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जनता बोली : नीतीश को टक्कर देंगे तेजस्वी, मोकामा को अनंत से परहेज नहीं ! Maurya News18

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मुझे जो पसंद है वही बात करेंगे….

जनता की बात – मौर्य न्यूज18 के साथ

पद्मा नारायण, पटना/मोकामा, मौर्य न्यूज18

किसकी होगी सरकार, कौन बनेगा मुख्यमंत्री, जनता को क्या पसंद है, क्यों पसंद है, मुद्दा क्या होगा, इलाकाबाइज समस्याएं क्या है, उम्मीदवार कैसा हो, कैसी रहेगी कसम-कस, कहां जाउं, क्या करूं …जैसे कई सवाल… जिसका जवाब हम सीधे बिहार की जनता से जानने की कोशिश में लगे हैं। मौर्य न्यूज18 इस मुहिम को जनता के बीच लेकर जा रही है। ऐसे सवालों का जवाब क्या है आप भी जानिए, रूबरू होइए…मौर्य न्यूज18 पटना की संवददाता पद्मा नारायण फिल्ड में जाकर जनता से जो जवाब लाई हैं वो आपके सामने पेश है।

 

पटना के मोकाम और उसके आसपास के क्षेत्रों में, बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए यहां लोकल जनता से बात की , जनता कहती है… नीतीश कुमार भले ही फिर से सत्ता पा लें, 15 साल विकास के नाम पर जनता के बीच जा रहे लेकिन उनकी छवि दलबदलू की हो गई है । इससे भी इनकार नहीं करती है जनता । रिपोर्ट बताती है कि इस छवि को जनता जान गई है। चुनाव में राजद से सीधा मुकाबला होना है। सामने तेजस्वी जैसे युवा नेता हैं। वो, रोजगार देने की बात कर रहें है। सो, टक्कर जबर्दस्त होने वाली है। सत्ताधारी विकास के नाम पर वोट मांगेंगे और विपक्ष सत्ताधारी की विफलता का हवाला देकर। लेकिन, कटू सच ये भी है कि जातिवाद हावी रहेगी ही रहेगी। मुद्दा कोरोना काल में मजदूरों और गरीब-गुरबों की बदहाल स्थिति को ठीक करना, कमाई, पढ़ाई सब रहेगा । पब्लिक ये भी कहती है कि अभी लग रहा है नीतीश कुमार का विकल्प नहीं है लेकिन हो सकता है चौकाने वाले परिणाम ना आ जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा। पढिए पूरी रिपोर्ट ।

सुमित कुमार _सालिमपुर, बिहार 

सुमित का मानना यह है कि बिहार चुनाव में इस बार घमासान रहेगा क्योंकि इस बार चुनाव आरजेडी और जेडीयू के बीच में होगा । कहते हैं, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं , हो सकता है आगे भी बने रहें लेकिन उनकी छवि दलबदलू वाली बन गई है। वो स्वार्थ की खातिर आगे भी भाजपा को छोड़ नई पार्टी से मिलकर सरकार बना सकते हैं। इसलिए राजद के तेजस्वी यादव कड़ी टक्कर देंगे। चौकाने वाला परिणाम होगा।

मरांची के सुमित कहते हैं मुझे तो बतौर जनप्रतिनिधि अनंत ही पसंद

सुमित कहते हैं कि मोकामा की जनता फिर से अनंत सिंह को ही विधायक चुनेगी , कारण साफ है कि अनंत सिंह की छवि चाहे जैसी भी हो। जनता की समस्याओं का निदान करते हैं। विकास भी किया है। सो, उन्हें फिर से चुना जा सकता है।

मुद्दा क्या होगा – ही बात चुनावी मुद्दे की तो असल मुद्दा ये है कि , कोरोना काल में जो मजदूर वापस लौटे हैं उनको रोजगार देना , गरीबों को रोजी-रोटी देना। पीड़ित जनता सबक सीखा सकती है।

कौन नेता पसंद हैं….

कहते हैं … राजद नेता तेजेस्वी यादव युवा हैं । वो रोजगार देने की बात कर रहे हैं। लाखों युवकों को नौकरी देने की बात भी कही है । बिहार में बेहतर विकास का कार्य करने की क्षमता है। राज्य के युवाओं के बारे में बेहतर से बेहतर सोंच सकते हैं। राजनीति  में मजे हुए नेता लालू यादव के पुत्र हैं। बचपन से पिता को राजनीति करते देखा है, राजनेताओं के बीच पले-बढ़े हैं अब नये युग में नई सोंच के साथ आगे बढ़ने का अनुभव उनके पास दिखता है। जबकि लोजपा नेता चिराग पासवान जो सांसद भी हैं, युवाओं का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। लेकिन उनकी अपनी ही पार्टी पर पकड़ नहीं है । वहीं वो अपने ही गठबंधन में दवाब की राजनीति कर रहे हैं। नीतीश कुमार पर दबाव की राजनीति कर बहुत आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

