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कांमेश्वर चौपाल : जिसने आयोध्या राममंदिर निर्माण के लिए रखी थी पहली ईंट ! Maurya News18

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अब जा रहे रामलला मंदिर खड़ा करने

नयन, पटना, मौर्य न्जूज18

वक्त 9 नम्बर 1989 । अयोध्या का दृश्य समझिए। राम मंदिर निर्माण के लिए दुनियाभर से राम भक्त जुटे थे । विवादित डांटे को ढहाया जाना था। लाखों-लाखों की तादाद में राम भक्तों की गूंज से पूरा अयोध्या राममय हो चला था । घोषणा ये हुई थी कि देशभर से राम भक्तों को अपने साथ शिलापट्ट लानी है यानि ईंट लानी है। सो, अयोध्या में इसी मकसद से जुटे थे लाखों भक्त। इसी बीच बिहार के गया से एक राम भक्त पूरा हूजुम लेकर अयोध्या पहुंचा। नाम कामेश्वर चौपाल। राम के अनन्य भक्तों में से एक । सो, उनकी राम ने लाज भी रखी। पूरी दुनिया को पता चल गया कि पहली ईंट इसी भक्त ने रखी थी। जिसका नाम था कामेश्वर चौपाल।

पटना की मेयर सीता साहू कामेश्वर चौपाल को अयोध्या के लिए रवाना करते हुए।

आपको बता दें कि कामेश्वर चौपाल बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले है। ये इनकी जन्म भूमि है। औऱ समस्तीपुर का रोसड़ा इलाका इनकी कर्म भूमि है। इस वक्त रामलला मंदिर के बने ट्रस्ट के सदस्य भी हैं। इनका संघर्ष इनके जीवन काल में ही रंग लाया। जिसने मंदिर के शिलान्यास के दौरान पहली ईंट रखी । वो अब मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या पहुंच रहा है। तो ऐसे पल में उन यादों को शेयर करने के लिए मौर्य न्यूज18 ने कामेश्वर चौपाल से खास बातचीत की। पेश है बातचीत की पूरी रिपोर्ट ।

कामेश्वर चौपाल बातों-बातों में उन दिनों में खो जाते हैं। कहते हैं… उस वक्त लाल कपड़े में लपेटे शिलापट्ट वाला ईंट आस्था से लबा-लब था। वो ईंट नहीं मानों साक्षात प्रभु राम के लिए गिफ्ट था, भक्त तो ईंट को पूरे रास्ते राम की तरह पूजते रहे । अयोध्या पहुंचने तक यही सिलसिला रहा। आपको क्या बताउं। उस वक्त जो अयोध्या में रामभक्तों की जुटान हुई थी । शायद, अयोध्या ने कई सौ सालों से इतनी भीड़ एक साथ नहीं देखी होगी। माहौल अजीब सा था। कभी भी कोई भी घटना घट सकती थी । एक भगदड़ काफी था भीड़ में हिंसा फैलाने के लिए। सबसे बड़ा डर यही था कि कोई अफवाह ना फैले। क्योंकि भीड़ इतनी थी कि कुछ भी अफरातफरी मचती तो बड़ी संख्या में रामभक्तों की जान जा सकती थी। लेकिन खैर प्रभु की कृपा से ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सो, सबके सब बेफ्रिकी से रामभक्ति में जुटे थे। नारे गुंज रहे थे… मंदिर वहीं बनाएंगे…जय श्रीराम…जय श्रीराम । घंटों इसत रहे के नारे लगते रहे औऱ अयोध्या का आसमान गूंजता रहा। जय श्रीराम के नारे के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था। शरीर कांपने लगा था। क्यों हम रामलला के करीब थे।

