की सारी सुविधाएं मिलेंगी। दरअसल, गुरुवार को उन्हें बिहार विधान परिषद् में सत्तारूढ़ दल का मुख्य सचेतक बनाया गया है। एक तरह से उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त हो गया है।

इनके अलावे विधान परिषद में एमएलसी नवल किशोर यादव और देवेश चंद्र ठाकुर को सत्तारूढ़ दल का उप नेता बनाया गया है। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इसकी घोषणा कर दी है। 

बिहार विधान परिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने परिषद में उप मुख्य सचेतक की भी घोषणा कर दी है। सभापति ने बताया कि डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल को सत्तारूढ़ दल का उप मुख्य सचेतक बनाया गया है। 

बुधवार को राज्यपाल कोटे से मनोनीत 12 एमएलसी के नामों की घोषणा की गई थी। उसी दिन शाम में ही नए एमएलसी का शपथ ग्रहण भी कराया गया था।

MLC की शपथ ग्रहण करते जदयू नेता संजय कुमार सिंह उर्फ संजय गांधी

शपथ ग्रहण के अगले ही दिन यानी गुरुवार को पार्टी की ओर से संजय कुमार सिंह को एक बड़ी जिम्मेदारी भी दे दी गई। इसी से आपको अंदाजा लग गया होगा कि ये सीएम के कितने खासमखास हैं। 

संजय कुमार सिंह के अलावे जदयू कोटे से एमएलसी बननेवालों में मंत्री अशोक चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, ललन कुमार सर्राफ, प्रो. डॉ. रामवचन राय और संजय सिंह शामिल हैं।

आखिर संजय कुमार सिंह पर क्यों मेहरबान हैं CM

किसी एक ही व्यक्ति को बार-बार एमएलसी बनाने से जदयू में नाराजगी देखी जा रही है। पार्टी के कई समर्पित कार्यकर्ता को नीतीश कुमार की ये शैली काफी चौंका रही है। हालांकि खुलकर अभी तक पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन ही सामने आए हैं लेकिन अंदर-ही-अंदर अन्य नेता व कार्यकर्ताओं में भी रोष देखा जा रहा है। दबी जुबान में पार्टी के ही लोग एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि आखिर संजय कुमार सिंह में ऐसी कौन-सी खूबी है कि बार-बार उन्हें ही परिषद में भेजा जा रहा है ?

जदयू नेता राजीव रंजन

नीतीश के फैसले से क्यों आहत हैं राजीव रंजन

जदयू नेता राजीव रंजन का साफ कहना है कि राजनीति में निष्ठा और योग्यता की कोई आवश्यकता नहीं है। ये सब बातें अब केवल डिक्शनरी में ही अच्छी लगती हैं। वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले से काफी आहत हैं। उन्होंने बुधवार को कहा था कि बिहार में कायस्थ समाज हाशिए पर जा चुका है। कायस्थ समाज के लिए यह अस्तित्व के संकट का दौर है।

MLC को लेकर HUM और VIP में भी नाराजगी

बता दें कि एमएलसी के मनोनयन को लेकर सिर्फ जदयू के लोग ही नहीं बल्कि एनडीए की सहयोगी पार्टी हम और वीआईपी में भी नाराजगी है। हम और वीआईपी के नेता अपने लिए एक-एक सीट की मांग कर रहे थे। हम के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की नाराजगी तो अब खुलकर सामने आ गई है। उन्होंने नीतीश कुमार के फैसले को गलत ठहरा दिया है।

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