जातिवाद पर क्या कहना है …

जातिवाद के सवाल पर कहने लगे अपने बिहार में जाति की ही राजनीति हावी है। सब कहते है कि नीतीश ने लालू यादव से भी ज्यादा जातिवाद को बढ़ावा दिया है , ये भी बात है जातिवाद लालू प्रसाद के रीजन में पला-बढ़ा और श्याना हो गया। जो अब जाने का नाम नहीं ले रहा। अब तो सवर्ण को भी बढ़ावा देने के पीछे सारी पार्टियों में होड़ मची है। इस तरह कभी अग़ड़ी तो कभी पिछड़ी तो कभी दलित तो कभी मुस्लिम इस तरह से जाति-धर्म के नाम पर राजनीति आगे बढ़ चली है। जिसका असर चुनाव पर साफ दिखता है। 

नोटा पर वोट

नोटा पर वोट डालने से हमें यह पता चलता है कि कितने प्रतिशत लोग हैं, जो किसी भी नेता को नहीं पसंद करते हैं, यदि आधे से ज्यादा लोग नोटा पे वोट डाले तो चुनाव फिर से होगा और फिर शायद कोई  उम्मीवार खड़ा हो जो लगे हमारे हित में हो।

2. उपेन्द्र नारायण_मरांची पटना

मारांची, पटना से उपेन्द्र नारायण कहते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री तो नीतीश कुमार ही होंगे क्योंकि यहां मुख्मंत्री पद के लिए कोई दूसरा चेहरा है ही नहीं। और मोकामा के विधायक भी अनंत सिंह ही होंगे , या उनके परिवार से उनकी पत्नी हो सकती हैं। क्योंकि यहां की जनता अनंत सिंह को ही अपने  नेता के रूप में देखती है।

मुद्दा क्या ः चुनाव का असली मुद्दा अभी तो यह होना चाहिएं कि कोरोनावायरस से जो नुकसान हुए हैं या हो रहे हैं, उसकी भरपाई कैसे हो और विकास, सुशासन और अपराध की स्थिति भी मुद्दा है।

नेता के बारे में क्या कहना है …

कहते हैं… राजद के युवराज तेजेस्वी यादव को उभरने के लिए अभी वक्त लगेगा । उन्हें अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है । तेजस्वी के पास अनुभव की काफी कमी है, पार्टी के अंदर सिनियर लीडर की कद्र नहीं है। ऐसे में सिर्फ विरासत के नाम पर लीडर चुन लेना या खुद को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश करना काफी जल्दवाजी ही कही जाएगी।

बेटे को माहिर बनाया आपने …।

हां, ये बात भी सही है कि राजद गंठबंधन लालू प्रसाद की राजनीति का फायदा उठाकर, तेजस्वी यादव को आगे बढ़ाकर नीतीश कुमार को टक्कर देगी। जातिवाद इसका सबसे बड़ा कारण दिखता है। ना की लीडर और लीडरशिप की ताकत। जातिवाद पहले भी हावी था, अब भी हावी है। और ये रहेगा। क्योंकि हम जनता सजग नहीं हुए हैं और नेता जातिवाद को छोड़कर दूसरा कोई रिश्क लेने की स्थिति में नहीं है। राजद का सवर्ण कार्ड भी चुनावी समीकरण में चौकाने वाले परिणाम दे सकता है।

नोटा पर बोलिए …

उपेन्द्र को लगता है कि नोटा पे वोट डालना बिल्कुल सही होता है, क्योंकि अगर हमें कोई भी नेता नहीं पसंद है तो हम किसी का  साथ क्यों दें । लेकिन बिहार की राजनीति में नोटा पे वोट डालने का कोई महत्त्व नहीं है।

3. रागिनी देवी _ मारांची पटना 

मरांची की रागिनी देवी भी मानती है कि अबकी बार फिर से नीतीशे कुमार होंगे। इन्हें भरोसा है कि मोकामा के वर्तमान विधायक अनंत सिंह खुद की जगह पत्नी को मैदान में उतारेंगे, अगर वो ऐसा करते हैं तो महिलाऐं अपना मत उनकी ओर दे सकती है चाहे वो किसी दल में हों या ना हों। ऐसा करने में विधायक अनंत सिंह फिर से कामयाब हो सकते हैं।

इनका मानना यह है कि चुनाव का असली मुद्दा बेरो़गारी ही है। गांव की सड़क अब भी जर्जर हैं। कुछ इलाकों में सड़कें बनी भी हैं लेकिन गांव के लोगों को अभी भी दिक्कतों का समाना करना पड़ रहा है।

नेता कौन – रही बात राजद युवराज तेजस्वी की तो पार्टी और संगठन चलाना पहले सीखें। उसकी काफी उम्र धरी-परी है राजनीति करने के लिए। जनता इसे बखूबी समझती है। इसलिए नीतीश कुमार की एनडीए फिर से एकबार सत्ता पर काबिज हो सकती है। मुकाबला कड़ा होना तय है। लेकिन नीतीशु कुमार को ट्क्कर देना इतना भी आसान नहीं होगा। जितनी सोंची जा रही है।  वहीं, बिहार की राजनीति  पूरी जातिवाद पर ही आधारित है, सो, जातिवाद तो हावी होगा ही। स्वर्ण वोटर 50_50हो सकते है ।

