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बच्चों में ऑटिज्म : इस बीमारी से जागरूक करने को डॉक्टर निकले सड़क पर। Maurya News18

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क्या है ऑटिज्म और कैसे इससे बचें, जानिए।

Maurya News18, Patna

Health Desk

ऑटिज्म एक बीमारी है। बच्चों के लिए ये कहर बनकर आता है । कहीं किसी बच्चे को है तो तुरंत बताएं। किसी बच्चे को इस बीमारी का शिकार ना होने दें। लेकिन ऐसा होगा कैसे । पटना की सड़क पर इसी चिंता को लेकर यहां के डॉक्टर औऱ कुछ प्रबुद्दजन सड़क पर उतरे। लोगों को जागरूकर करने के मकदस से सड़क पर उतर आए। नीले रंग में रंगी रैली पटना की सड़कों पर ऑटिज्म जैसी बीमारी से बचाव और जानकारी देने के लिए निकली। 02 अपैल 2021 का दिन इसलिए चुना गया क्यों कि मौका था विश्व ऑटिज्म दिवस का । और फिर जो हुआ उसकी पूरी रिपोर्ट तस्वीर के साथ आपके सामने है ।

विश्व ऑटिज्म दिवस के अवसर पर राजधानी पटना में डॉक्टरों के नेतृत्व में जागरूकता मार्च का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. उमा शंकर सिन्हा ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। साथ ही सचिव, एस.एन.ए.सी बिहार, राष्ट्रीय न्यास, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार की भी सहभागिता रही।

कार्यक्रम में शरीक लोगों को ऑटिज्म के बारे में जागरूक किया गया क्योंकि ऑटिज्म में नीला रंग को प्रतीक माना गया है इसीलिए सारे लोग नीले रंग के कपड़े पहन कर लोगों को जागरूक कर रहे थे।

समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी ने दिव्यांगों के प्रति संवेदनशील होने की बात कही और राज्य में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। डॉ. उमाशंकर सिन्हा ने बताया कि ऑटिज्म एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी के शिकार बच्चों में मानसिक विकास धीमा हो जाता है लेकिन वे महान कलाकार हो सकते हैं। उनमें गणित के सवालों को बनाने की अदभुत क्षमता होती है, ऐसे बच्चों के लिए राष्ट्रीय न्यास निरामया इंश्यूरेंस के माध्यम से प्रतिवर्ष ₹100000 चिकित्सा कराने के लिए देती है।

इस मौके पर राज आयुक्त निशक्तता डॉ. शिवाजी कुमार ने कहा कि अभी तक शोध में इस बात का पता नहीं चल पाया है कि ऑटिज्म होने का मुख्य कारण क्या है। यह कई कारणों से हो सकता है। जन्म‍ संबंधी दोष होना। बच्चे के जन्म से पहले और बाद में जरूरी टीके ना लगवाना। गर्भवती का खान-पान सही ना होना। गर्भावस्था के दौरान मां को कोई गंभीर बीमारी होना। दिमाग की गतिविधियों में असामान्यता होना।

दिमाग के रसायनों में असामान्यता होना। बच्चे का समय से पहले जन्म या बच्चे का गर्भ में ठीक से विकास ना होना विशेष सचिव समाज कल्याण विभाग दया निधान पांडे, निदेशक समाज कल्याण बिहार सरकार राजकुमार ने भी लोगों को मदद करने की अपील की ।

आस्था चैरिटेबल पटना की डॉ. शालिनी सिन्हा ने बताया कि अधिकतर आटिस्टिक बच्चे बोलने में अक्षम होते है। आटिस्टिक बच्चों में जितनी जल्दी हो सके स्पीच थेरेपी शुरू कर देनी चाहिए ।

शोध से ऐसा पता चला है कि वे आटिस्टिक लोग जिनमें की सुधार पाया गया है वे अधिक समय से स्पीच थेरेपी ले रहे होते हैं। प्रोत्साहन के लिए रंग-बिरंगी, चमकीली तथा ध्यान खींचने वाली चीजों का इस्तेमाल करें। बच्चों को अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए उसे शारीरिक खेल के लिए प्रोत्साहित करें।

अगर परेशानी ज्यादा हो तो मनोचिकित्सक द्वारा दी गई दवाओं का प्रयोग करें। ऑटिज्म के इलाज का मुख्य उद्देश्य है कि रोगी में ऑटिज्म के लक्षणों को कम करके उनमें सीखने की क्षमता का विकास किया जाए।

चलते-चलते और भी जानकारी ले लीजिए ।

ऑटिज्म के बारे में

ऑटिज़्म एक मानसिक बीमारी है जो खासतौर पर बच्चों में पाये जाते हैं। ऑटिज़्म में बच्चे बहुत अलग तरह का व्यवहार करते है जैसे की एक बात को बार-बार दोहराते रहते है।ये बीमारी मुख्य रूप से एक से पांच वर्ष तक के बच्चों में दिखाई देते हैं। ऑटिज़्म रोग से ग्रस्त बच्चे अन्य बच्चों से अलग होते है। सयुंक्त राष्ट्र महासभा   ने २००७ में २ अप्रैल के दिन शुरुवात की थी। तब से विश्व में २अप्रैल को ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। नीले रंग को ऑटिज़्म का चिन्ह माना जाता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिकता मंत्रालय के अनुसार भारत में ११० में से एक बच्चे ऑटिज़्म के शिकार होते है और ८० बच्चों में से एक बीमारी से पीड़ित होता है। यह बीमारी लड़कियों की अपेक्षा लड़को को अधिक होने की संभावना होती है। आइये ऑटिज़्म के बारे में और जानकारी प्राप्त करेंगे।


डॉ. सोनाली कुमारी, सुष्मिता, श्रेया गुप्ता और अविनाश सिंह सहित अन्य लोगों ने अवेयरनेस वॉक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।

पटना से मौर्य न्यूज18 के लिए हेल्थ डेस्क की रिपोर्ट ।

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