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भाजपा खेमे से बड़ी खबर : एनडीए सत्ता में आई तो केन्द्रीयमंत्री गिरिराज सिंह को मिल सकता है बड़ा दायित्व ! Maurya News18

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!!!! नयन की नज़र से पॉलिटिक्स !!!

भाजपा को अधिक सीट मिली तो दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, चल रही अंदरूनी तैयारी !

वैश्य समाज से भाजपा नेता सुशील मोदी के साथ-साथ, सवर्ण चेहरा… फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह भी बन सकते उपमुख्यमंत्री !

नयन, नई दिल्ली, मौर्य न्यूज18 ।

बिहार में विधानसभा का चुनाव चरम पर है। प्रथम चरण में मतदान के बाद भाजपा अब नई तैयारी में जुट गई है। जनता का मूड भांपते हुए कुछ बड़ा प्लान करने में जुटी है। भाजपा के बारे में सर्वे में भी साफ स्पष्ट हो रहा है कि एनडीए खेमे में सबसे ज्यादा सीट लाने वाली पार्टी बनेगी। कहा ये भी जा रहा है कि बिहार विधानसभा में सबसे बड़े दल के रूप में भाजपा ही आएगी। फिर राजद का नम्बर आ सकता है। लेकिन ये सब अभी पूर्वानुमान है…और ये सारी बातें सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर कही जा रही है। वास्तविक परिणाम तो 10 नम्बर को ही सामने आना है। लेकिन सर्वे को ध्यान में रखते हुए भाजपा के अंदर कुछ विशेष करने की तैयारी चल रही है।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार भाजपा अधिक सीट पाने में सफल होती है तो….कुछ बड़ा क्या हो सकता है इसपर प्लान चल रहा है। इसमें आरएसएस का भी सपोर्ट है।

जैसा कि बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा भी देख रही है कि जनता की नाराजगी कहीं ना कही जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार को लेकर है, अगर सच में गुस्सा वोट या सीट में उतार-चढ़ाव ला देती है तो फिर क्या होगा।

बिहार के चुनाव को देखते हुए । भाजपा के शीर्ष नेताओं से कई बार ये भी पूछा गया है कि यदि भाजपा अधिक सीट लाती है तो फिर क्या होगा…क्या मुख्ममंत्री नीतीश कुमार ही होंगे। इस मामले में तो भाजपा ने साफ कर दिया है कि चाहे जदयू की जितनी भी सीट आए…एनडीए को बहुमत मिलने पर हर हाल में नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन जनता के बीच अब भी सवाल उठ ही रहें हैं कि भाजपा ऐसा क्यों कह रही है। ऐसे में भाजपा ने दूसरे प्लान पर भी काम करना शुरू कर दिया है।

बिहार के भाजपा नेता – केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ।
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भाजपा को पता है कि जनता की नाराजगी को यूं ही नहीं दरकिनार किया जा सकता। ऐसे में यदि सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भाजपा अधिक सीट गेन करती है तो दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

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अब सवाल ये उठता है कि ऐसा प्लान आखिर क्यों किया जा रहा है…एक उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी तो दिखते हैं तो फिर दूसरा कौन और क्यों।

सूत्र बताते हैं कि ऐसा इसलिए प्लान हो रहा है कि सर्वे रिपोर्ट के अनुसार यदि भाजपा बिहार में सबसे बड़े दल के रूप में उभरती है तो ऐसा पहली बार होगा। जब पहलीबार ऐसा होगा तो कहीं ना कहीं इसमें बड़ा दायित्व भी बढ़ाया जाएगा।

तो आखिर बड़ा दायित्व किस तरह का तो ऑप्सन ये है कि दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाएं। दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमति बनाने की तैयारी भी चल रही है। कहा ये जा रहा है कि सुशील कुमार मोदी जो वैश्य समाज से आते हैं….भाजपा का सबसे बड़ा वोट बैंक भी है वैश्य समाज…दूसरा वोट बैंक जो भाजपा का रहा है वो सवर्ण। और जैसा कि राजनीति गलियारे में चर्चा भी होती रहती है…कि इसबार सवर्ण को साधने में राजद महागठबंधन ने ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है…ऐसे में भाजपा के पाले में भी सवर्णों को बड़ा दायित्व देने का दवाब है।

वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी के बह्मा, विष्णु, महेश । फाइल फोटो।
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सो, सिर्फ मंत्री पद देने से काम नहीं चलने वाला है। कुछ बड़ा करना होगा। और इसी सब को देखते हुए…भाजपा के सवर्ण चेहरे की तलाश की जा रही है कि आखिर किसे बड़ा दायित्व दिया जा सकता है। ऐसे में बिहार से एक ही बड़ा चेहरा सामने आ रहा है वो है…भाजपा के फायर ब्रांड नेता और पीएम मोदी व अमित शाह खेमे के सबसे चहेते, विश्वसनीय लीडर केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह । गिरिराज सिंह पहले भी बिहार की एनडीए सरकार में मंत्री रह चुके हैं, और नीतीश कुमार मंत्रीमंडल में बिकट से बिकट परिस्थिति में काम कर चुके हैं।

कहा ये भी जा रहा है कि गिरिराज सिंह का चुनाव इसलिए भी किया जा रहा है ताकि सवर्ण जातियों में भी अच्छा मैसेज तो जाए और नीतीश कुमार की सरकार में भाजपा के ऐसे लीडर भी डाल दिए जाएं ताकि फायर ब्रांड नेता का दवाब सब पर बना रहा।

भाजपा नेताओं या कार्यकर्ताओं को पता है कि गिरिराज सिंह ही ऐसे लीडर हैं जो सिर्फ और सिर्फ पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से नीचे किसी की नहीं सुनते हैं। ऐसे में जदयू सुप्रीमो का इसबार जब पीएम मोदी से प्यार बढ़ा है तो स्वभाविक है कि पीएम मोदी अपने ही विश्वसनीय साथी को आगे करेंगे और नीतीश कुमार पर भी हमेशा दवाब बनाए रखेंगे।

एक पॉलिटिक्स ये भी : बाहरी दुनिया में हमेशा खबर तैरती है की जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार और भाजपा नेता गिरिराज सिंह में पटती नहीं लेकिन मिलन के मौके को भी दोनों नेता चूकते नहीं। ये तस्वीर बहुत पहले की है। फाइल फोटो।
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इससे दो बातें होंगी…एक तो सवर्ण को भी सुकुन मिलेगा…उनकी नाराजगी खुशी में बदलेगी और दूसरी ओर मंत्रीमंडल में भी बैंलेंस बना रहेगा। भाजपा की जो शीर्ष पॉलिटिक्स रही है उसके बारे में दुनिया जानती है कि पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जब भी कहीं मजबूती से उभरते हैं तो कमान कहीं ना कहीं अपने सबसे भरोसेमंद लोगों के हाथों में ही सौंपते हैं।

पीएम मोदी और अमित शाह के खास को ऐसे मिलती है जगह…कई राज्य इसके उदाहरण

चाहे वो हरियाणा के मुख्यमंत्री बनाये जाने की बात हो तो खट्टर जैसे सबसे निकट व्यक्ति को लाने से नहीं हिचकते…महाराष्ट्र की कमान हो यो फर्डणवीस जैसे युवा नेता को कमान सौंपने से नहीं चुकते…समीकरण झारखंड का भी सामने है आदिवासी लीडर की जगह रघुवर दास को आगे बढ़ाया गया…ऐसे कई उदाहरण देखे जा सकते हैं। ऐसे में बिहार में इस वक्त पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के चहेते और नीतीश कुमार को हमेशा दवाब में बनाये रखने वाले कोई साहसी लीडर है… तो वो हैं सिर्फ और सिर्फ गिरिराज सिंह। ऐसे में इन्हें प्रोजेक्ट करने की तैयारी की स्क्रीप्ट लगभग तैयार है। सिर्फ रिजल्ट के आधार पर ये सब होना है। जैसा रिजल्ट होगा उस तरह के काम होंगे।

इसलिए ये बातें अभी से आउट नहीं की जा रही है। जैसे ही तीनों चरणों के मतदान खत्म होंगे उसके बाद इसकी सुगबुगाहट पब्लिक खेमे में आ सकती है।

हमने सूत्रों से ये भी जानने की कोशिश की कि आखिर केन्द्रीय मंत्रीमंडल छोड़ कर गिरिराज सिंह फिर से बिहार क्यों लौटेंगे। केन्द्रीयमंत्री तो अपने आप में बड़ा दायित्व है।

