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जघन्नय हत्या करता रहा पिता और पुत्र, मुफसिल थाना पुलिस थामे रही चुप्पी, पुलिस अगर होती सजग तो बच सकते थे अशोक सहनी

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कोठिया निवासी सिकंदर सहनी एवं उसके पुत्र का है आपराधिक इतिहास, कई हत्याओं में आ चुका है नाम

खगड़िया संवाददाता

मतस्यजीवी सहयोग समिति के मंत्री अशोक सहनी उर्फ मुन्ना सहनी के अपहरण और बाद उनकी हत्या के मामले में मुफसिल थाना पुलिस पर कई सावल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि सिकंदर सहनी और उसके पुत्र बलबीर सहनी उर्फ करका पर कई हत्या वो अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं। बावजूद मुफसिल थाना पुलिस का उसपर मेहरबानी बना रहा। मसलन जिस अपराधी पर करीब आधे दर्जन से ज्यादा संगीन आपराधिक मामले दर्ज हों उसपर पुलिस की सख्ती के बजाय मेहरबानियां बरती गई। जानकार मानते हैं कि अगर समय रहते पुलिस कड़े एक्शन लेती तो इन दोनो पिता-पुत्र का मनोबल अपराध को लेकर नहीं बढ़ता। एक बार फिर इन पिता-पुत्रों ने हत्या की वारदात को अंजाम देकर पुलिस के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। मतलब पूर्व के वारदातों के बाद अगर पुलिस ने कड़ा एक्शन इन दोनो पर लिया होता तो कहा जा सकता है कि अशोक सहनी की जिंदगी बच सकती थी। उनकी हत्या का आरोप एक मामले में जेल में बंद सिकंदर सहनी एवं उसके पुत्र बलवीर सहनी उर्फ करिया सहित कई अन्य पर लगा है। बताया जा रहा है कि पुलिस सिकंदर सहनी के पुत्र करिया की तलाशी में खाक छान रही है।

सिकंदर सहनी का पुत्र बलवीर उर्फ करका

चुनाव में खौफ से नहीं भाग लेते हैं लोग

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बताया जाता है कि सिंकदर सहनी का खौफ इतना ज्यादा लोगों में है कि जिले में मतस्यजीवी सहयोग समिति के चुनाव में कोई उसके खिलाफ खड़ा होना नहीं चाहता। वर्ष 2019 के चुनाव में सिकंदर की पत्नी की हार के बाद से ही सिकंदर एवं उसके पुत्र की आंखो में मृतक अशोक सहनी उर्फ मुन्ना सहनी खटकने लगा था। बताया जा रहा है कि पूर्व में भी किसी बात को लेकर दोनो में विवाद हो चुका था। कहा जाता है कि अशोक सहनी उर्फ मुन्ना सहनी की हत्या चुनावी रंजिश में की गई। क्योंकि वर्ष 2019 में मृतक अशोक सहनी ने सिकंदर सहनी की पत्नी को मतस्यजीवी सहयोग समिति के चुनाव में परास्त किया था।

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पुलिस की बनी रही मेहरबानी

मुफसिल थानान्तर्गत रामटोल कोठिया निवासी सिकंदर सहनी एवं उनके पुत्र बलवीर सहनी उर्फ करका पर कई संगीन अपराध दर्ज हैं। जिसमें हत्या, मारपीट, धमकी आदी शामिल हैं। नाम नहीं देने की शर्त पर कई स्थानीय लोगों ने कहा कि पूर्व की हत्याओं में भी इन दोनो बाप बेटे पर पुलिस की कार्रवाई ढ़ीली रही है। पैसों और अपनी खौफ की बदौलत ये दोनो निर्भिक होकर अपराध को अंजाम देते रहे और पुलिस कड़ी कार्रवाई करने की बजाय सिर्फ थानेबाजी करती रही। लोग कहते हैं कि अगर इन दोनो पिता पुत्रों पर पुलिस कड़ी एक्शन लेती तो इनका मनोबल आज ऐसा नहीं होता। अब तो आलम ये हैं कि इनके खिलाफ कोई कोर्ट भी जाना नहीं चाहता है।

हत्या के कई मामलों में पिता पुत्र का नाम

सिंकदर सहनी वो उसके पुत्र बलवीर सहनी उर्फ करका का नाम कई हत्या के मामले में दर्ज है। अभी हाल ही में रामटोल में हुई हत्या में भी इन दोनो पिता पुत्र का नाम लोग दबे जुबान लेते थे। हालांकि इस हत्या में दोनो पिता-पुत्र का नाम प्राथमिकी में नहीं है। वर्ष 2018 में भी मुफसिल थाना क्षेत्र भदास निवासी कुंदन महतों का शव रेल थाना अंतर्गत रैक प्वाइंट मिला था जिसमें हत्या का आरोप सिकंदर सहनी के पुत्र बलवीर सहनी उर्फ करका पर लगा है। वहीं वर्ष 2016 में भी एक डबल मर्डर जिसमें आवास बोर्ड के अरुण यादव एवं कारेलाल यादव की हत्या हुई थी इसमें भी इन्ही दोनो बाप बेटे का नाम प्राथमिकी में दी गई है। वहीं वर्ष 2014 में पटना के रहने वाले सुमन कुमार की भी हत्या काफी सुर्खियों में उस समय रही। इनके भी हत्या का आरोप इन्ही दोनो बाप बेटे पर लगा।

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जेल से बेटे को संदेश देता है सिकंदर

सिंकदर सहनी एक मामले में खगड़िया मंडल कारा में बंद है। अपने अपराध जगत को वो वहीं से मॉनिटरिंग करता है। बताया जा रहा है कि सिकंदर जेल से ही अपने बेटे बलवीर सहनी उर्फ करिया को संदेश भेजता है। जिसके बाद उसका बेटा आपराधिक वारदात को अंजाम देता है। बताया जा रहा है कि मतस्यजीवी सहयोग सहयोग समिति के मंत्री अशोक सहनी उर्फ मुन्ना सहनी के मामले में भी सिकंदर ने ही अपने बेटे को हत्या का आदेश दिया था।

खौफ के साये के साथ रहते हैं पड़ोसी

बता दें कि सिकंदर सहनी की दहशत सिर्फ मतस्यजीवी सहयोग समिति के चुनाव में ही नहीं बल्कि उनके पंचायत में भी है। उसके गांव में लोग इन दोनो पिता-पुत्रों के नाम से कपकपाते हैं। लोगों का कहना है कि जो बात बात पर हत्या की घटना को अंजाम देता हो उससे दुश्मनी लेना किसी के बूते की बात नहीं है।

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