भीड़ में पुलिस भी मूक दर्शक बनी थी। लेकिन रामलला गर्वगृह के पास बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात था। लेकिन हर राम भक्त के दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि सब प्रभु राम की कृपा से हो रहा है। राम की कृपा से जो होगा देखा जाएगा। ये सब बातें नारों में गूंजती थी। “राम की कृपा से जो होगा देखा जाएगा….जय श्रीराम जयश्री राम” ये गंगन चुम्बी नारे लगते। एक शैलाब राम भक्तों का एक नारे पर लाखों कुर्बान । आप समझिए उस दृश्य को, जब जयश्रीराम के नारे गुंजते थे…तो देह सिहर जाता था। कंपन होने लगती थी।

मैं बिहार के गया से ईंट लेकर अयोध्या के लिए चला था…।

मैं बिहार के गया से शिलापट्ट लेकर चला था। शिलापट्ट लाल कपड़े में बांधा था। गया से आगे बढ़ने के बाद धीरे-धीरे मेरे साथ बड़ी तादाद में लोग जुटते गये। कोई गाड़ी से सवार, तो कोई पैदल। एक अजीब पागलपन लिए हम पहुंचे थे अयोध्या। हताष-बदहवाष । भूख-प्यास भी मिट चुकी थी। माथे पर सिर्फ राम नाम सवार था। शरीर कमजोर पड़ गया था। कांपने लगे थे। लेकिन हिम्मत इतनी बुलंदियों पर था कि लग रहा था यही मौका है राम मंदिर के निर्माण का चुके तो गये। सो, नारे गुंजते रहे। इसी बीच हम राम भक्त पुलिस बल को चीरते हुए। रामलला के गर्व गृह में पहुंच गये। फिर तो जो पीछे से भीड़ ईंट लिए घुसी मत पूछिए किसका क्या हो जाएगा भीड़ में दम घूंटने वाली स्थिति पैदा हो गई। लेकिन कहते हैं ना प्रभु के नाम में बहुत ताकत है सो, ताकत मिलती रही। और पहली ईंट रखने में मैं सफल रहा।

उन दृश्यों को याद कर अब भी आंसू आ जाते हैं। आंखें ढ़बढ़बाने लगती है। आपको क्या बताउं जब मैंने पहली ईंट रखी तो फिर तो कई ईंट रखे जाने लगे। सबने मुझे गोद में उठा लिया। और मैं तो खुशी के मारे फफक-फफक के रोने लगा। आंखें समंदर की तरह बहने लगी। लगा जैसे प्रभु राम मुझे मिल गये हों। क्या बताएं। आज के दिन अशोक सिंघल याद आते हैं। वो भी वहां थे। युगपुरूष परमानंद महाराज भी थे। सबका सपना अब पूरा होने को है। उस वक्त चो हम लोग जिस संघर्ष के आंसुओं में… जिस संताप के आंसुओं में…जिस अपमान के आंसुओं के साथ जी रहे थे… वक्त ने उसे मिटा दिया है। सच बोलूं तो आंखे तो अब भी नम हैं। लेकिन ये खुशी के आंसू हैं। ये गर्व के आंसू हैं।

   कामेश्वर चौपाल कहते हैं…संयोग देखिए…प्रभु की कृपा देखिए… कि वो पहली शिलापट् रखने की तारीख 9 नम्बर 1989 थी और सुप्रीम कोर्ट का फाइनल फैसला भी 9 नम्बर 2019 था। दोनों तारीख 9 नम्बर ही निकले । ये सब देख कर लगता है कि प्रभु ने हर चीज तय कर रखी है। कब क्या होना है।

उस वक्त मैं संघ का सिपाही होने के नाते गया में रह रहा था, औऱ गया से ही शिलापट्ट लेकर निकला था। अब जब मंदिर निर्माण होने को है तो पटना में हूं …यहां पटना जंक्शन पर हनुमान जी का आशीर्वाद लेकर जा रहा हूं। संयोग ये भी कहिए कि …बिहार से अयोध्या के लिए पटना की मेयर ने मुझे विदा किया है और उनका नाम सीता है। तो, मैं ये कह सकता हूं कि सीता मैया की कृपा भी औऱ हनुमान जी की कृपा भी मुझ पर बरकरार है। मेरे लिए इस वक्त खुशी का ठीका नहीं है। सच कहूं तो, मंदिर निर्माण का सपना पूरा होते देख कर हर पल आंखें ढ़बढबा जाती है। जिस मुश्किल दौर से गुजरा हूं। राम भक्त को ही पता है। इस वक्त उस महान राम भक्त की याद आती है….जिनका नाम है अशोक सिंघल। काश वो आज होते।