सूत्रों का कहना है कि आप ये समझिए कि केन्द्र में एनडीए वन में गिरिराज सिंह केन्द्रीय राज्यमंत्री बनाये गए थे…फिर जब एनडीए टू की बारी आई तो उन्हें प्रमोट कर केन्द्रीय मंत्री बनाया गया। इसलिए पीएम मोदी खेमे के बिहार भाजपा में वो छुपे रूस्तम की तरह हैं । ऐसे में बिहार भाजपा को मजबूती देने औऱ नया लीडरशीप देने के लिए गिरिराज सिंह का इस्तेमाल बिहार की सत्ता में भाजपा करेगी ही करेगी।

आप देख सकते हैं कि अभी से कि कुछ दिन पहले तक ये चर्चा थी कि बिहार में टिकट बंटवारे के दौरान केन्द्रीयमंत्री गिरिराज सिंह और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय की नहीं चली। जबकि दोनों ही लीडर पीएम मोदी और अमित शाह के खास माने जाते हैं। जिसमें नित्यानंद राय यादव जाति से है, इनकी नाराजगी की भी चर्चा थी, लेकिन इन्हें बिहार भाजपा के प्रभारी सांसद भूपेन्द्र यादव ने समझा-बुझाकर मना लिया था ..और गिरिराज सिंह के मामले को राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जेपी नड्डा ने संभाला । ऐसी खबरों की चर्चा टिकट बंटवारे के टाइम जोर पकड़ती रही….। ऐसे में कहीं ना कहीं इसको लेकर सवर्णों में भी गलत मैसेज गया कि क्या सच में ऐसा हुआ है। सच्चाई चाहे जो हो…भाजपा लीडर जानें…गिरिराज सिंह जानें लेकिन मैसेज तो बाहर जो गया वो यही गया कि सवर्ण लीडर की नहीं चली। इसकी नाराजगी भी कहीं ना कही अपने कार्यकर्ताओं के बीच गिरिराज सिंह को झेलनी पड़ी। और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय को भी। वैसे, नित्यानंद राय की बात चली तो बता दूं इनके बारे में बहुत पहले से आये दिन ये बातें होती रही हैं कि केन्द्रीय नेतृत्व को जब भी मौका मिलेगा बिहार भाजपा से मुख्यमंत्री बनाये जाने का, तो इन्हें सीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया जाएगा। लेकिन जब से भाजपा ने क्लीयर कट कह दिया है कि एनडीए की सरकार में जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ही सीएम होंगे तब से इनके नाम की चर्चा पर विराम लग गया है।

वहीं उधर, गिरिराज सिंह के मामले में जैसा कि अखबारों में भी खबरें आई कि बेगूसराय विधानसभा सीट गिरिराज सिंह ने अपने निकट संबंधी को थमा दी। जिससे बेगूसराय के सवर्ण कार्यकर्ता औऱ वोटर नाराज हुए। बेगूसराय के भाजपाई कार्यकर्ताओं ने शीर्ष नेतृत्व के बीच विरोध भी दर्ज कराया। लेकिन हुआ क्या, आखिरकार गिरिराज सिंह एक सीट दिलाने में सफल रहे लेकिन बेगूसराय जिले की सात सीट में मात्र तीन सीट ही भाजपा के हाथ लगी। जिसके कारण केन्द्रीयमंत्री गिरिराज सिंह खफा भी चल रहे थे। ऐसे में उन्हें मनाना पार्टी के लिए जरूरी भी था। ताकि सवर्ण वोटर भाजपा से बिदक कर विरोधियों को लाभ पहुंचाने के मूड में ना चला जाए…इसका भी ख्याल रखना जरूरी है। इसी सब को देखते हुए केन्द्रीयमंत्री गिरिराज सिंह को आगे बढ़ाने की पूरी प्लानिंग की जा रही है।

वर्तमान में चुनावी माहौल के बीच ऐसी भी चर्चा उठी कि गिरिराज सिंह भाजपा से सवर्णों की नाराजगी की वजह से चुनाव प्रचार भी नहीं करेंगे। बेगूसराय में तो जाएंगे ही नहीं…ऐसा वो ऑफ द रिकार्ड वो खुद भी बोल रहे थे…लेकिन गिरिराज सिंह के बारे में सबको पता है कि वो भोलेनाथ के भक्त हैं…जितना जल्द गुस्सा करते हैं उतना ही जल्द मानने पर मान भी जाते हैं।

