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राज की बात भाग-1 : बिहार के भाजपा नेता और उनके विद्वान अद्भुत तांत्रिक गुरुजी…।

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एक थे गुरुजी ! …और रूक गया गृह प्रवेश…

भाग-1 : सच्ची घटना।

बिहार विधान परिषद सदस्य प्रो. नवल किशोर यादव के गुरुजी की सच्ची बात…जानेंगे तो दंग रह जाएंगे ।

अतुल कुमार, मौर्य न्यूज18, पटना ।

भाग-१सुनिए

प्रोफेसर नवल किशोर यादव (विधान पार्षद और बीजेपी के कद्दावर नेता) से उनके गुरुजी स्वर्गीय डॉ. बी. एन. पांडेय जी (बी. डी.इवनिंग कॉलेज, अब बी डी कॉलेज मीठापुर के संस्थापक)के अदभुत सच्चे किस्से…..

प्रोफेसर नवल किशोर यादव (विधान पार्षद और बीजेपी के कद्दावर नेता) से उनके गुरुजी स्वर्गीय डॉ. बी. एन. पांडेय जी (बी. डी.इवनिंग कॉलेज, अब बी डी कॉलेज मीठापुर के संस्थापक)के अदभुत सच्चे किस्से…..(खण्ड – एक)पटना के एडीएम के यहाँ डीएम, एसपी व मंत्री से लेकर सारे वीआईपी पहुँच चुके थे। कार्यक्रम शुरू था। एडीएम साहब खुद अपनी धर्मपत्नी के साथ पूजा पर बैठे थे। साहब के नये घर की पूजा थी तो तैयारी भी दमदार थी। पूजा के बाद भोज-भात का भी इंतजाम था। जूठन गिराकर घर को शुद्ध करने के लिए कई लोग समय से पहले ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवा देते हैं। एडीएम साहब ने गुरुजी को भी निमंत्रण दिया था। “चल-चल जल्दी चल नवल नहीं तो कांड हो जाएगा।” गुरुजी बोलते हैं। “क्या बोल रहे हैं गुरुजी मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है ?” “अरे, अभी समझने-समझाने का वक्त नहीं है नवल। जल्दी चलो नहीं तो दोनों भाई आपस में ही मारकाट मचा देंगे।” गुरुजी कहते हुए बाहर की ओर लपकते हैं।

आनन-फ़ानन में गुरु-चेला दोनों कार में बैठते हैं

और 10-15 मिनट में ही फुलवारीशरीफ मजार के पास स्थित एडीएम साहब के घर पहुँच जाते हैं।

मौके की नजाकत को भाँपते हुए नवल भी उनके पीछे-पीछे हो लेते है। आनन-फ़ानन में गुरु-चेला दोनों कार में बैठते हैं और 10-15 मिनट में ही फुलवारीशरीफ मजार के पास स्थित एडीएम साहब के घर पहुँच जाते हैं। “रोको-रोको, पूजा रोको” बोलते हुए गुरुजी एडीएम साहब के ड्राइंगरूम में प्रवेश करते हैं। किसी को कुछ समझ में नहीं आता है। सबलोग प्रश्न वाचक चिह्न लिए एक-दूसरे का मुँह देखने लगते हैं। एडीएम साहब का ड्राइंगरूम किसी मैरिज हॉल से कम नहीं था। हॉल की लंबाई, चौड़ाई व कीमती झालरों से सजी छत की दीवारें यह बताने के लिए काफी थीं कि कम समय में ही एडीएम साहब ने अच्छी कमाई की है। गुरुजी गृहप्रवेश का पूजा अचानक रुकवा देते हैं। सब हतप्रभ! “ये क्या कर रहे हैं गुरुजी!” एडीएम साहब बोलते हैं। “पूजा जारी रखा तो तुम दोनों भाई में अभी तुरंत लड़ाई शुरू हो जाएगी।” गुरुजी बोलते हैं। एडीएम साहब गुरुजी को एक कोने में ले जाते हैं और बोलते हैं, “गुरुजी सारे मेहमान आ चुके हैं। डीएम, मंत्री खुद पहुँचे हुए हैं। सारी तैयारी हो चुकी है। ऐसे में पूजा रुकवाना मुझे ठीक नहीं लगता।” “ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी।” इतना बोलकर गुरुजी एक मखमली सोफे पर जाकर बैठ जाते हैं।

