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खगड़िया में दलीय पर भारी निर्दलीय, कैसर और सहनी के बीच त्यागी उभरे

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चुनावी तपिश में झोपड़ी, नाव के बीच गैस सिलेंडर भी उफान पर, बदल रहा मतदाताओं का मूड

ग्राउंड रिपोर्ट खगड़िया से…..

पॉलिटिकल डेस्क, मौर्य न्यूज18।

पहले ये जान लें….

खगड़िया संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा सीटें हैं. इनके नाम हैं-सिमरी बख्तियारपुर, खगड़िया, हसनपुर, बेल्दउर, अलौली (एससी) और परबत्ता. इनमें अलौली विधानसभा सीट एससी के लिए आरक्षित हैं।

2011 की जनगणना के मुताबिक खगड़िया बिहार का सबसे कम आबादी वाला जिला है जहां 1,276,677 लोग रहते हैं.

2009 और 2014 के चुनाव का ब्योरा –

2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से एलजेपी उम्मीदवार चौधरी महबूब अली कैसर ने जीत दर्ज की. उन्होंने आरजेडी प्रत्याशी कृष्णा कुमारी यादव को हराया. कैसर को जहां 313806 वोट मिले तो यादव को 237803 वोट. वोट प्रतिशत देखें तो कैसर को जहां 35.01 प्रतिशत मत हासिल हुए तो कृष्णा यादव को 26.53 प्रतिशत वोट मिले. इस सीट पर तीसरे स्थान पर नोटा रहा जिसके तहत 23868 वोट दर्ज हुए. कुल वोटों का यह 2.66 प्रतिशत हिस्सा था ।

ताजा रिपोर्ट क्या कहती है ये भी जानें…

खगड़िया लोकसभा सीट काफी दिलचस्प मोड़ लेता जा रहा है। दो फेज के चुनाव के बाद यहां की स्थिति बदलती जा रही है। कुछ दिन पहले तक लग रहा था मुकाबला सीधा है। एनडीए और महागठबंधन में लेकिन जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आती जा रही है। रिपोर्ट बताता है कि निर्दलीय उम्मीदवार नागेन्द्र सिंह त्यागी एनडीए के महबुब अली कैसर औऱ महागठबंधन के मुकेश सहनी पर भारी पड़ते जा रहे हैं। दोनों गठबंधन के प्रत्याशी भी पशोपेस में हैं।

त्यागी काफी निर्धन प्रत्याशी और सबके चहेते हैं…

नागेन्द्र सिंह त्यागी, निर्दलीय उम्मीदवार, खगड़िया लोकसभा क्षेत्र, चुनाव चिन्ह- गैस सिलेंडर
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   दरअसल, निर्दलीय नागेन्द्र सिंह त्यागी कुशवाहा जाति से आते हैं और काफी सालों से इलाके में लोगों के बीच जाकर काम करते रहे हैं। बाढ के दिनों में भी निस्वार्थ सेवा करने के लिए पूरे इलाके में गरीब-गुरबा से लेकर हर कोई उनकी सराहना करता रहा है। ईमानदार औऱ अत्यंत गरीब नागेन्द्र सिह त्यागी के बारे में पूरी खग़ड़िया जानती है कि ये कितने कर्मठ हैं। इन्हें त्यागी यूं ही नहीं कहा जाता है। त्यागी ने हलफनामें में भी पचास हजार चंदे से वसूली गई नगद राशि दिखाई है। एक अपना पैतृक आवास दिखाया है जिसकी कीमत 15 लाख के करीब होगी, वो भी गांव वाले बताते हैं कि त्यागी ने अपने भाइयों के बीच बांट दिया है। कागजी सबूत ना होने के कारण घर दिखाना पड़ा। साइकिल तक नागेन्द्र सिंह त्यागी के पास नहीं है। और जनता के लिए इलाके में आंदोलन कर कई पुल-पुलिया और गांवों में सड़कों का निर्माण कराया हुआ है। इसलिए भी जनता के बीच बहुत ही चहेते हैं। ये कुशवाहा जाति से हैं जिनका प्रतिशत खगड़िया में लगभग 13 प्रतिशात है जो यादव मतदाताओं के बाद दूसरे स्थान पर मतदाता की संख्या के मामले में हैं। वैसे त्यागी की सभी जातियों के बीच अच्छी पकड़ है। इन्हें सभी जाति के लोग काफी चाहते भी हैं। मुस्लिम इलाकों में भी पुल-पुलिया के लिए आंदोलन कर चुके हैं। निर्माण कार्य भी कराया हुआ है।ऐसे में इनके साथ मुस्लिम कार्यकर्ता भी घूमघूम कर वोट मांग रहे हैं। ये सब त्यागी को मजबूत बना रहा है। यहां की जनता इन्हें दलीय प्रत्याशी के विकल्प के रूप में देख रही है।