बिहार चुनाव 2020 – चुनावी मिशन पर केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह । मौर्य न्यूज18 ।
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वही हुआ भी। वो बिहार आये और चुनाव प्रचार में पूरी तरह से लग गए। बेगूसराय में भी जनसभाएं की, रोड शो किया और जहां-जहां पार्टी की ओर से भेजा जा रहा है जा भी रहे हैं। स्टार प्रचारक के तौर पर खूब मेहनत कर भी रहे हैं। उनके जिम्मे रोज कार्यक्रम पार्टी की ओर से सौंपे जा रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर आप देखें तो पिछले एक हफ्ते से…केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान के साथ केन्द्रीयमंत्री गिरिराज सिंह की पटना में प्रेस-कॉफ्रेंस भी आयोजित की गई। फिर समस्तीपुर में पीएम मोदी की रैली में वो पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार के साथ मंच भी शेयर करते दिखे।

जब समस्तीपुर की रैली में पीएम मोदी ने केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से की गुप्तगू….सीएम नीतीश कुमार की कुर्सी पर बिठाकर की बातें…पीठ भी थमपाए….आप भी देखि इस वीडियो में….

https://www.facebook.com/NitishKumarJDU/videos/413445416712395/

https://www.facebook.com/NitishKumarJDU/videos/413445416712395/

समस्तीपुर, बिहार में आयोजित पीएम मोदी की रैली में….मंच पर यूं दिखी केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और पीएम मोदी की कमेस्ट्री। फोटो – मौर्य न्यूज18 ।
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समस्तीपुर की रैली में एक और खास नजारा देखने को मिला…जब सीएम नीतीश कुमार मंच पर पब्लिक को संबोधित कर रहे थे…इसी बीच पीएम मोदी से दूर बैठे गिरिराज सिंह को पीएम ने इशारे से अपने पास बुलाया और जिस कुर्सी पर सीएम नीतीश कुमार बैठे थे…उसी पर बिठाकर कानों में कुछ बातचीत की…कुछ देर तक पीएम मोदी और गिरिराज सिंह के बीच बातचीत चलती रही…फिर अंत में पीएम मोदी ने गिरिराज सिंह की पीठ थपथपाई। ये सब ऐसा था जो पीएम मोदी की नजदीकी और अंदर ही अंदर कुछ बड़ी हंड्डी में खिचड़ी पकने की बात को और बल देता है।

क्योंकि अमुमन सार्वजनिक मंच पर जब पीएम मोदी कुर्सी पर बैठे होंते हैं तो किसी को दूर से अपने पास बुलाकर बात नहीं करते हैं। हां, यदि कोई अगल-बगल हो तो दांये-बांये बैठे लोगों से कुछ बातें जरूर कर लेते हैं। लेकिन समस्तीपुर रैली में मंच से पीएम मोदी और मंत्री गिरिराज सिंह की जो कमेस्ट्री दिखी, वो कहीं ना कहीं बहुत गहरी और दूर के संकेत दे रहे हैं।

अब देखना होगा कि आगे क्या होता है। ये सब पूर्वानुमान है। और बिहार विधानसभा के रिजल्ट आने के बाद की तैयारी है।

हमने इस संबंध में बिहार के कुछ बड़े चेहरे वाले नेताओं से भी बातें टटोलने की कोशिश की तो किसी ने इस संभावना से इनकार भी नहीं किया और कहा कि ये सब कहना अभी जल्दबाजी होगी। राजनीति में हर रोज कुछ ना कुछ नया होता रहता है। परिस्थिति के अनुसार कब क्या होगा…कम से कम भाजपा में तो ये बात कोई शीर्ष नेता भी नहीं बता सकता है। वैसे, जानकारी के लिए आपको ये भी बता दें कि इसबार केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह खुद कह चुके हैं कि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का मेरा एक मात्र मिशन है। बस उसमें सफल हो जाउं…फिर मैं चुनावी राजनीति में हिस्सा नहीं लूंगा। यहां तक कई बार कह चुके हैं कि अब आगली बार बेगूसराय या कहीं से भी संसदीय चुनाव भी नहीं लड़ूंगा।

चलते-चलते एक बात और….