एडीएम साहब नहीं मानते हैं और पूजा जारी रखते हैं।

सोफे को देखकर कोई भी कह सकता था कि इसे टटका ही शो-रूम से निकाला गया है। एडीएम साहब नहीं मानते हैं और पूजा जारी रखते हैं। मुश्किल से दस मिनट बीते होंगे कि एडीएम साहब का छोटा भाई किसी बात को लेकर हँगामा शुरू कर देता है। ‘अब ये नयी मुसीबत क्या आ गई? एडीएम साहब बुदबुदाते हैं। वे छोटे भाई को समझाने की कोशिश करते हैं लेकिन समझाते-समझाते खुद छोटे भाई से उलझ पड़ते हैं। देखते-देखते ही दोनों भाई झगड़ पड़ते हैं और तलवार-बंदूक निकाल लेते हैं। गुरुजी चुपचाप सब देख रहे थे। “ये क्या हो रहा है गुरुजी?” नवल यादव से रहा नहीं जाता है। वे गुरुजी से पूछ बैठते हैं। “बस देखते रहो नवल। कुछ देर में दोनों शांत हो जाएंगे।” गुरुजी ने कहा। …और ठीक हुआ भी वैसा ही। एडीएम साहब गुरुजी के पैर पर गिर पड़ते हैं और पूजा रुकवा देते हैं। अब सब कोई गुरुजी की ओर देख रहा होता है। आखिर पूजा रुकवाने के पीछे उनकी मंशा क्या हो सकती है? इसको लेकर वहाँ मौजूद लोग अपने-अपने तरीके से विश्लेषण कर रहे थे। डीएम साहब से नहीं रहा जाता है और वे फिर से पूजा शुरु करवाना चाहते हैं। इस पर गुरुजी थोड़े नाराज हो जाते हैं। वे कहते हैं, “डीएम साहब यह पढ़ाई आपकी वाली पढ़ाई से थोड़ी अलग है।” आपकी पढ़ाई भी मैंने पढ़ रखी है। आप थोड़ा धैर्य रखिए। यहाँ पर पूजा क्यों नहीं हो सकता? इसका पता जल्द ही चल जाएगा।” इसके बाद गुरुजी एडीएम साहब से पूजा वाले स्थल को खुदवाने के लिए बोलते हैं।

एडीएम साहब का दिमाग चकरा जाता है। वे सोचने लगते हैं, ‘अच्छा-खासा राजस्थान के मकराना से संगमरमर मँगवाया था। सब तोड़ना पड़ेगा।’ इधर, नवल यादव भाँप चुके थे कि दाल में कुछ ज्यादा ही काला है तभी गुरुजी गृहप्रवेश का पूजा रुकवा दिए हैं। वे गुरुजी के खासमखास और दुलरुवा शिष्य थे। पटना में जब भी गुरुजी को कहीं जाना होता, वे नवल की गाड़ी से ही जाते। गुरु-चेला की जोड़ी हिट थी। नवल यादव भी डंके की चोट पर कहते हैं, “मेरा इस धरती पर सिर्फ और सिर्फ एक ही गुरु हैं, थे और रहेंगे…उनका नाम बीएन पाण्डेय है।” गुरुजी भी नवल को बहुत मानते और उनके लिए जिलेबी बचाकर रखते। बहरहाल, एडीएम साहब पत्थर तुड़वाना नहीं चाह रहे थे। “क्या गुरुजी पत्थर तुड़वाए बिना कोई रास्ता नहीं है ?” “नहीं।” “जल्दी करो, आदमी बुलवाओ तुड़वाने के लिए नहीं तो मुसीबत और बढ़ती चली जाएगी।” गुरुजी जोर से बोलते हैं। गुरुजी के हाव-भाव को देखकर एडीएम साहब समझ जाते हैं कि अब देर करना मुनासिब नहीं होगा। क्रमशः …

(शेष कहानी अगली कड़ी में)-

अतुल की कलम से

फोटो १- (बाएं से दाएं) राजन पाठक, /प्रोफेसर नवल किशोर यादव, एम एल सी, / अतुल कश्यप, वरिष्ट पत्रकार/ नयन, मौर्य न्यूज 18 के संस्थापक

फोटो२- पुण्य आत्मा स्वर्गीय डा. बी. एन. पांडेय जी

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए अतुल कुमार की जीवंत रिपोर्ट ।

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