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शनिवार, जून 19, 2021
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संवाद के सभी रास्ते बंद !

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गेस्ट रिपोर्ट

डॉ ध्रुव गुप्त की कलम से

भारत और पाक के बीच कश्मीर को लेकर युद्धोन्माद अभी चरम पर है। संवाद के सभी रास्ते बंद होने के बाद दोनों तरफ युद्ध की पटकथाएं लिखी जा रही है। दोनों देश यह भूल रहे हैं कि उनके बीच आने वाला कोई भी युद्ध 1965, 1971 या 1999 जैसा नहीं होगा। परमाणु हथियारों और संहारक मिसाइलों के इस युग में युद्ध लड़े तो जा सकते हैं, जीते नहीं जा सकते। इस युद्ध को टालना अब भारत और पाकिस्तान के नहीं, सिर्फ और सिर्फ कश्मीरियों के हाथ में है। तरीकों पर भले मतभेद हों, अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के सरकार के फैसले से देश कमोबेश सहमत है।

फैसले पर राजी हुए कश्मीरी तो हालात बदल सकते

अगर सरकार अपने प्रयासों से कश्मीर के लोगों को भी इस फैसले के साथ चलने के लिए राज़ी कर लेती है तो हालात बदल सकते हैं। अगर तमाम नियंत्रण हटा लेने के बाद कश्मीर में आतंक के एक नए और ज्यादा वीभत्स दौर की शुरुआत होती है तो भारत के पास पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे आतंक के अड्डों पर हमला करने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा। सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद फ़ज़ीहत झेल रही पाकिस्तान की सनकी सेना प्रत्याक्रमण तो करेगी ही करेगी।उसके बाद क्या होगा इसकी सिर्फ कल्पना की जा सकती है।

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कश्मीर तय करेगा भारत-पाक का भविष्य

अब अगर युद्ध हुआ तो कश्मीर तो शायद बचा रह जाय, भारत और पाकिस्तान दोनों इस हद तक ज़रूर बर्बाद होंगे कि उन्हें एक बार फिर खड़ा होने में सदियों लग जाएंगे ! जो स्थितियां बन गई हैं उनमें कश्मीर का भविष्य भारत और पाकिस्तान नहीं तय कर सकेंगे। भारत और पाक का भविष्य अब कश्मीर के लोगों को तय करना है !

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गेस्ट परिचय

रिपोर्ट आपने लिखी है

डॉ ध्रुव गुप्त

आप बिहार से हैं। आईपीएस हैं। देश में बतौर पुलिस अधिकारी आपने अपनी सेवा दी है। अब आप साहित्य जगत में अपनी रचना के जरिए उम्दा कार्य कर रहे हैं। आपकी रचना समाज को दिशा देने वाली होती है। आपकी रचना देश की प्रतिष्ठित अखबारों में प्रकाशित होती रही है। साहित्य जगत में आप प्रतिष्ठत रचनाकार हैं।

मौर्य न्यूज18 के लिए गेस्ट रिपोर्ट

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