ऐसे में यदि केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बिहार भाजपा में फिर से कोई बड़े दायित्व के साथ लौंटे… इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो, बिहार में गिरिराज सिंह  अपनी नई और प्रमुख भूमिका के साथ कमाल कर सकते हैं और हिन्दू सम्राट वाली छवि को और उंचा कर सकें। सवर्ण वोटरों को भी भाजपा के प्रति नाराजगी दूर होगी। फिलहाल ये सब विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद की स्थिति है। वैसे, राजनीति में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी..इससे इनकार नहीं किया जा सकता।  

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ऐसा होने पर भाजपा को क्या-क्या हो सकता है फायदा….

– जहां तक फायदे नुकसान की बात है तो.. भाजपा नेता गिरिराज सिंह को बिहार के सवर्ण के तौर पर बड़ा नाम है। दूर-दूर तक इस कद का कोई लीडर भी नहीं है। ऐसे में सवर्ण खास कर भूूमिहार जाति जो ज्यादा गुस्से का इजहार करते हैं उनको खुश किया जा सकेगा।

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– दूसरा, ये कि सवर्ण मतदाता भाजपा को वोट करते वो उनके बीच भाजपा और मजबूती से अपनी पकड़ बनाएगी। क्योंकि आने वाले समय में जिस तरह से राजद महागठबंधन सवर्णों को फांसने में लगा है…उस ओर मुखातिब होने वाली जनता भाजपा के साथ बने रहना चाहेगी और विरोधी खेमे को इसमें खासी सफलता नहीं मिलेगी। आगे की राजनीति को भी ध्यान में रख कर ऐसा करना जरूरी होगा।

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– तीसरी बात ये कि…गिरिराज सिंह बेगूसराय से सांसद हैं। और बेगूसराय गंगा के पार उत्तर बिहार के पूरे इलाके का प्रमुख जोन है। यहां से पूरा उत्तर बिहार यानि मिथिलांचल, सिमांचल, कोसी, अंग क्षेत्र सहित इससे सटे इलाके में भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी। इन इलाकों के लीडर को लंबे अर्से से बिहार की सत्ता में इतना बड़ा दायित्व नहीं मिल पाया है। यदि गिरिराज सिंह को इतना बड़ा दायित्व मिलता है तो इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ेगा और जनता के बीच भाजपा को लेकर अन्य जातियों की भी गोलबंदी मजबूती से हो सकेगी। खासकर कोसी, मिथिलांचल और अंग क्षेत्र में।


– आखिरी बात ये भी कि भाजपा नेता गिरिराज सिंह हिन्दू सम्राट के रूप में भी फेमस हैं, सांसद के चुनाव में भी जिस तरह की चुनौती उनके सामने थी, भाजपा का कोई दूसरा नेता उन परिस्थितियों का सामना करने के लिए दूर-दूर तक नहीं था। देशभर को पता है, भाजपा जिस ऐजेंडे पर काम करती रही है, उसके लिए गिरिराज सिंह जैसे फायर ब्रांड नेता को मजबूती देना भी पार्टी अपनी जरूरत समझती है। इससे समय-समय पर पार्टी का हिन्दुत्व का एजेंडा भी बरकरार रहता है। इसलिए भी गिरिराज सिंह को लंबी पारी खेलने वाला दायित्व सौंपना जरूरी होगा।

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नई दिल्ली से मौर्य न्यूज18 के लिए नयन की रिपोर्ट ।

Nayan Kumarhttp://www.mauryanews18.com%20
MANAGING EDITOR MAURYA X NEWS18 PVT LTD . #March 2019 to till now ------- #20yrs Experience field of Journalism, #Mass Com - Print Media & Electronic Media #Former Sr. Subeditor, Dainik Jagaran, India's No-1 Hindi Daily News Paper, Patna, Bihar, 12 April 2000 -March2008 #Former Channel Co-Ordinator, Maurya Tv, Patna, Bihar/Jharkhand, April 2008 - March 2013 Channel Co-Ordinator, Zee Bihar/Jharkhand news from march 2013- march2014 #Editor, Ommtimes.com news portal, Patna, Bihar, April 2014 - AuG2018 #Former Editor, Maurya News, news Portal, Sept.2018-Feb2019

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