राम भक्त अशोक सिंघल । राम मंदिर के निर्माण हेतु संघर्ष का सिपाही। जो अब नहीं रहे।

हमने पूछा भी कि एक वक्त था…जब राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर में रथ यात्राएं हो रही थी..तब ये बिहार ही था जहां लालू प्रसाद मुख्यंत्री थे और उन्होंने भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवानी का रथ रोका और  जेल भेज दिया।

अब देखिए  जब मंदिर निर्माण होने को है तो लालू यादव जेल में हैं और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी बाहर हैं। इस पर क्या कहेंगे।

कहने लगे, ऐसे लोगों के बारे में हम राम भक्त का कुछ कहना ठीक नहीं । राम की कृपा से जो सजा मिलनी है वो उन लोगों को मिलकर ही रहेगी, जो इसमें बाधक बने। क्योंकि ये पूरी तरह से आस्था का विषय है। प्रभु राम के लिए पूरी दुनिया में, पूरे बह्मांड में आस्था है। ये कोई धर्म विशेष के लिए नहीं हैं। बल्कि मुस्लिम भी राम को अपना पूर्वज मानते हैं। उनकी इबादत करते हैं। ऐसा कुछ देशों में देखा जा सकता है। जहां राम लीला होती है। अयोध्या में भी जो मुस्लिम रहते हैं वो, प्रभु राम को ही अपना पूर्वज मानते हैं। उनकी भी असीम आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में राम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए जिनके मन में कोई भी खोट है या था या रहेगा सबको उसकी सजा मिलेगी। ये खुद ही सबको महसूस भी होगा। इसलिए लालू प्रसाद के बारे में भी यही बात फिट बैठती है।

इस बार वहां जाकर क्या करने वाले हैं।

करना क्या है। कोरोना संकट में ये सब हो रहा है। सो, सीमित लोग ही वहां जुटने हैं। मुझे भी वहां रहना ही है। मैं मंदिर निर्माण ट्रस्ट कमेटी का सदस्य हूं इस नाते भी रहना है। इस वक्त मैं पटना से अकेले ही अपने निजी वाहन से सड़क मार्ग के जरिए अयोध्या पहुंचा हूं। इस पावन घड़ी में गर्व औऱ गौरवपूर्ण आंसुओं से लबा-लब हूं । सपने साकार होने की बात अपने जीते जी देख रहा हूं- बयां नहीं कर पा रहा हूं। क्या बोलूं। बस, एक ही बात बोलते रहने का दिल करता है..वो है…जय़श्रीराम…जयश्रीराम ।

पटना से मौर्य न्यूज18 के नयन कुमार से कामेश्वर चौपाल की खास बातचीत पर आधारित रिपोर्ट ।

Nayan Kumarhttp://www.mauryanews18.com%20
MANAGING EDITOR MAURYA X NEWS18 PVT LTD . #March 2019 to till now ------- #20yrs Experience field of Journalism, #Mass Com - Print Media & Electronic Media #Former Sr. Subeditor, Dainik Jagaran, India's No-1 Hindi Daily News Paper, Patna, Bihar, 12 April 2000 -March2008 #Former Channel Co-Ordinator, Maurya Tv, Patna, Bihar/Jharkhand, April 2008 - March 2013 Channel Co-Ordinator, Zee Bihar/Jharkhand news from march 2013- march2014 #Editor, Ommtimes.com news portal, Patna, Bihar, April 2014 - AuG2018 #Former Editor, Maurya News, news Portal, Sept.2018-Feb2019

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