4.  आशुतोष कुमार _ बेगूसराय 

बेगूसराय के युवा आशुतोष कुमार चाहते हैं कि फिर से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनें। क्योंकि  वो  राजद नेता तेजस्वी यादव के पास अभी लम्बा वक्त है। नीतीश कुमार ने महिलाओं को अपने पक्ष में पक्का करने के लिए शराब बंद करवा  दी जिसका असर भी चुनाव पर दिखेगा। महिवा वोट का रूख हमेशा से नीतीश कुमार के प्रति ही रहना है।

आशुतोष कहते हैं कि इस बार बिहार में चुनावी मुद्दा… गरीबी हटाओ , किसानों के नुकसान की भरपाई हो , बाढ़ से संबंधित समस्याओं के निदान ही होने वाला है ।

इनका कहना ये है कि तेजेसवी यादव को अभी मुख्यमंत्री बनने की होड़ में ना रहकर, सरकार बनाने के लिए सिनियर लीडर को आगे करना चाहिए। जो नहीं कर सकते। ऐसे में तेजस्वी यादव को अभी राजनीति में अनुभवी होने की दिशा में काम करना चाहिए।

कहते हैं मोकामा विधानसभा क्षेत्र से इसबार भी अनंत सिंह ही बाजी मारेंगे। जनता उनको चाहती है फिर से विधायक बनें।

नोटा पर वोट डालना सही तो होता है पर बिहार के चुनाव में इसका कोई असर नहीं होगा , क्योंकि आधे से ज्यादा लोग तो समझ ही नहीं पाते हैं कि नोटा है क्या।

5. तनुजा सिंह _मारंची (पटना) 

तनुजा का मानना यह है कि बिहार के मुख्यमंत्री भले ही नीतीश कुमार हो जाएं लेकिन जनता उनसे खुश नहीं है। कहते हैं हम मतदाताओं के पास कोई विकल्प नहीं है । कहती हैं…बिहार की राजनीति जातिवाद पर आधारित है इसलिए विकास के नाम पर वोट मांगना, ये सब आंख में धूल झोंकने के बराबर है।

तनुजा का मानना यह है कि सब सिर्फ अपनी जाति को ही बढ़ावा देंगे तो राज्य कैसे आगे बढ़ेगा , सिर्फ शराब बंदी कर देने से क्या शराब मिलना बंद हो गया है, लड़कियों को स्कूल के कपड़े देने से क्या पढ़नाई ठीक हो गई है ।

अपराध क्या कम हो गए हैं, क्या लॉकडाउन में जनता की समस्या अब खत्म हो गई है, क्या अस्पतालों में सुविधा मिल रही है। राजनीति में बदलाव की जरूरी है। इसके लिए एजुकेशन बेहतर करना होगा। रोजगार का साधन मुहैया कराना होगा, बिजनेस को प्रमोट करना होगा, निवेशकों को लाना होगा, इंडस्ट्री पर काम करना होगा, जो पार्टी इस सोंच के साथ एक्ट करेगी वोट उसी को देंगे। सरकार चुनने में हम जनता को शतर्क औऱ सजग रहने की जरूरत है। वो पल आ गए हैं।

6. उर्मिला सिंह _ मरांचि (पटना) 

कहती हैं- 15 साल नीतीश कुमार की सरकार रही है। आगे भी रहेगी। इस अवधि में काम हुए हैं इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। लेकिन राजद नेता तेजस्वी कड़े मुकाबले देकर सबको चौका सकते हैं। लेकिन जो स्थिति दिख रही है महागबंधन की उससे लगता है कि टक्कर देनों दिन मुश्किल होता जा रहा है। जातिवाद, सवर्ण, पिछड़ा, दलित ये सब चलता रहेगा। नोटा के आने से विकल्प तैयार है लेकिन इसका कुछ फायदा होना नहीं है। वोट की बर्वादी ही है।

चलते-चलते

बिहार में विधानसभा चुनाव है । तारीखों की घोषणा हो चुकी है। आप घर हैं, काम पर है, पढ़ाई कर रहे हैं, महिला हैं घर के कामों में लगी हैं। कोई बात नहीं। सरकार बनाने के लिए कुछ सोंच तो होगी। वोट देंना, मतदान करना हर नागरिक का बहुत बड़ा अधिकार है। इसे ताकत समझें, कमजोरी नहीं। सोंचिए…कुछ कहिए…मौर्य न्यूज18 आपकी बातों को रखेगा, सुनेगा। आप अपनी बात हमारे रिपोर्ट के जरिए भी रख सकते हैं। या फिर मेल कर सकते हैं… [email protected]

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए पद्मा नारायण की रिपोर्ट

mauryanews18
MAURYA NEWS18 DESK

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