एनडीए के कैसर को मोदी फैक्ट पर भरोसा

महबूब अली कैसर, लोजपा उम्मीदवार, खगड़िया लोकसभा क्षेत्र, चुनाव चिन्ह- झोपड़ी
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वहीं दूसरी ओर एनडीए के उम्मीदवार महबूब अली कैसर जो वर्तमान सांसद हैं। काफी दौलतमंद हैं और नबाव के रूप में जनता के बीच में इनकी पहचान है। इनको लेकर जनता के बीच ऐसी छवि है कि ये जीतने के बाद जनता के बीच कभी जाते ही नहीं। जनता इन्हें पहचानती भी नहीं है। रइस के रूप में जनता इन्हें पुकारती है। लेकिन एनडीए की उम्मीदवारी के कारण पिछली बार मोदी लहर में लोजपा की टिकट से सांसद चुन लिए गए। इनके विरूद्ध राजद उम्मीदवार कृष्णा यादव थी। उन्हें हराकर सांसद बने। इसबार तस्वीर कुछ अलग ही है। जनता मोदी के नाम पर महबूब अली को बर्दाश्त कर रही है। वैसे भी इनकी बिगड़ी हुई छवि के कारण ही लोजपा ने काफी देर से इनके नाम की घोषणा की थी। जनता इसे बखूबी समझती है। इन्हें भरोसा है भाजपा के कैडर वोट के साथ-साथ जदयू के लव-कुश वोटरों का जिसका प्रतिशत 13-16 प्रतिशत तक है। और फिर मुस्लिम वोटर जो लगभग 8 से 10 प्रतिशत के बीच है। अगर ये महागठबंधन की ओर नहीं गया तो महबूब अली को फायदा हो सकता है। ऐसी उम्मीद एनडीए के खेमे में भी है। लेकिन मोदी के नाम पर मुस्लिम मतदाता इसबार पिछलीबार की तरह गलती नहीं करने की ठानी हुई है। ऐसा वहां मुस्लिम मतदाताओं से बातचीत के आधार पर दिखता भी है।

महागबंधन के सहनी बाहरी होने की झेल रहे परेशानी

मुकेश सहनी, वीआईपी, उम्मीदवार, खगड़िया लोकसभा क्षेत्र, चुनाव चिन्ह – नाव
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   वहीं महागठबंधन से इसबार प्रत्याशी भी नये है और पार्टी भी अनजान है। मुकेश सहनी जिनकी खुद की पार्टी है वीआईपी। इनकी इलाके में कोई पक़ड़ नहीं है। पब्लिक जानती तक नहीं है। ऐसे में महागठबंधन के खेमे में काफी निराशा देखी जा रही है। और उम्मीदवार को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुकेश सहनी फिल्मी दुनिया की दौलत से कमाये दौलत को यहां लुटा कर प्रचार प्रसार के जरिए मतदाताओ को अपने पक्ष में करने मे लगे हैं.। महागठबंधन की परंपरागत सीट छीन जाने से राजद के यादव मतदाता काफी निराश हैं। जिनका प्रतिशत 16 से अधिक है। और ये इलाका यादव बहुल्य है। वहीं कृष्णा कुमारी यादव को टिकट नहीं दिए जाने से ये खेमा भी नाराज है। और यादव वोट में साफ बिखराव दिख रहा है। वैसे मुकेश साहनी ने नामांकन से पहले ही पिछली बार राजद की उम्मीदवार रही कृष्णा यादव से मिलकर दीदी कहकर आशीर्वाद लिया था लेकिन वो चुपी साधी बैठी हैं।

ऐसे में सहनी मतदाता जो मात्र 4 प्रतिशत हैं। अगर महागठबंधन के यादव और मुस्लिम वोटर का बंटना लगभग तय है। औऱ मुकेश सहनी को बाहरी उम्मीदवार होने का कलंक भी झेलना पड़ रहा है।

पड़ सकता है भारी

ऐसी स्थिति में दोनों गठबंधन एनडीए से लोजपा महबूब अली कैसर की झोपड़ी औऱ महागबंधन से वीआईपी मुकेश सहनी की नाव को डूबोने के लिए निर्दलीय उम्मीदवार नागेन्द्र सिंह त्यागी सिलेंडर लिए जनता के बीच घूम रहे हैं।

मतदान की तारीख 23 अप्रैल 2019 है। ये तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है। उम्मीद है कि एनडीए औऱ महागठबंधन से नाराज पब्लिक निर्दलीय त्यागी की ओर तेजी से आगे बढ़ सकते है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए यहां का परिणाम काफी चौकाने वाला हो सकता है। वैसे एनडीए और महागठबंधन के उम्मीदवार भी इसे गंभीरता से ले रहे हैं।

पिछलीबार का 23हजारी नोटा, अबकी जा सकता निर्दल में

आपको बता दें कि पिछली बार 2014 में एनडीए के महबूब अली कैसर और महागठबंधन से कृष्णा कुमारी यादव को नकारते हुए.. नाराज वोटरों ने 23 हजार नोटा में मतदान किया था। जो इस बार निर्दलीय त्यागी को आसानी से हांसिल हो सकता है। ।

मौर्य न्यूज18 की खास पॉलिटिकल रिपोर्ट

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